एक बार महत्मा बुद्ध एक गांव मे अपने शिस्यो सहित घने पेड़ की छाँव के नीचे बैठ थे.

आस पास के गांव के बहुत से लोग अपनी अपनी मानसिक परेशानिया लेकर महात्मा बुद्ध के पास आ रहे थे. महत्मा बुद्ध उन सब की मानसिक परेशानियों का समाधान देते.

सब लोग ख़ुशी ख़ुशी अपनी समस्याओ का समाधान पा कर वहाँ से लौट रहे थे.

वहीं से कुछ दूर बैठा एक दुःखी भिखारी खुद की किस्मत को कोसता हुआ बुद्ध के पास जाने वाले लोगो को देख कर ये सोचने लगा....

की अभी कुछ देर पहले तो ये लोग दुःखी मन से मुँह लटकाए,उन महत्मा के पास गए थे. और अब ! इतना खुश हो कर कैसे वापिस लौट रहे है. आखिर माजरा क्या है?

जरा मैं भी जाकर देखु की वो महात्मा ऐसा कौन सा खजाना बाट रहा है इन लोगो को ! जो इनके चेहरे ख़ुशी से लाल हो गए

ये देख कर भिखारी के मन मे भी तीव्र इच्छा हुई की क्यों ना मैं भी अपना दुःख इन महात्मा को बता दू.

मुझे भी अपने दुःख का समाधान अवश्य मिलेगा. समाधान पाने की लालसा लिए भिखारी, महात्मा बुद्ध के सामने पंहुचा और हाथ जोड़ कर, प्रणाम करते हुए बोला..

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