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Top 100 Shreemad bhagavad gita quotes in hindi krishna suvichar

आज हम श्री मद bhagavad gita quotes in hindi – bhagvat geeta के अनमोल विचार suvichar – lord krishna quotes – lord krishna thoughts – shree krishna suvichar के बारे आपको परिचित करवाने जा रहे है.

श्री bhagavad gita quotes in hindi हमें बहुत कम समय मे जीवन को सही नजरिये से देखने का मौका देती है. Shree bhagavad gita quotes in hindi मे श्री कृष्ण जी  द्वारा बताई गई सभी अनमोल बातें, एक सुविचार के रूप मे प्रस्तुत कर रहे है. श्री भगवत गीता ज्ञान से भरे अमृत की वह खान है जो  तमाम दुख चिंताओ का विनाश कर जीवन को सुख शांति की चरम सीमा पर ला खड़ा कर देती है |

आज हम भगवान श्री कृष जी के द्वारा दिए गए ज्ञान से  भरे उपदेशो को जिसे Bhagavad Gita quotes in hindi,के नाम से जाना जाता है! आप तक लेकर आए है.

तो स्वागत है आपका भगवत गीता का सार – Bhagavad Gita quotes in hindi, मे ज्ञान के इस अद्भुत भंडार मे. भगवान श्री कृष्ण के अनमोल वचन – सुविचार – उपदेश.

भगवत गीता में सनातन धर्म की नीतियों का स्पष्ट वर्णन है। श्री भगवत गीता में कुल अठारह अध्याय और सात सौ श्लोक हैं।इसी ज्ञान रूपी महासागर की कुछ बूंदें सार के रूप में यहां प्रस्तुत की गई हैं।

श्रीमद भगवत गीता क्या है?

श्रीमद भगवत गीता (bhagavad Geeta) सनातन धर्म  की, (श्री कृष्ण जी द्वारा दिए गए अमृत रूपी ज्ञान से भरे उपदेशो की) पवित्र धार्मिक ग्रन्थ है.

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“श्री भगवत गीता” ! अर्जुन के सवालों और भगवान श्री कृष्ण के संतुष्टिपूर्ण एवं तर्क संगत जवाबो से भरे उपदेशो का संग्रह है.

 

श्रीमद भागवत गीता का उपदेश कब दिया गया?

महाभरत युद्ध शुरू होने से पूर्व ज़ब अर्जुन अपने गुरु द्रोण और दादा भीष्म को देख धनुष को हाथों से गिराते हुए रुदन करने लगे और कहने लगे की मै ये युद्ध नहीं कर सकता जिसमे अपनों का खून मेरे हाथों बहे. तब भगवान श्री कृष्ण जी ने समय को रोक कर अर्जुन को महाज्ञान देते हुए मनुस्य जीवन, संसार एवं रिश्तो नातो – कर्म – सुख -दुख एवं भावनाओं की जो सच्चाई बताई वह आज श्रीमद भगवद गीता के नाम से महान पुस्तक (धार्मिक ग्रंथ) के रूप मे विख्यात है.

यह पवित्र ग्रन्थ दुख निवारक के रूप मे भी जानी जाती है.यह पवित्र ग्रन्थ सदियों से लोगो को जीवन का सही मतलब, उदेश्य,और कर्म का ज्ञान देकर सही राह दिखाते आई है, और भविष्य मे भी यह लोगो को उनके तमाम मानसिक दुख कष्टो से मुक्त करेगी.

आज हम श्रीमद bhagavad gita quotes in hindi के माध्यम से श्री कृष्ण द्वारा बताए गए अनमोल ज्ञान को समझ कर उसे अपने जीवन मे अवतरित करने का प्रयास करेंगे.

ताकी हम जीवन को एक सही दिशा दें सके, जीवन का मकसद समझ सके,सदकर्म कर सके,और जीवन को एक सकारात्मक नज़रिये से देख कर हर मुकाम को प्राप्त कर सके.

bhagavad gita quotes in hindi की शुरुआत हम महाभारत के दौरान श्री कृष्ण जी द्वारा दिए गए एक खूबसूरत श्लोक से करते है. जो संस्कृत के साथ hindi अनुवाद मे इस प्रकार है.

 

न जायते म्रियते वा कदाचिन्ना, यं भूत्वा भविता वा न भूयः।

अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो, न हन्यते हन्यमाने शरीरे॥

 

अर्थात् -: आत्मा का कभी जन्म नहीं हुआ,आत्मा अजन्मा, नित्य, शाश्वत और पुरातन है. शरीर के नाश होने पर भी इसका नाश नहीं होता। जिस प्रकार हम वस्त्र बदलते रहते है उसी प्रकार आत्मा अनेको बार शरीर बदलती है.

शरीर आत्मा के घर की भांति है जो शरीर के खत्म व नष्ट होने पश्चात शरीर से बाहर आकर निराकार हो जाती है.

तो चलिए अब वर्तमान मे हम भी bhagavad gita quotes in hindi मे श्री कृष्ण की द्वारा दिए गए अद्भुत उपदेशो के अमृत रसपान करके अपने जीवन को सुंदर, सुखद एवं संतुस्टीदायक बनाते है.

 

bhagavad gita quotes in hindi

 

श्रीमद्भगवदगीता मे भगवान श्री कृष्ण अर्जुन के सवालों का बहुत खूबसूरत तर्क संगत जवाब देते हुए कहते है :- 

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।

न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः॥

अर्थात् -: आत्मा को शस्त्र काट नहीं सकते और न अग्नि इसे जला सकती है जल इसे गीला नहीं कर सकता और वायु इसे सुखा नहीं सकती।

 

तुम्हे आखिर किसका डर है? मृत्यु का और इस शरीर के खत्म हो जाने का?आत्मा का  ना तो जन्म होता है और ना ही उसे कोई मार सकता है.

 

हे अर्जुन ! – मृत्यु जीवन का अटल सत्य है जिसे कुछ समय के लिये टाला तो जा सकता है किन्तु झुठलाया नहीं जा सकता. और ये शरीर तो किराए के घर की भांति है जहाँ हम कुछ समय के मेहमान है.

 

शरीर नश्वर किन्तु आत्मा अमर और अजर है.

 

जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च।

तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि॥

अर्थात् -: जो भी जन्म लेता है उसकी मृत्यु निश्चित है और मरने वाले का जन्म निश्चित है इसलिए जो अटल है अपरिहार्य है उसके विषय में तुमको शोक नहीं करना चाहिये।

 

जो होना है उसे कोई टाल नहीं सकता और जो होना ही नहीं है उसके बारे शोक व चिंता करके स्वयं की परेशानियां बढाने के समान है.

 

सच्चाई से कभी दूर नहीं भागा जा सकता अतः सत्य को स्वीकार कर लेने मे ही समझदारी है.

 

 

झूठ को जबरदस्ती सत्य मान कर जीना ही गलतफहमी कहलाती है.

 

 

स्वयं की “व्यक्तिगत सोच”, गलत फेहमीयों को भी जन्म दें सकती है.

इसलिए स्वयं की व्यक्तिगत सोच को दूसरों पर थोपे नहीं.

 

बिना मोक्ष के जन्म मरण के चक्र से छुटकारा नहीं पाया जा सकता

 

 

वासना, क्रोध और लालच, यह नर्क के तीन द्वार होते है.

 

मनुष्य का सबसे बड़ा और सबसे पहला शत्रु या मित्र उसका मन ही होता है 

 

इर्षा और हद से अधिक इच्छाएं जीवन का सुकून छीन लेती है.

 

जिस प्रकार अग्नि स्वर्ण को परखती है, उसी प्रकार संकट वीर पुरुषों को।

 

 

यदि आप धर्म के मार्ग पर प्रश्नस्त है, तो परिणाम की चिंता किये बिना अपने धर्म का निडरता से पालन करें.

 

 

बिना किसी पुरषार्थ के आप अच्छे फल व सकारात्मक परिणाम की कामना नहीं कर सकते.

 

 

क्रोध से भ्रम पैदा होता है, भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है, जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाता है। जब तर्क नष्ट होता है तब व्यक्ति का पतन हो जाता है।

 

 

असफलता के डर से दोबारा प्रयास ना करने वाला मनुष्य जीबन मे बड़ी कामयाबी कभी प्राप्त नहीं कर सकता.

 

 

निःस्वार्थ और निष्पक्ष सेवा कर्म किये बिना

मोक्ष की उम्मीद करना भी व्यर्थ है.

 

 

Lord krishna quotes in hindi for success 

बड़ी कामयाबी एक ऐसे ताले मे बंद होती है जो 5 चाभियों से खुलती है.सकारात्मक सोच, एकाग्रता, निरंतर प्रयास, सच्ची लगन और दृढ संकल्प.

 

लक्ष्य प्राप्त करने हेतु उस कर्म मे पूर्ण समार्पण अति आवश्यक है, इसके लिये धन की लालसा मन से निकाल कर अपने कर्म पर एकाग्र हों.

 

 

ज़ब भी मनुष्य स्वयं की इन्द्रियों के अधीन हो जाता है तो लालच, आलस, वासना जैसी विकारताए मन पर सवार हो जाती है.

 

 

क्रोध सोचने की ताकत को हर लेता है जिस वजह से सही फैसले ले पाना कठिन हो जाता है.

Lord krishna quotes in hindi on karma

कर्म को लेकर श्री कृष्ण जी, अर्जुन को कर्म का सही अर्थ समझाते हुए कहते है.

|| कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।

मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि ||

यानी तुम कर्म करने के अधिकारी हो ना की उससे मिलने वाले फल के. अतः बिना फल की आशा किये ज़ब कर्म करोगे तभी आप फल प्राप्ति के पात्र कहलाओगे.

 

 

यदि आप कर्म फल प्राप्ति की लालसा व लालच हेतु कर रहे तो कर्म कभी आपकी उम्मीदों के अनुसार प्राप्त नहीं होगा.

 

बुरे कर्म से पीछा छुड़ाने का सबसे बेहतर तरीका है, मन मे अच्छे विचारों को आने दो, सकारात्मक सोचो.

 

 

मनुष्य जीवन मे वही करता है जो भी वो देखता है, सुनता है, समझता है, मनुष्य की हर क्रिया प्रतिक्रिया उसकी सोच पर आधारित होती है.

 

 

मनुष्य का मन परिवर्तनशील है,हमारे सोचने का तरीका और आदते वैसी ही बनेंगी, जिस तरह के लोग और माहौल मे हम अधिक समय बीता रहे होंगे.

 

 

बड़े लक्ष्य के निर्माण और सपनो को सच्च करने के लिये सबसे पहले आपको कल्पनाकारी बनना होगा.

 

 

जो व्यक्ति किसी अच्छे कर्म को करते हुए उसे ही अपना सौभाग्य और पुरस्कार मानता है तो ऐसे व्यक्ति को कर्म फल उम्मीदों से कहीं अधिक मिल जाता है.

 

 

जो व्यक्ति कर्म की अभिलाषा हेतु कर्म करता है फिर ज़ब उसे उम्मीदों अनुसार फल प्राप्ति नहीं होती तो वह निराश और दुखी होता है.

 

फल की आशा से कर्म करने वाले मनुष्य का मन कभी शांत व संतुष्ट नहीं रहेगी क्योंकि उसकी लालसा हर नए शिखर पर पंहुचती रहेगी. ऐसे मै उसका मन कभी संतुष्टि का आनंद नहीं भोग पाएगा.

 

 

बार बार जन्म लेने वाली असीमित इच्छाए मनुष्य को इन्द्रियों का गिलाम बना देता है 

 

 

भगवान श्री कृष्ण कहते है :- 

तुम स्वयं को मुझमे समर्पित कर दो, ईश्वर पर भरोसा रखो और निःस्वार्थ, निश्छल, निष्पांप और निष्पक्ष होकर बिना फल की अभिलाषा के कर्म करते जाओ तुम्हारा जीवन सुख और संतुष्टि से भर जाएगा, दुख तुम्हे कभी छू नहीं पाएगा और मोक्ष की प्राप्ति होगी 

 

 

किसी के प्रति बुरी भावना रखना, बुरा सोचना, इर्षा करना, बुरा बोलना, अपने धर्म और कर्तव्य की पालना ना करने वाला कभी मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकता.

 

 

ज़ब हम दूसरों की चुगली करते है तो हमें उसके भाग्य मे मिलने वाले दुख कष्टो को भी भोगना पड़ जाता है.

 

 

मै भूतकाल, वर्तमान और भविष्य हूं

होने वली घटना का हर परिणाम देख सकता हूं

इसलियर परिणाम की चिंता छोड़ अपना कर्म करते रहो.

 

 

कर्म अच्छा हुआ तो फल अवश्य मिलेगा, गर बुरा हुआ तो दंड भी अवश्य मिलेगा.

 

 

कर्म अच्छे हो या बुरे वें तब तक पीछा नहीं छोड़ते

ज़ब तक वह कर्म करने वाले को प्राप्त ना हो जाए.

 

 

यानी ज़ब तक कर्म करने वाला अपने कर्म के परिणामो को पूर्ण रूप से भोग ना लें.

 

 

 समय से पहले और भाग्य से अधिक कभी किसी को कुछ नही मिलता है।

 

 

सामान्य मनुष्य सदैव सर्वश्रेष्ठ मनुष्ययो को देख कर उन्ही के आदर्शो पर चलकर उन्ही के जैसा बनने की कोशिश करते है.

 

 

संसार तुम्हे वैसा ही दिखेगा,जिस मानसिक दृष्टि से तुम संसार को देखोगे.

 

 

बाहरी सुंदरता,बुरी चीजों और बुरी आदतों के प्रति मनुस्य तब आकर्षित होता है ज़ब वो अपनी इन्द्रियों के अधीन हो जाता है.

 

 

जिस प्रकार जलते हुए एक छोटे से दिए की रौशनी से प्रचंड अंधकार समाप्त हो जाता है.

 

 

उसी प्रकार ज़ब आप मन मे मौजूद अज्ञानता से भरे अंधकार रूपी कमरे मे सकारात्मक सोच का तेल डाल कर ज्ञान का प्रकाश उजागर करोगे तो अज्ञानता रूपी समक्ष अंधकार स्वयं ही समाप्त हो जाएंगे

 

 

ईश्वर आपकी सुनता है या नहीं यह आपकी श्रद्धा विश्वास और आस्था पर निर्भर करता है.

 

ईश्वर पर भरोसा रख कर दिल से उन्हें याद करोगे तो वो अवश्य किसी ना किसी रूप मे आकर आपकी मदद करेंगे.

 

 

यह सोच कर कभी अभिमान ना करें की हमने कितने लोगो या जीवो की मदद की क्योंकि करवाने वाला तो वो स्वयं ईश्वर है आप तो मात्र ज़रिया हो.

 

 

किसी का भला करके कभी एहसान ना जताए अन्यथा वह कर्म शून्य हो जाएगा और मिलने वाले प्रारब्ध व्यर्थ जाएगा.

 

 

मन मे शांकओ को कभी जन्म ना दो यह शंकाए मन मे गलत फेहमीयों का पहाड़ खड़ा कर जीवन का सुख चैन छीन लेती है.

 

 

क्रोध करना व्यर्थ है यदि आप क्रोध मे आकर प्रतिक्रिया दें रहे तो इसका अर्थ आपको ईश्वर के बनाए क़ानून “कर्म” पर भरोसा नहीं.

 

 

यदि कोई आपके साथ बुरा करता है तो कर्म उसका हिसाब खुद ही कर देगा.

 

 

मन को सदैव नियंत्रित करके चलो अन्यथा ये मन आपका सबसे बड़ा शत्रु बन कर आपसे बुरे कर्म करवा सकता है.

 

 

उपकार की बजाय परोपकार करें

चिंता की बजाय चिंतन करें

 

 

एक ही मनुष्य की हमेशा मदद ना करें ज़ब तक की वो स्वयं ही काबिल ना हो

 

 

ज्ञान सदैव बुद्धि से उत्तम व श्रेष्ठ होती है, इसलिए ज्ञान अर्जित करते रहे और बाटते रहे ताकी दूसरों का जीवन सवर जाए.

 

 

कोई भी इंसान जन्म से नहीं बल्कि अपने कर्मो से महान बनता है।

 

 

जो व्यक्ति फल की आशा हेतु कर्म करता है वह कर्म से ही बंध कर रह जाता है.

 

 

मेरा तेरा, छोटा बड़ा, अपना पराया, मन से मिटा दो, फिर सब तुम्हारा है और तुम सबके हो।

 

 

“दुनियां और लोग” वैसे ही नज़र आएंगे जैसा तुम देखना चाहोगे.

 

 

कोई भी दुख, तुम्हे तब तक विचलित नहीं कर सकता ज़ब तक तुम इन्द्रियों को अपने वश मे रखते हो.

 

 फल की अभिलाषा छोड़कर निरंतर कर्म करने वाला पुरुष ही अपने जीवन को सुखद व संतुष्टिदायक बनाता है।

 

 

शांति उसी को प्राप्त होती है मै और मेरा तथा मैंने किया व बनाया वाली लालसा से बाहर आजाता है.

 

 

जीवन मे वही मनुष्य संतुष्ट है रह सकता है जो कम से कम मे भी खुश है और अधिक पाने या होने लालसा व उम्मीद नहीं रखता.

 

 

किसी भी वस्तु, जगह या जीव एवं मनुष्य से अत्यधिक लगाव एक दिन दुख का सबसे बड़ा कारण बनता है.

 

 

लोगो की बातो की पर जितना ध्यान दोगे उतना ही आपका खुद पर से विश्वास कम होता जाएगा. खुद पर विश्वास कर खुद कर के दम पर आगे बढ़े और स्वयं ही अपना मार्ग प्रश्नस्त करें.

 

अध्यात्म से जुड़ो, एक अध्यात्म ज्ञान ही जीवन को सुकून की तरफ ले जा सकता है.

 

 

बुरे अतीत को याद करके दुखी होने से अच्छा है उससे सीख लो और अपने वर्तमान को सुधार कर एक बेहतर भविष्य का निर्माण करो

 

 

जीवन मे किसी भी पल कुछ भी हो सकता है जीवन सिमित है, समय व्यर्थ मत करो.

 

 

जितना अधिक पुरषार्थ करोगे, स्वर्ग का मार्ग उतना ही सरल होगा

 

 

किस बात को लेकर परेशान हो? कर्म करो और ईश्वर पर भरोसा रखो.क्या होगा क्या नहीं यह ईश्वर पर छोड़ दो.

 

 

स्वयं को ईश्वर के चरणों मे सौंप दो, नित्य अच्छे कर्म करो लोगो का भला करो सही राह दिखाओ.

 

 

जो हुआ वह अच्छा हुआ, जो हो रहा है वह अच्छा हो रहा है, जो होगा वो भी अच्छा ही होगा।

 

 

एक ज्ञानवान व्यक्ति कभी भी कामुक सुख में आनंद नहीं लेता,ज्ञानी बनो

 

 

रावण बिद्धिमान अवश्य था किन्तु ज्ञानी नहीं उसकी अज्ञानता ने उसे क्रोधी, कामुक, और अहंकारी बना दिया ¡ जो उसकी मृत्यु का बड़ा कारण बना.

 

 

वेद पुराण पढ़ने का कोई लाभ नहीं, ज़ब तक उसमे कही बातो को अपने जीवन मे अवतरित ना करो उनकी पालना ना करो,

 

 

वो ज्ञान व्यर्थ है जो सिर्फ तुम तक सिमित है,उस ज्ञान का कोई लाभ नहीं जिससे समाज एवं जगत का कल्याण ना किया जा सके.

 

 

 मैं सभी प्राणियों को एक समान रूप से देखता हूं, मेरे लिए ना कोई कम प्रिय है ना ही अधिक ।

 

मनुष्य के कर्म ही मनुष्य को ईश्वर  के नज़दीक लता है या  ईश्वर से दूर करता है

 

 

 तुम क्यों व्यर्थ में चिंता करते हो ? तुम क्यों भयभीत होते हो ? कौन तुम्हे मार सकता है ? आत्मा न कभी जन्म लेती है और न ही इसे कोई मार सकता है, ये ही जीवन का अंतिम सत्य है।

 

 

जब जब इस धरती पर पाप, अहंकार और अधर्म चरम सीमा पर होगा तब तब उसका विनाश कर धर्म की पुन: स्थापना हेतु, मैं अवश्य अवतार लेता रहूंगा।

 

 

Bhagavad Gita Quotes in Hindi

जिसने मन को जीत लिया है, उसने पहले ही परमात्मा को प्राप्त कर लिया है, क्योंकि उसने शान्ति प्राप्त कर ली है। ऐसे मनुष्य के मन पर सुख-दुख, सर्दी-गर्मी और मान-अपमान का कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

 

 

जो दान! कर्तव्य समझकर, बिना किसी संकोच के किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दिया जाए, वह दान सात्विक माना जाता है।

 

ग्राहस्ती व समाज मे रह कार परोपकार करना व अपने कर्तव्य को पूरी निष्ठां एवं ईमानदारी से निभाना, धर्म की पालना करना भी बड़े तप की भांति है.

 

जो विद्वान् होते है, वो न तो जीवन के लिए और न ही मृत के लिए शोक करते है।

 

 

हे अर्जुन! जो जीवन के मूल्य को जानता हो वही मनुष्य अपने जीवन का मूल्य निर्धारित कर जीवन को एक बड़ा लक्ष्य प्रदान कर पाता है.

 

मनुष्य जीवन बहुत दुर्लभ है, इसे व्यर्थ ना जाने दो, जीवन मे ऐसे कर्म करो जो आने वली मानव जाती के लिये प्रेरणा स्त्रोत बन सके.

 

 

जीवन ना तो भविष्य में है ना अतीत में, जीवन तो इस क्षण में है। वर्तमान को प्रसन्न मन से जियो.

 

स्वयं के लिये सर्वश्रेष्ठ बने, आपका  मूल्य समझ कर दुनियां एक दिन आपका सम्मान करेगी.

 

खुद को जीवन के योग्य बनाना ही सफलता और सुख का एक मात्र मार्ग है।

Bhagavad gita quotes in hindi for life 

हे अर्जुन! तुम्हारे तथा मेरे अनेक जन्म हो चुके है। मुझे तो वो सब जन्म याद है लेकिन तुम्हे नहीं।

 

 

ईश्वर! आपके जीवन को सुधारने सवारने हेतु अनेको कर्म करने के मौक़े देता है किन्तु मनुष्य अपनी इन्द्रियों के अधीन रह कर उन मौको का सही लाभ नहीं उठा पाता.

 

 

बुरे कर्म के बाद जिंदगी भर कितने भी अच्छे कर्म कर लो, किन्तु बुरे कर्मो का फल अवश्य मिल कर रहेगा.

 

 

अच्छे कर्म करने के मौक़े कभी ना छोड़ो.

कर्म करो, फल की चिंता मत करो। 

फल की लालसा छोड़कर कर्म करने वाला पुरुष ही अपने जीवन को सफल बना पाता है।

Bhagavad gita inspirational quote in hindi 

जो पुरुष न तो कर्मफल की इच्छा करता है, और न कर्मफलों से घृणा करता है, वह संन्यासी जाना जाता है। 

 

हे अर्जुन! एक सच्चा योगी अपने कर्म फल की इच्छा की इच्छा किये बिना कर्म को धर्म समझ कर पूरी निष्ठां से करता है.

 

जीवन मे किसी भी मुकाम को प्राप्त किया जा सकता है ज़ब मनुष्य अपने मन पर नियंत्रण और खुद पर विश्वास रख आगे बढ़े.

 

Bhagavad gita motivational quotes in hindi

मेरा तेरा, छोटा बड़ा, अपना पराया, मन से मिटा दो, फिर सब तुम्हारा है और तुम सबके हो।

जो हुआ वह अच्छा हुआ, जो हो रहा है वह अच्छा हो रहा है, जो होगा वो भी अच्छा ही होगा। 

Bhagavad gita quote on positive thinking

Bhagavad Gita Love Quote in Hindi

निर्बलता अवश्य ईश्वर देता है किन्तु मर्यादा मनुष्य का मन ही निर्मित करता है। 

 

डर धारण करने से भविष्य के दुख का निवारण नहीं होता है। डर से चिंताएं बढ़ती है जो मन का सुख चैन छीन लेती है.

 

किसका डर है तुम्हे, कौन तुम्हे मार सकता है, तुम शरीर नहीं हो, शरीर तुम्हारा मात्र एक साधन है अपने कर्मो को सिद्ध करने का. तुम एक आत्मा हो जो की अजर अमर है.

 

तुम युगो से अनेको शरीर धारण करते आए हो, अब मानव शरीर तुम्हे प्राप्त हुआ अपने कर्मो को सिद्ध करो.

जीवन का मात्र उदेश्य परोपकार करना, जरूरत मंद की निःस्वार्थ मदद करना है.

 

 

जो व्यक्ति निरन्तर और अविचलित भाव से भगवान के रूप में मेरा स्मरण करता है। वह मुझको अवश्य ही पा लेता है। 

 

कोई व्यक्ति मेरे अस्तितत्त्व को नकारे उससे मुझे कोई फर्क नहीं बस वो मनुष्य दिल का साफ कर्म का नेक, ईमानदार, भला मनुष्य होना चाहिये.

 

 

निःस्वार्थ भाव से किसी की मदद करना, सेवा समझ कर दान पुण्य करना , निष्पक्ष होकर निर्णय करना कर्म करना, यह तमाम कर्म मेरी भक्ति करने समान ही है. ऐसे मनुष्य मुझे अति प्रिय है.

 

 

मै श्रद्धा भाव का भूखा हूं, अगर कोई प्रेम और भक्ति के साथ मुझे पत्र, फूल, फल या जल प्रदान करता है, तो मैं उसे स्वीकार करता हूँ।

अन्यथा 56 भोग भी मेरे लिये तुच्छ है 

 

हे अर्जुन! क्रोध से भ्रम पैदा होता है, भ्रम से बुद्धि गलत सही का निर्णय लेने मे विफल रहती है, ऐसे मे, क्रोधी मन तर्क को नष्ट कर भ्र्म पैदा करता है जिस आधार पर कोई भी प्रतिक्रिया,पछतावे का कारण बनता है 

प्रत्येक बुद्धिमान व्यक्ति को क्रोध और लोभ त्याग देना चाहिए क्योंकि इससे आत्मा का पतन होता है। 

 

Bhagavad gita quotes on birth 

मनुष्य योनि का मिलना बहुत दुर्लभ है, पांपी मनुष्य को  -पशु जानवर की योनी मे ही जन्म लेकर अपने पाँपो को भोगना पड़ता है.

भले- निष्पांप मनुष्य पुनः मनुष्य योनी मे जन्म लेते है और अपने कर्मो को सिद्ध कर समाज और संसार को एक नई दिशा देते है.

मोक्षप्राप्ति का सही मार्ग -जरूर पढे 

मै की के कर्म का बाधक नहीं बनता, धरती पर मनुष्य जो कुछ भोग रहा वो सब उनके कर्मो की दें है.

महाभारत का ये युद्ध, आप सभी के कर्मो का ही परिणाम है,.

महाभारत का ये युद्ध क्यों हुआ और युद्ध मे क्या क्या हुआ ये युगो योगो तक मानव जाती को अनेको सीख देता रहेगा,उन्हें जीवन की सही राह दिखाता रहेगा ताकी वह जीवन मे सही निर्णय लेकर अपने जीवन को सार्थक कर सके.

भगवत गीता के दौरान भगवाम श्री कृष्ण अर्जुन को दिव्य दृष्टि देते हुए अपने दिव्य विराट स्वरुप के दर्शन कराते हुए कहते है.

हे अर्जुन!

  • मैं स्वयं ही सृष्टि का रचनाकार , पालन हार और संहार कर्ता हूं.
  • मै हर जगह हूं और हर चीज मुझमे समाहित है.
  • मै ही धरती, मै ही अम्बर और मै ही अंतरिक्ष भी.
  • देवता, राक्षस, यक्ष, गन्धर्व, प्रेत, भी ही हूं.
  • मै सुख, दुख, जीवन, मृत्यु से परे हूं.
  • मै वेदों का ज्ञान हूं, सूर्य का तेज़ हु, प्रकाश की गति हु.
  • महाभारत का ये युद्ध भी मै ही हु, इसकी शुरुआत, परिणाम, और अंत भी मै ही हूं..
  • मै ही शून्य और असंख्य भी
  • हर कर्म की शुरुआत और उसका परिणाम भी मै ही हूं.
  • राम भी मै और परशुराम भी मै ही हु.
  • जो हो चुका, जो हो रहा है और जो होने वाला है उन सबका परिणाम हु मै.
  • मै हर जीव और हर मनुष्य मै वास करता हूं
  • भूतकाल, वर्तमाम और भविष्यकाल भी मै ही हूं.
  • स्त्री की मर्यादा, ताकत और ममता हूं मै.
  • संतो की नश्छल वाणी, हवन का तप, और श्राप वरदान का सत्य होना भी मै ही हूं
  • अग्नि वायु सब मुझमे समाहित है.
  • अच्छाई बुराई संकल्प अभिमान सब मै ही हूं.
  • तुम स्वयं को मुझे समर्पित कर दो और निःस्वार्थ कर्म करते जाओ.

तो दोस्तों आज हमने Bhagavad Gita quotes in hindi, shree krishna quotes in hindi को पढ़ा. भगवान श्री कृष्ण जी के यह अनमोल वचन सुविचार, खूबसूरत उपदेश आपके जीवन को खूबसूरत बना देंगे.

यह Bhagavad Gita quotes in hindi को सब जगह शेयर करो ताकी सभी लोग भगवान कृष्ण के के ज्ञान से भरे इन अद्भुत उपदेशो को पढ़ कर अपने जीवन को सार्थक बना सके. 🙏🏻

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