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Tenali raman ki kahani तेनाली रामा vs ब्राम्हण

Tenali raman ki kahani की चतुराई तेनाली रामा vs ब्राम्हण- दोस्तों स्वागत है आपका तेनालीरामा (tenali raman) की चतुराई और बुद्धिमानी से भरे किस्से कहानियों की इस रोचक सफर मे| Tenali raman ki kahani 

 

दोस्तों जीवन मे कहानियों का विशेस महत्तव होता है | क्योकि इन कहानियो के माध्यम से हमे बहुत कुछ सीखने को मिलता है |

इन कहानियों के माध्यम से आपको ज़रूरी ज्ञान हासिल होंगे जो आपको आपकी लाइफ मे बहुत काम आएंगे | यहाँ पर बताई गई हर कहानी से आपको एक नई सीख मिलेगी जो आपके जीवन मे बहुत काम आएगी |

हर कहानी मे कुछ न कुछ संदेश और सीख (moral )छुपी हुई है | तो ऐसी कहानियो को ज़रूर पढ़े और अपने दोस्तो और परिवारों मे भी ज़रूर शेयर करे | Tenali raman ki kahani 

 

तो चलिये शुरू करते है हमारी आज की Tenali raman ki kahani तेनाली रामा vs ब्राम्हण

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एक बार राजा कृषदेवराय की माँ बहुत बीमार पड़ गई. माँ की हालत इतनी खराब हो गई की किसी वैद्द की दवा उन पर काम नहीं कर रही थी. माँ समझ चुकी थी की मैं अब नहीं बचूंगी यह सोच माँ अपने बेटे कृष्ण देव राय को अपनी आख़री इच्छा बताते हुए कहती हैं की – बेटा ! मरने से पहले मैं 7 ब्राम्हणो मे आम के फल दान करना चाहती हूं.

इतना सुनते ही राजा कृष्ण देवराय बोलते हैं की – हाँ माँ ! जरूर क्यों नहीं,  मैं अभी आम के फलो का इंतजाम करवाता हूं.

इतना बोला ही था की इधर माँ अपना दम तोड़ चुकी होती हैं.

यह देख राजा कृष्ण देवराय को बहुत दुख होता हैं होता हैं,  ओर रोने लगते हैं.  रोते रोते यह बोलते हैं की – माँ ! कम से कम मुझे मौका तो दिया होता अपनी इच्छा को पूरा करने का.

 

अब राजा अपनी माँ की आखिरी इच्छा पूरी करने के लिए आम के फलो की खोज मे स्वयं ही निकाल पड़ते है |  अपने पूरे शाही बगीचे के हर आम के पेड़ को देख डाला लेकिन कही भी उन्हे आम के फल लगे हुए नहीं मिले क्योकि यह आम का मौसम नहीं था |

इसके बाद राजा फलो की दुकान पर गए और वहाँ भी पता किया लेकिन वहाँ भी उन्हे आम के फल नहीं मिले |

मायूस हो कर राजा अपने राजमहल लौट गए |  राजा अपनी माँ की लहाश के पास जा कर बैठ गए और बोलने लगे- माँ आज मैं समझ गया भगवान और प्रकृति से बड़ा कोई नहीं होता |

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मेरे पास सारी ताकते होने के बावजूद भी आम के फलो की व्यवस्था नहीं कर सका क्योकि की यह मौसमी फल है अभी इन फलो का मौसम नहीं आया इस वजह से मुझे काही भी आम का एक फल तक  नहीं मिला |

 

इसके बाद राजा अपनी माँ  के अंतिम संस्कार के  काम मे जुट गए तभी उन्होने अंतिम संस्कार का काम पूरा करवाने आए ब्राम्हणो से पूछा की – हे ब्राम्हणो आप ही बताओ मैं अपनी माँ की अंतिम इच्छा इस समय कैसे पूरी कर सकता हूँ |ताकि उनकी आत्मा को मोक्ष मिल कर स्वर्ग मे जगह मिल जाए |

 

राजा की यह बात सुन ब्राम्हण बोलते है – चिंता न करे राजन ! आप संस्कार के 12वें दिन  हम सभी ब्राम्हणो को सोने के आम  दान कर के अपनी माँ की इस अंतिम इच्छा को पूरा किया जा सकता है |

 

ब्राम्हणो की यह बात सुन राजा ने अपने कारीगरों को सोने के आम बनवाने का हुक्म दे दिया | वही पर मौजूद राजा का खास मंत्री तेनाली रामा (tenali raman) यह सब बाते सुन रहा था |

 

तेनाली रामा (tenali raman) तुरंत समझ गया था की यह ब्राम्हण लोग महाराज की भावनाओं का फायदा उठा रहे है , मुझे कुछ करना होगा |

इधर 7 ब्राम्हण  अंतिम संस्कार के कार्यकरम मे जुट जाते है |

 

Tenali raman ki kahani

अब जैसे ही बारहवाँ दिन आता है , राजा सातों ब्राम्हणो को एक एक सोने के आम दान कर देते है | इधर तेनाली रामा यह सारी घटना देख रहे थे |

क्योकि तेनाली रामा (tenali raman) बहुत ही समझदार इंसान थे वह समझ चुके थे की महाराज इस समय अपनी माँ की इच्छा को पूरा करने के लिए कुछ भी करेंगे |इस समय महाराज अपनी भावनाओ मे इतना बह चुके हैं की उनको ब्राम्हणो की

हर बात सही लगेगेगी , तो ऐसे मे मेरा बीच मे बोलना सही नहीं रहेगा |

 

लेकिन तेनाली रामा (tenali raman) मन ही मन यह निश्चय कर लेते हैं की इन ब्राम्हणो को मैं सबक सिखा कर रहूँगा |

 

इधर जैसे ही सब ब्राम्हण राजमहल के बाहर पहुँचते है , तेनाली रामा भी ब्राम्हणो  पास पहुँच जाता है  |

तेनाली रामा (tenali raman)  ब्राम्हणो  को बोलता है – हे ब्राम्हणो किरपा मुझ पर भी अपना एक उपकार कर दो | मैं अपने घर आपको यज्ञ करवाने का निमंत्रण दे रहा हूँ किरपा कल आप घर पहुँच कर अपनी सेवा का मौका दें |

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तेनाली रामा (tenali raman) की यह बात सुन सभी ब्राम्हण तेनालीरामा का यह आमंत्रण स्वीकार कर लेते है | तेनालीरामा (tenali raman)  के वहाँ से जाते ही सभी ब्राम्हण मन ही मन बहुत प्रसन्न होते है |

 

सभी ब्राम्हण एक दूसरे से बोलते है है – यह तेनाली रामा तो महाराज का खास मंत्री है  | तो हम यह उम्मीद कर सकते है की यह तेनाली रामा (tenali raman) कल हमे खूब सारे  उपहार देगा और स्वादिस्ट भोजन करवाएगा | इसके पास बहुत सारा धन होगा |

 

अगले दिन सभी ब्राम्हण तेनाली रामा के घर पहुँच जाते है | तेनाली रामा (tenali raman) सभी ब्राम्हणो का आदर सत्कार करता है | सभी ब्राम्हण  हवन करना शुरू कर देते है | पूरा घर मंत्रो के जाप से गूंज उठता है |

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हवन समाप्त होते ही सभी ब्राम्हण  अपने उपहारों का बेसबरी से इंतजार करने लगे |

तभी तेनाली रामा (tenali raman) अपने नौकर को आवाज लगता है और बोलता है  – रामसिंग ! मैंने जो अंदर आग की भट्टी  सैट लोहे की सलाखे रखी थी वो अब तक पूरी तरह गरम हो कर धधक उठी होंगे , उन सलाखों को ले कर आना ज़रा |

 

तेनाली रामा (tenali raman) की इन बातों को सुन सभी ब्राम्हणो  ब्राम्हणो के मुंह पर डर और  माथे पर चिंता  की लकीरे दिखने लगती है | तभी एक ब्राम्हण डरते हुए पूछता है – अरे तेनाली रामा (tenali raman) ! यह तुम गरम गरम सलाखे क्यों मँगवा रहे हो ?

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तेनाली रामा (tenali raman)  बोलता है – वो दरअसल मेरी माँ की “टाँगो की जोड़” मे बहुत दर्द रहता था वो हमेशा कहती थी की इन पर गरम सलाखे रख दें लेकिन मैं उस समय ऐसा नहीं कर पाया तो मरने से पहले उनकी यह आखरी इच्छा थी की यह गरम सलाखे ब्राम्हणो को दान कर देना |

 

क्योकि कल आपने ही राजा को यह  कहा था न की सोने के आम का दान करके माँ की आखरी इच्छा पूरी कर देना इससे माँ की आत्मा को शांति मिलेगी | तो अब आपको मेरी माँ की ही यह आखरी इच्छा पूरी करनी ही  होगी |

 

Tenali raman ki kahani

 

यह सुन सभी ब्राम्हण घबरा गए और तेनाली रामा से माफी मांगने लगे| सभी ब्राम्हण एक साथ बोलते है- हमे माफ कर दो तेनाली रामा (tenali raman) ! आज के बाद हम ऐसा काम कभी नहीं करेंगे कभी भी लोगो को नहीं ठगेंगे न ही उनकी भावनाओ का फायदा उठाएंगे|

 

इतना बोल सभी ब्राम्हण सोने का आम लाकर तेनाली रामा के  चरणो मे रख देते है | 

तेनाली रामा (tenali raman) मन ही मन बहुत खुश होते है |

 

इधर सभी ब्राम्हण वहाँ से चले जाते है | रास्ते मे सभी ब्राम्हणो  को  राजा द्वारा मिला हुआ सोने का फल खो जाने के गम मे तेनाली रामा (tenali raman) पर बहुत गुस्सा आरहा था | सभी  ब्राम्हण तेनाली रामा (tenali raman) से इस बात का बदला लेने के लिए राजा के पास पहुँच जाते है  |

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राजा के पास पहुँच कर सभी ब्राम्हण बोलते है – महाराज !  हमने तेनाली के बहकावे मे आकार आपके द्वारा दिया हुआ सोने का फल उन्हे  वापिस कर  दिया , जो की आपकी माता जी की अंतिम इच्छा थी |

 

यह सुन राजा हूससे से आग बबूला हो गए और तेनाली रामा (tenali raman) को राजदरबर मे हाजिर होने का हुक्म देते है |

तेनाली जैसे ही राजा के सामने आता है राजा गुस्से मे बोलते है – तेनाली (tenali raman) तुम्हारी हिम्मत कैसे हुए ब्राम्हणो से वो सोने के फल लेने की | क्या तुम्हें पता नहीं वो फल मेरी माँ की अंतिम इच्छा थी |इसलिए वो फल मैंने इन्हे दान दिया था |

 

यह सुन तेनाली रामा (tenali raman) महाराज को सारी कहानी सुनाने के बाद  बोलते है – महाराज ! मैंने जो किया वो इन ब्राम्हणो को सबक सिखाने के लिए किया था |वो सोने का आम लेने का मेरा कोई इरादा नहीं था | क्योकि महाराज ! मैं जनता हूँ की आप अपनी माँ को बहुत प्यार करते थे |

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जिसके चलते उनकी आखरी इच्छा पूरी न कर पाने के पश्चाताप मे आप इन ब्राम्हणो की बातों मे आकर आपने इन्हे वो सोने के फल दान कर दिये | 

यह ब्राम्हण  जानते थे की , अभी आम का मौसम नहीं आया है और आपको आम कहीं नहीं मिलेगा तो एसे मे इन ब्राम्हणो ने आपकी कमजोरी और भावनाओं का फायदा उठाते हुए लालच आय आकर आपसे 12वें दिन सोने का आम दान करने को बोला |

इतना बोल तेनाली रामा (tenali raman)  वो सातों सोने फल राजा के चरणो मे रख देते है | 

तेनाली रामा (tenali raman) की यह बात सुन राजा को तेनाली रामा (tenali raman) की बातों पर विश्वास हो जाता है फिर गुस्से मे आकर उन ब्राम्हणो को  कारागार मे डाल देते हैं |

 

इस प्रकार तेनाली को सबक सिखाने के चक्कर मे  ब्राम्हण खुद ही फस जाते है |

 

इस कहानी से हमे सीख मिलती है की सच्चाई की हमेशा जीत होती है और झूठे तथा बाईमान लोगो को उनके किए का दंड एक दिन जरूर भोगना पड़ता है |

 

तो दोस्तों कैसी लगी आपको तेनाली रामा (tenali raman) की यह बुद्धिमानी – तेनाली रामा की चतुराई से भरे ऐसी ही और कहानियों को पढ़ने के लिए नीचे click करे –

 

हम अपने इस ब्लॉग पर आप लोगो के लिए एसी ही तमाम ज्ञान से भरे किस्से कहनियों का रोचक सफर लाते रहते है जिनहे पढ़ कर न सिर मनोरंजन होता है बल्कि बहुत सी जरूरी बाते भी सीखने को मिलती है | तो इन कहानियों को जरूर शेयर कर दिया करो ताकि बाकी लोग भी कहानियो को पढ़ कर आनंद और ज्ञान हासिल कर सके |

 

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