मन जितना कम भटकेगा सुख उतना ही अधिक मिलेगा. और सुख उतना ही कम मिलेगा मन जितना अधिक भटकेगा |

आपकी इच्छाओं की लगाम तय करेंगी आपकी इच्छाओं की सीमा.

इंसान अपनी असीमित इच्छाओं की वजह से जीवन भर मानसिक सुख शांति से वंचित रह जाता है.

मन लोभ ,मोह ,वासना ,क्रोध और ईर्षा जैसे पांच इद्रियों का,  ऐसा चंचल घोड़ा है जो ना जाने कैसे कैसे विचारों की तरफ भागता रहता है, यदि मन को काबू मे ना रखा जाए तो जीवन मे सुख शांति का नाश होना निश्चित है.

किसी का अमीर होना और गरीब होना सब नसीब की बात है और नसीब का अच्छा होना या बुरा होना यह सब कर्म पर निर्भर करता है |

भोग विलास की  वस्तुओं को जीवन मे जरूरतों के अनुसार रखो इछाओ के अनुसार नहीं क्योंकि लोभी मन की इच्छाए कभी खत्म नहीं होती.

किसी से इतना लगाव भी मत रखो की एक दिन उसके जाने के गम मे आप खुद को ही भूल जाओ.

अपनी जिंदगी से कभी नाराज़ मत होना , हो सकता है आप जैसी जिंदगी भी किसी का सपना हो.....

बुराई बड़ी मीठी होती है उसकी चाहत कभी कम नहीं होती. सच्चाई बड़ी कड़वी है सबको हज़म नहीं होती.

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