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best 50 moral stories in hindi 

50 moral stories in hindi (50 नैतिक कहानियाँ हिंदी में)  – दोस्तों स्वागत है आपका ज्ञान से भरी  कहानियों की इस रोचक दुनिया मे। दोस्तों जीवन मे कहानियों का विशेस महत्तव होता है |

क्योकि इन कहानियो के माध्यम से हमे बहुत कुछ सीखने को मिलता है |

 

इन कहानियों के माध्यम से आपको ज़रूरी ज्ञान हासिल होंगे जो आपको आपकी लाइफ मे बहुत काम आएंगे |

यहाँ पर बताई गई हर कहानी से आपको एक नई सीख मिलेगी जो आपके जीवन मे बहुत काम आएगी |

 

हर कहानी मे कुछ न कुछ संदेश और सीख (moral )छुपी हुई है |

 

तो ऐसी कहानियो को ज़रूर पढ़े और अपने दोस्तो और परिवारों मे भी ज़रूर शेयर करे |बच्चो के लिए और बड़ो के लिए  हर प्रकार की शिक्षाप्रद कहानियाँ moral stories

 

hindi kahani- 50 moral stories in hindi 

 

 

तो चलिये शुरू करते है हमारी आज की कहानी 

 

मोहन दास  की असीमित इच्छाए |hindi moral stories

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काशी के एक गाँव मे मोहन दास नाम का एक 10 साल का बालक अपने पिता के साथ रहता था | जिसका जन्म एक बेहद गरीब परिवार मे हुआ था |

मोहन दास जब 5 साल का था  तब उसकी माता किसी गंभीर बीमारी के चलते पैसो की कमी और आस पास कोई चिक्त्त्सा केंद्र न होने की वजह से चल बसी थी | 50 moral stories in hindi 

 

मोहन दास के पिता जी ठाकुरो के खेतों मे मज़दूरी किया करते थे जिससे मिलने वाले पैसो से मुश्किल से ही घर का खर्च चल पाता  था | 

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उन समय मे छोटे छोटे  गुरुकुल हुआ करते थे जहां पर  क्षिशा का  ज्ञान दिया जाता था जिसकी मासिक फीस 100 रुपए थी |

 

 

मोहन दास के पिता जी जैसे तैसे मज़दूरी करके रोज़ का मात्र 20 रुपया ही कमा पाते थे |

 

यानी की महीने का 600 रुपया| जिसमे से 100 रुपए मोहनदास की फीस मे चले जाते थे और बाकी के पैसो से घर का गुज़ारा होता था |

 

मोहन दास पढ़ाई मे अच्छा था और साथ मे बड़ा ही जिज्ञासु भी था |

 

गुरुकुल मे मोहन दास  बहुत मन  लगा कर पढ़ता और अपने मास्टर से खूब सारे सवाल करता. मास्टर जी भी मोहन दास के सभी सवालो जवाब दे देते इस तरह मोहन दास के मन मे चल रहे सवालो की जिज्ञासा शांत हो जाती थी | आप पढ़ रहे है 50 moral stories in hindi 

 

गुरुकुल से छुट्टी होते ही वह तुरंत अपने पिता के पास उनके काम  मे हाथ  बटाने के लिए पहुँच जाता |

 

धीरे धीरे ऐसे ही समय बीतता गया | ठीक 6 साल बाद मोहन दास और उसके  पिता की ज़िंदगी मे फिर से दुखो ने दस्तक दे दी |

 

 

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मोहन दास जब 16 साल का हुआ तब उसके पिता बीमार पड़ने लगे थे अब उनमे मज़दूरी करने की ताकत नहीं थी |  पैसे न होने की वजह से मोहन दास का गुरुकुल भी छूट चुका था |

 

 

इस तरह मोहन दास ने 7 साल की उम्र से 16 साल की उम्र तक ही गुरुकुल से शिक्षा हासिल कर पाता है  |

 

मोहन दास पिता को लेकर  बहुत परेशान था क्योकि  मोहन दास के पास , अपने पिता का इलाज़ कराने के लिए अब पैसे नहीं थे |

 

जैसा की मोहन दास बड़ा ही जिज्ञासु बालक था जिस वजह से वह किसी भी अमीर इंसान को देखता तो अपनी ज़िंदगी के बारे सोचने लग जाता |

 

इन सब हालातो के चलते मोहन दास के दिमाग पर ऐसा असर हुआ की वह मज़दूरी करने लगा | मोहन दास वो हर संभव प्रयास करने लगा जिससे उसके पास धन आए और वो अपने पिता की बीमारी  का उपचार करवा सके |

 

मोहन दास ने दिन रात मेहनत की और अपने पिता का उपचार करवाया |

 

मोहन दास के पिता की हालत सुधारने लगी और देखते ही देखते पिता जी स्वस्थ हो गए |

 

पिता जी मोहन दास की मेहनत  से बहुत खुश थे | मोहन दास के पास अब इतना धन हो चुका था की मोहन दास ने एक खेत और दो गायखरीद ली थी |

 

जिन हालातो के चलते मोहनदास ने यह कदम उठाए थे आज उसी की बदौलत मोहन दास के पास खूब धन था जिससे उसकी ज़िंदगी की लगभग सब जरूरते पूरी हो जाती थी |

 

मोहन दास जिज्ञासु होने की वजह से  बड़े बड़े धनवान लोगो की ज़िंदगी (life style) के बारे जानने लगा  जिसका असर मोहन दास  के दिमाग पर यह हुआ – उसकी मानसिकता अब यह बन चुकी थी की अब धन ही सब कुछ है धन से कुछ भी खरीदा जा सकता है |

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मेरे पास जितना अधिक धन होगा मैं उतना ही खुश रहूँगा और मेरे पिता भी | अपनी इसी इच्छा को पूरा करने के लिए मोहन दास ने दूध का व्यापार शुरू कर दिया | आप पढ़ रहे 50 moral stories in hindi 

 

 

यहीं से शुरू हुआ सफर मोहन दास के धनवान बनने का |

 

अब देखते ही देखते उसकी जरूरते इच्छाओ मे बदलने लगी| अपनी इच्छाओ  को पूरा करने के लिए मोहन दास धन का सहारा लेता |

 

कुछ समय बाद मोहन दास के पिता  अपनी इच्छा जताते हुए बोले – बेटा अब तुम जल्दी ही शादी कर लो , मेरी जिंदगी का अब कुछ पता  नहीं कब क्या हो जाए |

 

मोहन दास अपने पिता की इच्छा को पूरा करने के लिए शादी के लिए मान जाता है , मोहन दास का विवाह हो जाता है |

 

मोहन दास खुशी पाने के लिए  एशों आराम के सभी भोग विलास समान खरीद लेता एक आलीशान हवेली भी बनवाई |

 

 

अब एक दिन ऐसा भी आया की  सब कुछ होने के बावजूद भी मोहन दास दुखी सा रहता था क्योकि उस का मन सन्तुस्ट नहीं होता था |

 

इधर एक तरफ उसकी इच्छाए जो खतम होने के नाम ही नहीं लेती थी |अब मोहन दास का मन कहीं भी नहीं लगता था |वह परेशान रहने लगा |

 

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जब से मोहन ने  दास अपनी तमाम इच्छाओ को पूरा करने सफर शुरू किया था  तब से मोहन दास सुख चैन की की नींद नहीं सो पाया था |

 

मोहन दास की हालत पागलों जैसी होने लगी थी उसे संतुस्टी नहीं मिल रही थी उसे समझ नहीं आरहा था की क्या करे |

 

इधर भगवान बुद्ध नेपाल से  बौद्ध धर्म का प्रचार करते हुए भारत मे काशी की तरफ आरहे थे | भगवान बुद्ध काशी के एक गाँव मे रुक हुए थे |

 

मोहन दास  को  इस बात का पाता चलते ही वह भगवान बुद्ध जी के पास पहुँच जाता है | भगवान बुद्ध अपने अनुयाइयों को प्रवचन सुना रहे थे | इतने मे मोहन दास बुद्ध जी के पास रोते  हुए पहुंचा ओर बोला मैं इस ज़िंदगी मे बहुत परेशान हो गया हु ।

 

 

 हे बुद्ध ! मैंने जीवन मे खूब धन कमाया ताकि अपने सुकून के लिए कुछ भी खरीद सकूँ |  मुसीबत के समय मेरे यह धन मेरे बहुत कम आए | इनसे मैंने अपनी हर सुख सुविधा की वस्तुएं खरीदी जिनसे मुझे बहुत खुशी मिली |

तो ऐसी क्या वजह की जो मेरा मन संतुस्त नहीं हो रहा ?

 

आज मेरे पास सब कुछ है जिससे मैं  खुश तो रहता हूँ लेकिन अधिक समय तक नहीं । सब कुछ होने के बाद भी मुझे सुकून क्यों  नहीं मिल रहा मन को शांति और संतुस्टी नहीं मिल रही  जो मिलनी चाहिए ? किरपा मेरी इस समस्स्या का समाधान करें अन्यथा मैं खुद को खत्म कर दूँगा |

 

तब भगवान बुद्ध मुस्कराए और कहा !  तुम्हारे दुख का कारण तुम्हारी असीमित इच्छाए है | धन दौलत से तुम लंबे समय की खुशिया तो खरीद सकते हो लेकिन सुकून की ज़िंदगी नहीं |

 

धन से इंसान सुकून का एक पल भी नहीं खरीद सकता है | धन से तुम खुशियों का महल , मखमल के गद्दे और सोने चाँदी से बनी  चार पाई  तो खरीद लोगे लेकिन ! सुकून की नींद कभी नहीं खरीद सकते | क्योकि यह धन से नहीं ज्ञान से खरीदे जाते है |

 

 सुकून खुद तुम्हारे अंदर मौजूद है , जो की , एक असीमित इच्छाओ वाले पहाड़ के नीचे दबा  हुआ है |

 

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  जिस दिन तुम अपनी असीमित इच्छाओ के विचारो को एक सीमित दायरे मे कैद कर लोगे तो उसी दिन से  असीमित इच्छाओ वाले पहाड़ के नीचे दबा हुआ  सुख और सुकून आज़ाद हो कर तुम्हारे जीवन मे  बस जाएंगे |

 

 

बुद्ध की इन बातों का मोहन के मन पर सकारात्मक असर हुआ | मानो मोहन के सर से कोई बोझ उतर गया हो | 

 

 

अब मोहन के अंदर खुद को सुखी करने की कोई इच्छा शेस नहीं बची थी वो समझ चुका था की मेरी परेशानी का कारण मेरी यह असीमित इच्छाए ही है |

 

जिस वजह से मैं सुख की नींद कभी नहीं सो पाया | कभी भी सुख के फल का स्वाद नहीं चख पाया था | अब मुझे कुछ नहीं चाहिए | आप पढ़ते रहो 50 moral stories in hindi 

 

 

कुछ दिन बाद मोहन ने खुद यह अनुभव  किया की  अब सच्च मे कितना सुकून है मेरी जिंदगी मे | शुरू से मैं मूर्ख , सुकून पाने के लिए खुद पर  धन दौलत लुटाता रहा  लेकिन सुकून तो मेरे अंदर ही था जो असीमित इच्छाओ के अंधेरे मे कहीं खो गया था |

 

और आज मन से मैं बहुत हल्का महसूस कर रहा हूँ | आज जा कर मेरे   मन को सुख की  संतुस्टी प्राप्त हुई है | जय हो महात्मा बुद्ध की जिन्होंने  मुझे यह ज्ञान दिया |

 

अन्यथा मैं यूं ही सारी ज़िंदगी सुख चैन की तलाश मे भटकता रहता और अंततः मृत्यू को प्राप्त हो जाता | 50 moral stories in hindi 

 चलिये जानते हैं इस 50 moral stories in hindi से हमे क्या सीखने को मिला |

 

तो दोस्तों इस 50 moral stories in hindi  से हमे यह सीख लेनी चाहिए की अपनी इच्छाओ की सीमित ही रखे तो ही जीवन मे सुख का अनाद ले सकते है |

50 moral stories in hindi को अपने सभी दोस्तो मे जरूर शेयर करे ताकि वह भी इन कहानियों को पढ़कर अपने ज्ञान को बढ़ा सके इन 50 moral stories in hindi से अनमोल वाली अनमोल सीख के बारे मे समझ सके |

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Hindi Kahani 2 | 50 moral stories in Hindi –

किसान की ईमानदारी का फल 

 

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लखनऊ के एक छोटे से गाँव मे  राम सहाय नाम का युवक अपने परिवार सहित रहता था | राम सहाय की उम्र 50 साल थी जिसकी एक बीवी दो बेटियाँ औए एक बड़ा बेटा था |

 

बेटे का नाम घन श्याम था | घनश्याम हमेशा खेतों मे  अपने पिता का हाथ बटाता| दोनों बाप बेटा दिन रात मेहनत करके अपने खेतों मे फसल  उगाते और पक  जाने पर उसे शहर की मंडी मे ले जाते और बेच देते |50 moral stories in hindi 

 

 

बस यही थी उनके पूरे परिवार की कमाई जिससे वह घर का सारा खर्च चलाते थे और अपनी छोटी मोटी जरूरते पूरी करते थे | उस समय दूर गाँव शहरों मे भी कमाई के बहुत कम साधन हुआ करते थे |

 

एक समय ऐसा आया की जब फ़सल  पक कर तैयार हो चुकी थी की मौसम खराब होने लगा | तेज़ तूफान आया और घन घोर बारिश होने लगी |

जिसके चलते सारी फसल खराब हो गई | अपनी पूरी मेहनत इस बरबाद बर्बाद होते देख बाप बेटे की आंखो मे आसू  आ गए |

 

क्योकि अब वो कुछ कर भी तो नहीं सकते थे | मेहनत भी सारी बेकार गई और महाजन से खेती के लिए जो पैसे उधर लिए थे आब उसे चुकाना तो दूर घर मे खाने तक के लाले पड़ चुके थे |

 

यह सोच पूरा परिवार दुखी था चिंतित था | कुछ दिन तो घर मे बचे हुए राशन से दल रोटी खा कर अपनी भूख मिटाते रहे  रहे.  एक दिन ऐसा भी आया की घर मे खाने को कुछ भी नहीं था |50 moral stories in hindi 

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तब बाप ने अपने बेटे घन श्याम से कहा की बेटा यहाँ अब  कोई कमाई तो दिख नहीं रही और ऊपर से महाजन  का कर्जा भी सर पर खड़ा है |

क्यों न तुम शहर जा कर देखो कहीं कोई काम  मिल जाए | घर की आर्थिक तंगी को देखते हुए  घन श्याम शहर जाने को तुरंत तैयार हो  गया |

 

घनश्याम  काम  की खोज मे पैसा कमाने के लिए जयपुर शहर की तरफ चल पड़ा | शहर पहुँच कर काम  पाने के लिए बहुत कोशिश की लेकिन कहीं भी बात बन नहीं रही थी | हर तरफ बस निराशा ही हाथ आती |

 

घनश्याम जो पैसे साथ मे लाया था वो लगभग खतम ही हो चुके थे | घनश्याम ने फैसला किया की वह आब एक वक़्त खाना ही खाएगा,  ताकि पासे कुछ दिन और चल सके | शायद तब तक कोई नौकरी हाथ लग जाए |

 

देखते ही देखते 5 दिन और बीत गए | नौकरी नहीं मिली | अब  घनश्याम बहुत निराश हो चुका था | पैसे भी नहीं थे |

 

अब घनश्याम के मन मे आया की क्यों न आब गाँव वापिस लौट चला जाए लेकिन खाली हाथ गाँव जाकर  करेगा भी  क्या?  वहाँ पहले से ही  कर्ज चुकाना बाकी  है |

 

इतना सोचते  हुए घनश्याम अपनी ज़ेब टटोलता है जिसमे से  आखरी 50 का नोट निकलता है | यह  देख घनश्याम  की आँखों मे आँसू आ जाते  है |

 

सुबह के सात बज चुके थे | कल से घनश्याम ने कुछ खाया तक नहीं था | खाता भी कैसे पासे भी तो नहीं थे |

 

तभी एक विचार आया की क्यों न किसी मंदिर चला जाए हो सकता वहाँ कोई भोजन दे दे |

 

जब घनश्याम मंदिर पहुंचा तो वहाँ एक महान आदमी खाना बाट रहा था | यह देख घनश्याम भी खाना खाने के लिए कतार  मे लग गया | खाना मिला तो पत्तल ले कर वही मंदिर की सीढ़ियों पर बैठ गया |

 

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तभी एक सेठ पूजा की थाली लिए मंदिर से बाहर निकले. सेठ का पैर मंदिर की सीढ़ियों पर फिसल गया | सेठ सीढ़ियों पर गिर गया इतने मे लोग सेठ की तरफ भागे और सेठ को संभाला |

 

सेठ को उठाया और थाली उनके हाथ मे  थमा दी | भगवान का शुक्र जादा चोट नहीं लगी थी | सेठ अपनी कार मे बैठा और वहाँ से चला गया |50 moral stories in hindi 

 

तभी घन श्याम की नज़र सीढ़ियों पर पड़े एक पर्स पर पड़ी | घनश्याम  ने पर्स उठाया और खोला ! तो उसमे नोट ही नोट भरे पड़े थे |

 

वह समझ गया की हो न हो यह पर्स उन्ही  सेठ का ही है | जब पर्स को ध्यान से देखा तो उसमे एक कार्ड था जिस  पर जौहरी बाज़ार के एक दुकान का पता लिखा हुआ था |

 

घनश्याम उस पते पर पहुंचा और दुकान के अंदर गया | दुकान मे सामने वही सेठ बाथे हुए थे  जिका पर्स मंदिर मे गिर गया था |

 

घनश्याम ने सीधा जा कर उनका पर्स उनकी टेबल पर रख दिया और बोले की आपका पर्स वहाँ मंदिर पर गिर गया था |अपना पर्स पाकर सेठ जी बहुत खुश हुए |

 

सेठ ने अपना पर्स खोला तो सारे नोट वैसे ही थे | तब सेठ ने  घनश्याम की तरफ हैरानी से देखा और पूछा की ! क्या तुम्हारे मन मे यह ख्यान नहीं की नोटो से भरा पर्स तुम ही रख लो ?

 

तब घनश्याम बोला ! नहीं सेठ जी ऐसा करना मेरे लिए पाप होता क्योकि पिता जी हमेशा ईमानदारी ही सिखाई है | मेरे पिता जी एक किसान है मैं एक किसान का बेटा हूँ |

 

जैसे भगवान भरोसे किसान की फसल होती है उसी तरह हमारी ज़िंदगी भी भगवान भरोसे होती है |

 

बाईमानि से कमाए गए धन से कभी भी इंसान संतुस्त नहीं हो सकता | और बाईमानि से कमाए गए धन की कीमत दोगुना धन देकर चुकनी पड़ती है |

 

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सेठ जी घनश्याम की इन बातों से बहुत खुश हुए और तुरंत पर्स से 1000 रुपए निकाल कर  इनाम के तौर पर घनश्याम  को  देने लगे तो घनश्याम ने यह बोलते हुए की यह तो मेरा फर्ज़ था  पैसे लेने से इन्कार कर देता है

|

तब सेठ ने घनश्याम के सर पर हाथ रख कर आशीर्वाद देते हुए कहा की बेटा ज़िंदगी मे कभी जरूरत पड़े तो बिना झिझक चले आना |

फिर सेठ जी ने पूछा तुम रहते कहाँ हो बेटा ?

घनश्याम बोला ! सेठ जी मैं कभी सड़क पर तो कभी किसी दुकान के बाहर रात होने पर वही  भूखे सो कर रात बिता लेता हूँ |

यह सुन सेठ हक्का बक्का रह गया | सेठ  हैरानी भरे भाव से पूछने लगा क्यो बेटा ऐसा क्यों ? तुम कौन  सा काम करते हो यहाँ ?

 

सेठ का यह सवाल सुन घनश्याम मे आब जवाब देने ही हिम्मत नहीं रहती  वह बहुत भावुक हो जाता है और रोने लगता है |यह देख सेठ जी ने उसे पानी पिलाया | और फिर से वही सवाल पूछा तब घनश्याम ने सारी बात बताई |

 

घनश्याम की बातों को सुन सेठ जी ने घनश्याम को तुरंत अच्छी पगार पर अपने यहाँ नौकरी पर रख लिया | रहने और खाने पीने का भी बेहतर इंतजाम कर दिया | आप पढ़ रहे है 50 moral stories in hindi 

 

50 moral stories in hindi कहानी से सीख 

तो देखा  दोस्तो ! ईमानदारी का कैसे हर कोई सम्मान करता है | निःस्वार्थ मन से अच्छा कार्य करते रहो फल ज़रूर मिलता है | जैसे घनश्याम को मिला |

 

 

 

 

आगे पढ़िए ,बच्चो के लिए छोटी और प्रेरणादायक कहानियाँ –

story for kids in hindi with moral

 

हाथी के पैर की जंजीर – 

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एक गाँव मे एक महारथी हुआ करता था जिसके पास पास खूब सारी हथियाँ थी | वह उन हथियों को राजा महाराजा को बेचा करता था | एक बार श्याम नाम का बालक अपने दादा जी के साथ उस गाँव मे हाथी देखने गया | उसने जब हथियों को देखा तो बालक बहुत खुश हुआ | 

 

अचानक बालक की नजर जब हथियों की पैरो की तरफ गई तो बालक अपने दादा जी से पूछता की – दादा जी इन हथियों को ऐसे बंधा क्यो हुआ है ? 

तब दादा जी जवाब देते – बेटा ! हाथी काही दूर न चले जाए और किसी के खेतो का नुकसान न कर दे इस वजह से इन हथियों को बांध कर रखा जाता है |

 

फिर बालक पूछता है – दादा जी ! यह तो हाथी बहुत विशाल काय और ताकत वर दिखाई देते है तो फिर ये इस पतली से जंजीर से कैसे रुके हुए है यह तो इनको  आसानी से तोड़ कर कभी भी यहा से जा सकते है |

 

दादा जी बोलते है – हाँ बेटा ! यह जंजीर इनके लिए कुछ भी नहीं | यह चाहे तो एक झटके मे इस जंजीर को तोड़ कर यहाँ से जा सकते है |

लेकिन यह हाथी ऐसा  नहीं कर सकते | 

 

बेटा तुरंत बोलता है – क्यो दादा जी ? क्यो नहीं कर सकते ऐसा ?

दादा जी बोलते है – बेटा ! जब यह छोटे थे तब से ही इनके पैरो को इन जंजीरों से बांध दिया गया था | उस समय यह हाथी बहुत प्रयास करते थे जंजीर तोड़ कर यहाँ से भाग जाने की |

 

बहुत मन करता था इनका  की !  यह भी इंसानों  की तरह पूरी आजादी से यहाँ वहाँ कही भी घूम सके और अपनी मर्जी से खा पी  सके | 

 

लेकिन तब इनमे इतना बल नहीं था की यह जंजीर को तोड़ पाए| छोटे होने की वजह से  यह खूब कोशिशों के बावजूब भी  जंजीर को नहीं तोड़ पते थे |

जिसका सीधा असर  इनके दिमाग पर हुआ  जिससे इनके दिमाग मे यह बात बैठ गई की अब कोशिश करना  व्यर्थ है यह कभी नहीं टूटेगी | यह सिर्फ महारथी ही अपने हाथो से खोल सकता है और बांध सकता है | 

 

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इस तरह समय बीतता गया और यह अब बड़े हो चुके है | अब इनमे इतना बल है की यह चाहे तो एक ज़ोर से झटके से इस जंजीर को तोड़ सकते है | लेकिन वो बात अभी भी इन हाथियो के मन मे बैठी हुई है जिस वजह से यह कोशिश ही नहीं करते जंजीर को तोड़ने की |

 

शिक्षा – moral of story-

दोस्तो ठीक ऐसा ही अक्सर हमारी जिंदगी मे भी होता है  अक्सर इंसान एक या दो बार हारने के बाद या असफल होने के बाद अपने हौसले खो बैठता है और नकारात्मक बाते सोचने लगता है की अब यह नहीं होगा मुझसे |

 

बस ! यही पर इंसान गलती कर देता है जिसका नतीजा वो जिंदगी मे सफल नहीं हो पाता|

 

जो इंसान बार बार असफल होने बाद भी कोशिश करना नहीं छोड़ता और एक दिन अपने इसी अथक प्रयास से अपना मुकाम हासिल कर लेता है कामयाबी उसके कदम चूमती है |

तो आप भी अपनी जिंदगी मे कभी हार न माने  और कोसिस तब तक करते रहो जब तक सफल न हो जाओ |

दोस्तों हमारी  हमेशा से यही कोशिश रहती है की हम  इस blog पर आपके लिए ज्ञान और शिक्षा  से भरी ऐसी ही तमाम कहानियाँ लाते रहे जिससे आपका ज्ञान बढ़ सके , बौद्धिक विकास हो सके ,जीवन मे सही फैसले ले सके , आप जीवन मे आगे बढ़ सके , मन मे सकरत्म्क विचारो का जन्म हो और  आपके सुंदर चरित्र का निर्माण हो ताकि आप आगे चल केआर सुंदर परिवार और समाज का निर्माण कर सके |

हम चाहते है की यह कहानियाँ जादा से जादा लोगो तक पहुंचे ताकी वह भी इसका पूरा लाभ उठा सके इसलिए आप इन कहानियों को social media की मदद से अपने सभी दोस्तों मे अवश्य शेयर करे | आ[का ये छोटा सा प्रयास कई लोगो की जिंदगी भी बदल सकता है |

 

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