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akbar birbal kahaniyan | विश्वास और मनोकामना का राज़

akbar birbal kahaniyan (अकबर बीरबल की कहानियाँ) – दोस्तों स्वागत है आपका अकबर बीरबल (akbar birbal) के किस्से कहानियों की  इस रोचक दुनिया मे |

यहाँ पर आपको motivational stories के साथ moral stories से मिलने वाले ज्ञान से रुबारू करवाया जाता है |यहाँ हम आपके लिए ऐसी motivational stories लेकर आते है ,जिसे पढ़ने से आपके जीवन मे न सिर्फ एक सकारात्मक बदलाव आता है बल्कि आप अपनी ज़िंदगी मे वो सब कुछ हासिल कर पाते हो जिनकी आपने कल्पना की थी  –

 

यहाँ हम आपके लिए moral stories भी लेकर आते है हर कहानी मे एक सीख जरूर छुपी होती है  जिनसे आपको  बहुत कुछ सीखने को मिलता  है जो आपकी ज़िंदगी मे बहुत काम  आती है |

 

 

 

दोस्तो बीरबल एक बहुत ही बुद्धिमान  इंसान था | बादशाह अकबर के राज दरबार मे बीरबल से बुद्धिमान और कोई नहीं था बीरबल – अकबर  (akbar birbal) के 9 रत्नो मे से एक था | बादशाह अकबर  बीरबल की बिद्धिमानी का लोहा मानते थे |बीरबल (birbal) की बुद्धिमानी के किस्से दुनिया भर मे लोकप्रिय है  | आज दुनिया भर मे बीरबल की कहानियों को लोग बड़े उत्तसह से पढ़ते है और टीवी पर भी देखते है जिससे हमे बहुत कुछ सीखने को मिलता है |

 

 

 

 

तो चलिये शुरू करते है आज की कहानी 

लोगो का विश्वास और मनोकामना का राज़

akbar birbal  रोचक kahaniyan

 

एक समय की बात है बादशाह अकबर (akbar) के दरबार मे  साधू संतों और पीरो फकीरों की सेवा को लेकर बात हो रही थी |

 

कहा जा रहा था की हमे साधू संतों और पीरो फकीरों की सेवा करनी चाहिए  क्योकि यह लोग ईश्वर अल्लाह के बड़े प्रिय होते है | ऐसे नेक और पाक लोगो की सेवा करने से हमारी दुआएं ईश्वर तक पहुँचती है जिससे लोगो की मनोकामनाए पूरी होती है |

 

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इतने मे बादशाह अकबर (akbar) भी बोले – हाँ  सही बात है | हमे पीर पैगंबरों की सेवा करनी चाहिए क्योकि उनके जरिये ही भगवान हमारी मुराद पूरी करते है |

 

हम हमेशा  उनकी सेवा करते है उनको खाना खिलाते है  हमेशा कपड़े अनाज और धन दान करते है | अक्सर मंदिरो और दरगाहों पर जाते है और उनके रख रखाव  के लिए धन भी दान देते है आखिर पीर-फकीर और साधू संत हमारी मुराद भगवान तक पहुंचाते है  |

 

इधर दूसरी तरफ सभा मे  उपस्थित दरबारियों के बीच बैठे बुद्धिमान बीरबल (birbal) जी इन सब बातोंको सुनते हुए कुछ शंका मे डूबे हुए थे | शायद बीरबल जी उन सब की इन बातों से सहमत न हो |

 

बादशाह अकबर (akbar) की नज़र जैसे ही बीरबल पर गई तो  बोलने लगे की ! क्या बात है बीरबल (birbal) तुम कुछ नहीं बोल रहे क्या आप हमारी इन बातों से सहमत नहीं हो ? 

 

akbar birbal ki kahaniyan | विश्वास और मनोकामना का राज़

 

बीरबल (birbal) बोलते है –  क्षमा करना जहांपना लेकिन मैं आप लोगो की इन बातों से सहमत नहीं हूँ , मेरा मानना है की मंदिर मस्जिद जैसी पाक जगहों पर “इंसान की मुरादे” इंसान के “विश्वास”  “आस्था”  तथा उनके “सकारात्मक विचारो”  की  वजह से पूरी होती है न की किसी पीर फकीर या साधू संत की सेवा की वजह से |

 

हाँ यह अच्छी बात है की हमे उनकी सेवा करनी चाहिए इससे उनका आशीर्वाद मिलता है जो इंसान की जिंदगी मे दुख तकलीफ़ों को खत्म करती है |

 

 

बीरबल (birbal) की इतनी बात सुनते ही बादशाह अकबर  सहित सभी दरबारी   बीरबल की तारफ बड़े अचरज से देखने लगते है |

 

बादशाह अकबर (akbar) बोलते है – बीरबल (birbal) यह आप कैसी बाते कर रहे हो , सारी दुनिया साधू संतो और पीर पेगंबरों को मानती है , रोज मंदिर मस्जिद जाते है और सजदा करते है तथा दुयाए मांगते है  लाखो लोगो की मुरादे यही पूरी होती है | यह चमत्कार नहीं तो और क्या है और तुम कहते हो यह सब इंसान के विश्वास की वजह से मुनकिन होता है |

 

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बादशाह अकबर (akbar)की इतनी बात पूरी होते ही दूसरा दरबारी भी बादशाह अकबर (akbar) की हाँ मे हाँ

 

मिलाते हुए बोलने लगा की – हाँ जहापना आप एकदम सही बात बोल रहे है और विश्वास पीर पेगंबरों के आशीर्वाद से बड़ा नहीं हो सकता | जहांपना ! बीरबल (birbal) यह साबित करना  चाहते है की विश्वास पीर पेगंबरों के आशीर्वाद से बड़ा है |

 

akbar birbal ki kahaniyan | विश्वास और मनोकामना का राज़

 

यह सुन बीरबल (birbal) फिर से अपनी बात दोहराते हुए बोलते है जहांपना ! मंदिर मस्जिद जैसी पाक और पवित्र जगहो पर लोगो का उनका अटूट विशाव और श्रद्धा ही उनकी मनोकमनाओ को पूरा करती है  न की यह  पीर और साधू  का कोई चमत्कार होता है |

 

बीरबल (birbal) की इतनी बात सुन बादशाह अकबर (akbar)अब गुस्से से गरजते हुए बोलते है- 

बस बहुत हुआ बीरबल (birbal) यदि तुम सच्च बोल रहे हो तो अपनी इस बात को  साबित कर के दिखाओ , ऐसी बेतुकी बाते मत करो |

 

यदि साबित नहीं कर पाए तो आपको यहाँ सरेआम पूरी सभा मे सभी लोगो के सामने  अपनी इन बेतुकी बातों के लिए माफी मांगनी पड़ेगी |

 

बीरबल (birbal) बोलते है – ठीक है जहापना जैसा आप कहे , मुझे मेरी बात को साबित करने के लिए दो महीने का समय चाहिए |

बादशाह अकबर  “बीरबल” को अपनी बात साबित करने के लिए 2 महीने का समय दे देते है | बीरबल जहांपना का शुक्रिया करते हुए वहाँ से चले जाते है |

 

घर आकार बीरबल (birbal) अब यह सोचने लगते है की कैसे यह बात साबित की जाए की  विश्वास की वजह से ही लोगो की इच्छाए पूरी होती है | भगवान के प्रति लोगो की आस्था की  सकारात्मक शक्ति  ही उनके मुरादों को पूरा करने मे मदद करती है | 

 

इतने मे बीरबल (birbal) के दिमाग मे  एक युक्ति आती है | बीरबल (birbal) अपने नौकर मालिक राम  को बुलाता है और कहता है-  मालिक राम ! मुझे कुछ कारीगर चाहिए जो मुझे एक महीने मे एक सुंदर सा मंदिर तैयार कर के दें |

 

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मालिकराम बोलता है – मालिक मिल तो जाएंगे लेकिन कुछ समय लगेगा | बीरबल (birbal) बोलते है – ठीक है लेकिन जीतने जल्दी हो सके उन सब कारीगर को मेरे सामने हाजिर करो |

 

 

तीसरे दिन मालिकराम सभी कारीगरों को बीरबल (birbal) के सामने ले आता है | बीरबल (birbal) सभी कारीगरों

को समझा देता है की मुझे मध्यम आकार का एक ऐसा मंदिर तैयार कर के दो जो दिखने मे बहुत खूबसूरत हो जिसे देखते ही लोग उसकी तरफ खीचे चले आए और ध्यान रहे की यह मंदिर एक महीने मे तैयार करना है | धन आपको दोगुना दिया जाएगा |

 

akbar birbal ki kahaniyan | विश्वास और मनोकामना का राज़

 

बीरबल (birbal) कारीगरों को अपनी वो जमीन दिखा देता है जहां मंदिर बनाना है | कारीगर अपना काम  शुरू कर देते है|देखते ही देखते   मंदिर बन कर तैयार हो जाता है |

 

बीरबल (birbal) पूरे मंदिर का नरीक्षण करते है | मंदिर वाकई बहुत सुंदर होता है | बीरबल (birbal)कारीगरों की मेहनत और कार्य कुशलता को देख कर बहुत खुश होते है और कारीगरों खूब धन देते है | 

 

 

कारीगर बीरबल (birbal) का ध्न्यवाद कर वहाँ से चले जाते है | बीरबल (birbal) मंदिर का दरवाजा बंद ही रखते है और उसमे कोई भगवान की मूर्ति भी नहीं रखते | वहाँ एक पुजारी को भी कुछ दिनो के लिए रख लेते है और पुजारी को सारी बात समझा देते है |

 

अब बीरबल (birbal) अपने नौकर मालिकराम को बुलाता है और कहता है – मालिक राम तुम इस मंदिर के बारे किसी भी तरह यह अफवाह फैला दो की यह मंदिर बहुत ही चमत्कारी है | यहाँ सभी की मुरादे पूरी होती है | मालिक राम शहर के दो चुगलखोरों को यह बात बता देता |

 

देखते ही देखते यह बात आग की तरह पूरे शहर मे फैल जाती है  और दूसरे ही दिन मंदिर मे लोगो का ताता लगना शुरू हो जाता है | लोग बोलते है आखिर इस मंदिर का दरवाजा बंद क्यों है |तो मंदिर का पुजारी बोलता है यह दरवाजा बंद ही रहता है इस मंदिर का नाम ही “बंद दरवाजा मंदिर है “ 

 

उधर बादशाह अकबर (akbar) तक जब यह बात पहुँचती है तो वह भी उस बंद दरवाजे मंदिर  के दर्शन करने के लिए पहुँच जाते है | बीरबल भी वही उपस्थित होते है |

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उस समय बादशाह अकबर (akbar) के एक दोस्त  जो की किसी अन्य राज्य का बादशाह होता है उस समय अंग्रेज़ो ने उस राज्य पर आक्रमण कर दिया था  उनका अंग्रेज़ो के साथ युद्ध हो रहा था ,

 

अपने दोस्तो की मदद के लिए बादशाह अकबर ने भी अपनी बहुत सी सेना युद्ध मे मदद के लिए  भेजी हुई थी |  इसी वजह से मंदिर आए बादशाह अकबर (akbar) यह दुआ करते है की मेरा  दोस्त युद्ध जीत जाए |

 

 

इतने मे एक सिपाही भागता हुआ आता है और अकबर को यह खबर सुनाता है की हम युद्ध जीत गए है यह सुन अकबर को बहुत खुशी होती है 

 

और अकबर बीरबल को बोलते है – देखा बीरबल  मंदिर और भगवान का चमत्कार – इधर मैंने दुआ मांगी नहीं की उधर दुआ कबूल भी हो गई |  तो बताओ अब यह कैसे हुआ ? यह चमत्कार नहीं तो और क्या है ? अब इसमे विश्वास कैसा ? akbar birbal ki kahaniyan | विश्वास और मनोकामना का राज़

 

यह सुन बीरबल (birbal) मुस्कराने लगते है और फिर से अपनी वही बात दोहराते है की जहांपना यह आपके विश्वास की वजह से हुआ है क्योकि यह आपको भी विश्वास था की आपकी  सेना उस सेना मे मिल जाने से ताकत और बढ़ गई है इसलिए युद्ध तो हम ही जीतेंगे |

इसी विश्वास की बदौलत आपको युद्ध की जीत का शुभ समाचार प्राप्त हुआ |

 

और रही बात दुआ की तो मैं इस मंदिर के बंद दरवाजे को अभी खोलता हूँ  आपको सब समझ अजाएगा | बीरबल (birbal) मंदिर का दरवाजा खोलता है |

दरवाजा खुलते ही बादशाह अकबर सहित सब लोग आश्चर्य चकित रह जाते है | मंदिर मे कोई भगवान की मूर्ति ही नहीं होती |

 

यह देख लोगो को इस बात का ज्ञान हो जाता है की मंदिर मस्जिद जैसी पाक और पवित्र जगह पर बिना विश्वास के कोई मनोकामना पूरी नहीं होती भगवान और मंदिर के प्रति हमारी आस्था और विश्वास ही हमारी मनोकमनाओ को पूरा करती है | यह उनकी आस्था और सकारात्मक सोच होती है | 

akbar birbal ki kahaniyan | विश्वास और मनोकामना का राज़

इधर अब बीरबल (birbal) बादशाह अकबर को मंदिर और मूर्ति का पूरा सच बता देता है और कहते है की यह सब मैंने अपनी बात को साबित करने के लिए किया था की 

इंसान जिन मनोकामनाओ को लेकर उनके पूरा होने की एक उम्मीद  के सहारे मंदिर मस्जिद जैसी पाक पवित्र जगहो पर आता है तो  भगवान के प्रति उसकी श्रद्धा  से उसकी वही उम्मीद विश्वास मे बदल जाती है और उसकी मनोकामना पूरी हो जाती है किसी की जल्दी हो जाती है और किसी की देर से | 

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मैं यह नहीं कहता की पीर फकीर और साधू संतो की सेवा न करो  बल्कि जरूर करो और करनी भई चाहिए लेकिन इस चीज को पूरी तरह से ” मनोकामना का पूरा होने जैसे बातों से” न जोड़ो|

 

अब ऐसा भी नहीं है की साधू संतो के आशीर्वाद से मनोकामनाए पूरी नहीं होती ! “जरूर होती है जहांपना” लेकिन वो भी आपके विश्वास की ऊर्जा से ही होता है | आप बातों की गहराई को समझो |

 

यदि आपको साधू संतो पर,  उनके आशीर्वाद पर, और उनकी साधना तपसस्या पर, विश्वास नहीं है तो उनका दिया हुआ आशीर्वाद आपके किसी काम का नहीं वो आशीर्वाद आपकी किसी भी मनोकामना को पूरा नहीं कर सकता जब तक की आपका उन पर पूरी तरह से आस्था और  विश्वास न हो |

 

हमे मंदिर जाना चाहिए , पूजा पाठ करना चाहिए इससे मन मे को शांति मिलती है अच्छी भावने जागती है  मन मे सकारात्मक विचार पैदा होते है, तथा  मन मे भगवान के प्रति आस्था जागती है |

और भगवान भी लोगो की इसी सच्ची आस्था को देख कर ही उनके मकसद को  पूरा करने मे उनकी सहायता करते है |

 

 बादशाह अकबर को  यह यकीन हो जाता है  की बीरबल सच कह रहे थे | बादशाह अकबर ने बीरबल की इस बुद्धिमानी  की तारीफ की |

 

तो देखा दोस्तो बीरबल ने कैसे अपनी बुद्धिमता से लोगो को यह बताया की विश्वास ही सब कुछ होता है |

 

 

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