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short motivational stories hindi प्रेरणादायक कहानियाँ

short motivational stories hindi प्रेरणादायक कहानियाँ

Motivational stories hindi – success stories – moral stories ज्ञान से भरी शिक्षाप्रद नैतिक कहानियों और प्रेरणादायक कहानियों का अद्भुत भंडार.

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका short motivational stories hindi मे. आज हम आपके लिये 50 ऐसी short motivational stories लेकर आए है जिन्हे पढ़ कर आपके हौसले मजबूत होंगे और आप जीवन मे मुश्किलों का सामना करने से डरोगे नहीं.

वक़्त की कमी की वजह से short motivational stories को बहुत कम समय मे पढ़ा जा सकता है.कोई भी एक short motivational stories आपके अंदर छुपे आपकी जिंदगी बदल सकती है 

 

प्रेरणादायक कहानी बांस का पेड़ – short motivational stories hindi 

एक संत अपने शिष्य के साथ जंगल के रास्ते से अपने मठ की ओर जा रहे थे। ढलान पर से गुजरते वक्त अचानक शिष्य का पैर फिसला और वह तेजी से नीचे की ओर लुढ़कने लगा। 

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वह खाई में गिरने ही वाला था कि तभी उसके हाथ में बांस का एक पौधा आ गया। उसने बांस के पौधे को मजबूती से पकड़ लिया और वह खाई में गिरने से बच गया।

बांस धनुष की तरह तो मुड़ गया लेकिन न तो वह जमीन से उखड़ा और न ही टूटा.

 

 शिष्य, डरा हुआ सहमा हुआ बांस को मजबूती से पकड़कर लटका रहा। तभी गुरु जी शिष्य कक हौसला देते हुए हैसे तैसे करके शिष्य तक पहुंचे और अपना हाथ शिष्य की ओर बढाया.

 

गुरु जी ने शिष्य को अपनी ओर ऊपर खींच लिया, दोनों अपने रास्ते पर आगे बढ़ चले.

 

राह में संत ने शिष्य से कहा- *”जान बचाने वाले बांस ने तुमसे कुछ कहा, तुमने सुना क्या?”

 

शिष्य ने कहा- *”नहीं गुरुजी, शायद प्राण संकट में थे इसलिए मैंने ध्यान नहीं दिया और मुझे तो पेड-पौधों की भाषा भी नहीं आती. आप ही बता दीजिए उसका संदेश।”

 

गुरु मुस्कुराए और कहा की – “खाई में गिरते समय तुमने जिस बांस को पकड़ लिया था, वह पूरी तरह तो मुड़ गया था। वह जमीन से उखड़ा नहीं फिर भी उसने तुम्हें सहारा दिया और तुम्हारी जान बची ली। फिर ज़ब तुमने उस बांस के तने को छोड़ा तो वह पुनः अपनी पुरानी स्थिति मे लौट गया.

 

बांस लचककर अपनी जगह पर वापस लौट गया।

 

“हमें बांस की इसी लचीलेपन की खूबी को अपनाना चाहिए। तेज हवाएं बांसों के झुरमुट को झकझोर कर पूरी तरह से उखाड़ने की कोशिश तो करती हैं लेकिन वह आगे-पीछे डोलता तो है पर मजबूती से धरती में जमा रहता है।”

 

“बांस ने तुम्हारे लिए यही संदेश भेजा है कि जीवन में जब भी मुश्किल दौर आए तो थोड़ा झुककर विनम्र बन जाना लेकिन टूटना नहीं क्योंकि बुरा दौर निकलते ही स्थिति पुन: पहले जैसी होने लगती है या पहले से भी बेहतर.

 

शिष्य बड़े गौर से सुनता रहा।

गुरु जी अपनी शिक्षा देते हुए कहते है – “बांस न केवल हर तनाव को झेल जाता है बल्कि यह उस तनाव को अपनी शक्ति बना लेता है और दुगनी गति से ऊपर उठता है। बांस ने कहा कि तुम अपने जीवन में इसी तरह लचीले बने रहना।”

गुरू ने शिष्य को कहा-“पुत्र पेड़-पौधों की भाषा मुझे भी नहीं आती। बेजुबान प्राणी-वृक्ष हमें अपने आचरण से बहुत कुछ सिखाते हैं।”

तो दोस्तों उम्मीद करता हूं इस प्रेरणादायक कहानी से आपको बहुत प्रेरणा मिली होगी.

चलिए बढ़ते है अगली short motivational stories hindi की तरफ.

 

Short motivational story – बहादुर दोस्त 

एक गांव मे अमन और मनोज नाम के दो बच्चे थे जो आपस मे बहुत अच्छे मित्र थे, बिलकुल शोले फ़िल्म के जै वीरू की तरह.दोनों ज़ादातर समय एक दूसरे के साथ रहते, एक साथ स्कूल जाते पढ़ाई करते खाना खाते.

 

अमन 10 साल का था और मनोज 7 साल का.

एक बार दोनों दोस्त दूर से आरही कटी पतंग को पकड़ने के लिये गांव से काफ़ी दूर तक आगए.

 

अमन की नजर आसमान की तरफ कटी हुई पतंग पर थी और दोनों उस पतंग के पीछे दौड़े जा रहे थे.

 

अचानक अमन भागता भागता एक कुएँ मे गिर जाता है. यह देख मनोज तुरंत कुएँ के पास पहुँचता है और आस पास देखने लगता है.

 

लेकिन दोनों गांव से इतनी दूर निकल आए थे की दूर दूर तक कोई मनुष्य दिखाई नहीं दे रहा घर. मनोज ने खूब जोर से आवाज भी लगाई कोई मेरे दोस्त को बचाओ.

 

मनोज को दोस्त को कुएँ के पानी मे चटपटाता देख कुछ समझ नहीं आरहा था की क्या करें उसने तुरंत सामने रखी बाल्टी रस्सी के सहारे कुएँ मे फेंक दी और अपने दोस्त को बोला की इसे पकड़ लो.

 

अमन बहुत डरा हुआ था उसने कस कर बाल्टी को पकड़ लिया. अब मनोज ने अपनी पूरी जान लगा कर बाल्टी को खींचना शुरू किया.

 

बाल्टी मे बैठे अपने से भी बड़े शरीर वाले अमन को मनोज तब तक खींचता रहा ज़ब तक मन कुएँ से बाहर ना आगया.

खींचते खींचते मनोज के हाथों मे बुरी तरह से रगड़ रस्सी की रगड़ लग गई छाले पड़ चुके थे.

 

कहानी से सीख –

इस कहानी से ये बात निकल कर आती है की सवाल ये नहीं की वो 7 साल का बच्चा आखिर ये कैसे कर पाया.

 

बल्कि सवाल ये है की वो बच्चा ये क्यों कर पाया. क्योंकि उस बच्चे को दूर दूर तक वहाँ कोई भी ये बोलने वाला नहीं था की – “तू ये नहीं कर सकता”

 

जी हाँ दोस्तों, आपका मन जो चाहे वो आपसे करवा सकता है, इसलिए रोज अपने अवचेतन मन को ये कहो की आप कर सकते हो इससे आपका आत्मविश्वास बढ़े गा.

 

उम्मीद करता हूं इस कहानी से आपको बहुत सीख मिली होगी.

 

चलिए बढ़ते है अगली short motivational story मे.

सर्दी का कंबल – short story with moral

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ये कहानी है एक भिखारी की जो स्विज़ारलैंड मे रहता था यह एक ऐसा देश है जहाँ सारा साल कड़ाके की ठण्ड पड़ती है.

किसी को भी उस भिखारी पर दया नहीं आती की कोई उसे कम्बल दे. उसने अपने मन को मजबूत बना लिया था और यह मान लिया था की अब मुझे ऐसे ही जीना है. वो भिखारी एक ही गर्म कमीज़ पहने जो कई जगह से फ़टी हुई थी, भीख मांगता.

भिखारी ये उम्मीद पूरी तरह से छोड़ चुका था की उसे कोई गर्म कंबल देगा, मुझे ऐसे ही जीना है, जिस वजह से उसने अपने शरीर को सर्दी को झेलने लायक बना लिया था.

वो मन से पूरी तरह यही मानता की ये तो बहुत कम सर्दी है ये तो कुछ भी नहीं, यही सोच मानसिकता, उसके शरीर को सर्दी का कोई खास एहसास नहीं हो पाता.

 

कुछ दिन बाद एक दयालु व्यक्ति उस जगह से गुजर रहा था की अचानक उस व्यक्ति की नजर उसी भिखारी पर पड़ती है जो धीरे धीरे आगे चला जा रहा था.

व्यक्ति उस भिखारी के पास जाता है, भिखारी की हालत को देख व्यक्ति को बहुत दया आती है उस पर.

 

वो भिखारी को बोलता है, आप इतनी ठण्ड मे बिना जैकेट कंबल के ज़िंदा कैसे हो, तुम यही रुको मै अभी तुम्हारे लिये यही पास की दुकान से एक गर्म कंबल लेकर आता हूं. इतना बोल वह व्यक्ति भागते हुए दूर दुकान मे कंबल लेने जाता है.

उस व्यक्ति को एक भूलने की बीमारी थी वो व्यक्ति कुछ देर के लिये घटनाओ को भूल जाता था.

तो वह जैसे ही दुकान मे गया वह दुकानदार से बातें करने लगा. वो व्यक्ति बातें करने मे इतना व्यस्त हो गया की वो भूल ही गया था की वो दुकान मे क्यों आया था,

 

उधर भिखारी मन हि मन बहुत खुश हो रहा होता है. और पूरी उस व्यक्ति द्वारा कंबल लाने की एक उम्मीद लगा बैठता है. अब भिखारी को बहुत जोरो से ठण्ड लगने लगती है, बहुत देर बाद भी ज़ब वो व्यक्ति कंबल लेकर नहीं पहुंचा तो भिखारी का शरीर ठण्ड नहीं झेल पाया और वो वहीं मर गया.

इधर ज़ब घंटो बाद वो व्यक्ति दुकान से बाहर आया तो उसने देखा की वो भिखारी जमीन पर गिरा पड़ा है, भिखारी के आस पास लोगो की भीड़ जमा है. तब व्यक्ति को याद आता है की मै तो कंबल लेने आया था.

व्यक्ति को बहुत अफ़सोस होता है.

 

कहानी से सीख.

इस कहानी से सीख मिलती है की हमें अपनी life खुद के दम पर ही जीते रहना चाहिये, ताकी कठिन से कठिन परिस्थितियों मे भी हमारे इरादे हौसले टूटे नहीं.

उम्मीदें इंसान को अंदर से खोखला कर देती है मन कमजोर बना देती है.इसलिए किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहिये.

उम्मीद करता हूं इस short motivational story से बहुत सीख मिली होगी. चलिए बढ़ते है अगली short motivational story hindi की तरफ.

Short Moral stories hindi – आंगन का पेड़ 

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एक बिट्टू नाम का लड़का शहर मे रहता था वह बहुत ही जिज्ञासु मन का था.बिट्टू की उम्र 15  साल की थी.

बिट्टू के मन मे एक सवाल था जिसका जवाब उसे नहीं मिल रहा था.

 

बिट्टू गर्मी की छुट्टियों मे हमेशा माता पिता के साथ आपने दादा जी के घर गांव जाता. वो अपना ज़ादातर समय अपने दादा जी के साथ बीतता. दादा जी से बिट्टू बहुत सी नई बातें नई जानकारी हासिल करता. वह दादा जी से खूब सवाल करता था.

 

बिट्टू ने दादा जी से पूछा! – दादा जी, जीवन मे कामयाबी कैसे मिलती है सफल होने का राज़ क्या है?

 

तब दादा जी बिट्टू को बोलते है – अरे जल्दी भी क्या है, बता दूंगा लेकिन उससे पहले मेरा एक सवाल है,

 

दादा जी इतना बोल बिट्टू को घर के आंगन मे लेजाते गई.

 

उस घर के आँगन मे एक आम का पेड़ था जो अभी बहुत छोटा था, और घर के बाहर भी वैसा ही एक और आम का छोटा सा पेड़ था.

 

दादा जी बिट्टू से बोले.- बिट्टू! ये दोनों आम के पेड़ की गुठली एक साथ बोई गई थी.

 

तो अब बताओ इन दोनों मे से कौन सा पेड़ ज़ादा बड़ा विशालकाय होगा.?

बिट्टू कुछ देर सोचने पर बोला – अरे दादा जी जाहिर सी बात है, घर के आँगन मे लगा आम का पेड़ ही ज़ादा विशालकाय होगा, क्योंकि जो आम का पेड़ घर के आंगन मे है तो उसकी बराबर सेवा होगी.

 

तब दादा जी बोले ठीक है, ज़ब तुम अगले वर्ष यहां आओगे तब मै तुम्हारे उस सवाल का जवाब दूंगा.

 

अगले वर्ष ज़ब बिट्टू वापिस गांव आया तो दादा जी उसे घर के आँगन मे ले गए. जहाँ वो आम का पेड़ काफ़ी बड़ा हो चुका था. बिट्टू ये देख कर बहुत खुश हुआ वो तुरंत बोला –

 

देखा दादा जी! मैंने कहा था ना, आँगन वाला पेड़ विशाल हो जाएगा. तब इस पर दादा जी बोले – अरे सब्र रखो, चलो पहले बाहर वाले पेड़ को भी देख लेते है.

 

ज़ब बिट्टू ने घर से दूर लगे आम के पेड़ को देखा तो उसे विश्वास नहीं हुआ.

बाहर लगा हुआ आम का पेड़, घर के आँगन मे लगे आम के पेड़ के मुकाबले काफ़ी अधिक विशाल काय था. उसकी छाँव मे बहुत से लोग खड़े थे. बच्चे झूल डाल कर मजे कर रहे थे.

 

इस पर बिट्टू ने सर खुजलाते हुए बोला, दादा जी! ये चमत्कार कैसे हुआ.

 

तब दादा जी बोले, बेटा! ये चमत्कार नहीं प्रकृति का नियम और जीवन की सच्चाई भी . यानी जो जितना ज़ादा मुसीबतो का जोखिम का सामना करेगा वही ज़ादा मजबूत होगा.

 

दोनों पेड़ को एक साथ लगाया गया था. केकिन इस एक वर्ष मे मौसम कई बार बदला, तेज़ धूप हुई, तेज़ आंधी आई, तेज़ बरसात हुई और बहुत ठण्ड हुई.

 

ऐसे मे जो आँगन मे लगा आम का पेड़ था वो इन तमाम मुसीबतो से बचा रहा,सिर्फ यही नहीं एक सिमित दायरे मे रहने की वजह से आंगन मे लगा आम का पेड़ अपनी जड़े अधिक नहीं फैला पाया.

 

लेकिन घर से बाहर खुले एरिया मे लगा आम का पेड़ मौसम की हर मार झेलता रहा. जिस वजह से उसकी जड़े हिलती रही और उनको मौका मिला फैलने का.

 

इन्ही तमाम कठिनाइयों से गुजरने के बाद बाहर लगा आम का पेड़ ज़ादा विशालकाय हो गया.

 

बिट्टू! यही आपके सवाल का जवाब भी है., यानी सफलता का भी यही सूत्र है. जीवन मे आने वाली मुश्किलों से घबरा कर पीछे मत हटो बल्कि उनका सामना करो.

 

जितना ज़ादा जीवन मे मुश्किलों का सामना करेंगे हर बार कुछ नया सीखने को मिलेगा, मन और शरीर दोनों मजबूत भी होगा.

 

मुश्किलों के आगे ही सफलता आपको गले लगाने के लिये ख़डी होती है.

 

कहानी से सीख :-

इस कहानी से हमें सीख मिलती है की जीवन मे हम जितना मुश्किलों का सामना करेंगे उतना ही सफलता के नज़दीक पहुँचते जाएंगे.

 

उम्मीद करता हु यह short motivational stories आपको पसंद आई होगी.

चलिए बढ़ते है एक और short motivational story की तरफ.

 

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