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Navratri 2021 पूजा विधि, कलश स्थापना, शुभ मुहूर्त

Navratri 2021 पूजा विधि, कलश स्थापना, शुभ मुहूर्त- दोस्तों जैसा की आप लोग जानते ही है की भारत मे सितम्बर की शुरुआत होते ही त्योहारों का आगमन हो जाता है. इस बार 2021 के 29 सितंबर से नवरात्रे की शुरुआत हो गई है.आने वाला अक्तूबर महीना पूरा त्योहारों से भरा है. साल मे दो बार नवरात्रे का पर्व आता है. सितम्बर और अक्टूबर महीने मे पड़ने वाले नवराते को शारदीय नवरात्र कहा जाता है.

 

इस बार 2021 मे नवरात्रे की शुरुआत सितम्बर महीने के 29 तारीख यानी रविवार से पड़ रही है. इससे पहले यानि नवरात्रे से ठीक पहले श्राद्ध और पितृ पक्ष चल रहा था जिसमे लोग अपने पित्रों को श्राद्ध देते है भोजन करवाते है. 29 तारीख यानी रविवार से माँ का आगमन होगा और 8 अक्टूबर को नवरात्र समाप्त हो जाएगा यानी माँ को विदाई दी जाएगी. 

 

 

जानिए  Navratri 2021  की पूजा विधि,

कलश स्थापना, शुभ मुहूर्त और पूजा सामग्री

 

 

इस बार पूरे नौ दिनों तक चलेगा नवरात्र.

इस बार 7 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 38 मिनट तक नवमी मनाई जाएगी। इसके बाद 8 अक्टूबर को दोपहर 2

बजकर 1 मिनट पड़ दशमी लग जाएगी.

 

Navratri 2021 पूजा विधि, कलश स्थापना, शुभ मुहूर्त

navratri 2021 subh muhurat, timings and puja vidhi ,kalash sthapana

 

 

*बड़ा ही अद्भुत योग बन रहा है इस बार नवरात्रे मे .*

जी हाँ दोस्तों इस बार नवरात्रे मे दो अद्भुत योग बन रहे. एक है सर्वार्थ सिद्धि योग और दूसरा है अमृत सिद्धि योग. यह दोनों योग एक साथ बन रहे है. दोनों योग बड़े ही शुभ ओर मंगलकारी मैने जाते है. ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार ऐसे योग मे पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव से माँ की आराधना और पूजा करने से मनचाहा फल प्राप्त होता है.

 

 

*धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हिन्दू धर्म मे नवरात्रो का बहुत बड़ा महत्त्व होता है. इन दिनों माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव से पूजा आराधना की जाती है. इन दिनों हिन्दू धर्म के लोग पूरे 9 दिनों का व्रत (उपवास) भी रखते है. कुछ लोग पहले और आखरी दिन ही व्रत रखते है.नवरात्रे की शुरुआत पूरे विधि विधान से घर के मंदिर मे कलश की स्थापना की जाती है. और नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा उपासना  की जाती है| इसके बाद नवरात्रे के आखरी वाले दिन 9 कन्याओ को माता के नौ रूप मान कर चुन्नी चढ़ाई जाती है और भोजन करवाया जाता है|

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Navratri 2021 कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

इस नवरात्रे कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 29 सितंबर,को  रविवार सुबह 6 बजकर 16 मिनट से लेकर 7 बजकर 40 मिनट तक रहने वाला है। इसके अलावा जो भक्त किसी वजह से सुबह कलश स्थापना न कर पा रहे हो तो दूसरा शुभ मुहूर्त दिन के 11 बजकर 48 मिनट से लेकर 12 बजकर 35 मिनट (दिन के) तक का समय कलश स्थापना के लिए शुभ रहने वाला है।

 

Navratri 2019 पूजा विधि, कलश स्थापना, शुभ मुहूर्त

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नवरात्री जानिए कलश स्थापना का सही तरीका

कलश स्थापना नवरात्रे पूजा की पहली विधि है. कलश की स्थापना शुभ मुहूर्त माय ही करे तो अधिक फलदायी माना जाता है | बिना कलश स्थापना के पूजा अधूरी मानी जाती है. नौ दिनों तक घर के मंदिर मे कलश स्थापित करवाना बहुत ज़रूरी है.

 

नवरात्री कलश स्‍थापना के लिए आवश्यक सामग्री – 

इसके बाद  कलश स्‍थापना के लिए मिट्टी का पात्र, तांबे का कलश , जौं , मिट्टी और  नदी का थोड़ा सा रेत, गंगा जल , मौली,  अशोक या आम के पांच पत्ते, नारियल, चुनरी, सिंदूर, फल-फूल, फूलों की माला और श्रृंगार पिटारी अथवा समान | गाय का गोबर 

 

तांबे का लोटा यानि कलश न होने पर उसके स्थान पर मिट्टी का घड़ा भी उपयोग कर सकते है |

ध्यान रहे यह कलश स्थापना की सामग्री है | बाकी नवरात्रे पूजा की विधि और सामग्री  नीचे बताई गई है | नवरात्रे पूजा  की सामग्री इससे अलग होती है |

 

 

नवरात्री कलश स्थापना की विधि तथा मंत्रो का जाप – 

सबसे पहले माता  के लिए जो चौकी बनाई है उस पर हल्दी से  या चावल से अस्ट दल  कमल बना ले  फिर उस पर मिट्टी का वो पात्र रखे जिस पर आप कलश स्थापित करने वाले है | नीचे चित्र मे देखे की अस्ट दल  कमल कैसा होता  है और कैसे बनता है ?

Navratri 2019 पूजा विधि, कलश स्थापना, शुभ मुहूर्त

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Navratri 2021 पूजा विधि, कलश स्थापना, शुभ मुहूर्त

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कलश स्थापना करने के लिए व्यक्ति (उपासक) को मिट्टी का  उपयोग करना चाहिए | सबसे पहले मिट्टी का एक पात्र लें। उस पात्र मे  मिट्टी डालें   मिट्टी मे थोड़ा सा रेत मिला लें | सबसे पहले मुट्ठी भर जौं उस मिट्टी मे मिला ले | फिर उस मिट्टी पर हल्का पनि डाले जितना की मिट्टी गीली हो जाए पनि डालने का कामआपको रोज़ नौ दिनो तक करना है ताकि जो जौं  आपने मिट्टी मे मिलाई है वो अंकुरित होकर उग जाए | जैसा की नीचे चित्र मे दिखाया गया है |

 

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Navratri पूजा विधि, कलश स्थापना, शुभ मुहूर्त

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|  इसके बाद तांबे का कलश या मिट्टी का घड़ा  लें उसे जल से धो ले | इसके बाद तांबे के कलश पर  स्वास्तिक का चिन्ह  बनाएँ | फिर गाय के  गोबर को हल्का गीला करके उसकी छोटी सी लोई गोल गोल 3 या 4 लोई बना कर कलश पर चिपका दे | 

 

फिर कलश के ऊपरी हिस्से पर 9 बार घुमा कर कलेवा बांधे | इसके बाद कलश मे गंगा जल डाले | इसके बाद एक नारियल लें  नारियल पर लाल चुनरी बांध दें । बांधने के बाद फिर नारियल पर वेसे ही नौ बार घुमा कर  कलेवा बांधे जैसे कलश पर बांधा था |

 

 

 

अब कलश के मुंह पर  आम के साफ 5 पत्ते रखे फिर नारियल को कलश के मुंह पर रख दे | ध्यान रहे रौली और चुनरी बांधते हुए  माँ के मंत्र का जप करे  –  या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

 

अब कलश उठा कर मिट्टी पर स्थापित करे (रखे) कलश  रखते हुए ॐ ऐं श्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमः मंत्र का जाप  करे | इस प्रकार कलश नौ दिनो के लिए स्थापित हो जाएगा | इस  बात का खास ध्यान रखे की कलश को बैठ कर  स्थापित न करे |

 

 

Navratri 2019 पूजा विधि, कलश स्थापना, शुभ मुहूर्त

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अब जानते है नवरात्रे पूजा  के लिए लगने वाली सभी सामग्री – 

 

गंगा जल ,  मौली , पुस्प (फूल) फल , फूलो की माला , माँ के आसान के लिए  लाल सूती कपड़ा , लाल चुनरी , कपूर , इलायची ,लोंग ,हल्दी , चन्दन , सिंदूर , सुपारी , पान के दो साफ पत्ते ,(पत्ते कटे या फटे नहीं होने चाहिए )z चावल, पंचामृत के लिए  गाय का कच्चा दूध , दही , तुलसी के कुछ पत्ते , घी, शहद पंचामृत बनाने के लिए इन पांचों को आपस मे मिला ले |  शृंगार  की पेटी जिसमे  शृंगार  के सभी समान हो , 

 

Navratri 2019 पूजा विधि, कलश स्थापना, शुभ मुहूर्त

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नवरात्रे पूजा विधि – 

सबसे पहले अच्छे से नहा धो कर साफ वस्त धारण कर के तैयार हो जाए |लाल या फिर पीले रंग का वस्त्र  ही  पहने | पूजा शुरू करने से पहले अपने सर को रुमाल या चुन्नी से ढक ले | जहां पर पूजा करनी है वह स्थान साफ सुथरा होना चाहिए|  अब हाथ मे गंगा जल ले कर पूजा स्थान पर और पूजा सामग्री पर अच्छे  से छिड़क दें |

ध्यान रखे माँ की मूर्ति या फोटो को जिस आसान पर रखना है वह आसान लाल रंग का हो या फिर  साफ लाल सूती कपड़ा आसान पर बिछा दे |. इसके लिए सबसे पहले माता की चौकी सज़ा ले यानि माता की फोटो या मूर्ति को रखने के लिए एक उचित आसान बना ले | चौकी को लाल कपड़े से ढक दे जैसा की नीचे चित्र मे दिखाया गया है |

 

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अगर माता की फोटो है तो उसे इस आसान पर विराजमान करे और  लाल चुन्नी माता की  फोटो के ऊपर ओढ़ा दे ।  फिर माता को हल्दी से तिलक करें | यदि मूर्ति है तो उसे पंचामृत से स्नान कराए | जैसा नीचे चित्र मे दिखाया गया है |आखिर मे गंगा जल से स्नान कराए फिर माता को लाल वस्त्र पहना कर चौकी पर विराजित करे । 

 

Navratri 2021 पूजा विधि, कलश स्थापना, शुभ मुहूर्त

 

अब माता को सबसे पहले लाल चुन्नी डाले |  सभी पूजा सामग्री को एक थाली मे रख लें | एक थाली मे फूल और फूलो की माला रख ले | माता को लाल ओर पीले रंग के पुस्प बहुत प्रिय है | इसके लिए आप गेंदे , गुड़हल और गुलाब के फूल ले सकते है | दूसरी थाली मे फल रख ले | तीसरी थाली मे माता के शृंगार का सामान  और पूजा की सामाग्री रख ले |

Navratri 2019 पूजा विधि, कलश स्थापना, शुभ मुहूर्त

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अब  जिसमे आप अखंड ज्योत जगाना चाहते हैं उसे चौकी पर स्थापित कर दे | अब उसमे घी भर कर बत्ती लगा दे और अखंड ज्योत जला दे | इसके बाद  थाली मे दोनों पान के पत्तों  पर कपूर रख कर ज्योत जलाए और आरती करते हुए  सभी देवी देवताओ को याद करते हुए उनका आवाहन करे | ऐसा नौ दिनो तक करना है | 

 

Navratri 2019 पूजा विधि, कलश स्थापना, शुभ मुहूर्त

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अब सबसे पहले माँ को पुस्प अर्पित करे ,  अब  सब सामग्री मे से  थोड़ा थोड़ा माता को अर्पित करे जैसे पुस्प (फूल) फल ,   , लाल चुनरी , कपूर , इलायची ,लोंग ,हल्दी , चन्दन , सिंदूर , सुपारी ,  चावल, पंचामृत के लिए  गाय का कच्चा दूध , दही , तुलसी के कुछ पत्ते , घी, शहद पंचामृत बनाने के लिए इन पांचों को आपस मे मिला ले | अब माँ को फूलो की माला पहनाए|| अब माँ को शृंगार पेटी अर्पित करे |

 

इस प्रकार आपको रोज़ माँ  की पूजा करनी है |

 

इन नौ दिनो तक लोग घरो मे  दुर्गा सप्तशती का पाठ कर माँ दुर्गा के नौ रूपो की पूजा , आराधना और उपासना करते है |

 

माँ के नौ रूप (नाम) कुछ इस प्रकार है –

1.माँ शैलपुत्री

2. माँ ब्रम्हचारिणी

3.माँ चंद्रघंटा

4.माँ कूस्ठमांडा

5.माँ स्कन्द माता

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6.माँ कात्यायनी 

7. माँ कालरात्रि

8. माँ महागौरी 

पहले दिन माँ माँ शैलपुत्री की पूजा आराधना की जाती है दूसरे दिन माँ ब्रम्हचारिणी की तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की चौथे दिन माँ कूस्ठमांडा की पचवें दिन माँ स्कन्द माता की  छठे दिन माँ कात्यायनी की सातवीं दिन माँ कालरात्रि अठवे दिन माँ महागौरी की |

 

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इन नौ दिनों मे ऐसे काम बिलकुल ना करे. 

 

हिन्दू धर्म मे इन नौ दिनों मे बड़ी ही खास बातो का ध्यान रखा जाता है. जैसे.

जब नवरात्रे शुरू हो जाते है तब घर मे प्याज़ और लहसुन का सेवन बिलकुल बंद कर दिया जाता है.

 

इन दिनों (नवरात्रे के ख़त्म होने तक) बाल और नाखून बिलकुल नहीं काटे जाते.

 

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व्रत रखने वाले अनाज और नमक तथा नमक से बनी कोई भी चीज का सेवन खाने के लिए नहीं कर सकते.

 

व्रत रखने वाले खाने में दूध, फल, मूंगफली, साबूदाना, उबली आलू आदि इन सब चीज़ो का ही सेवन कर सकते है.

 

इन नौ दिनो तक घर मे  किसी भी प्रकार का नॉन वेज आहार अथवा खाद्द पदार्थ का सेवन नहीं किया जाता और न ही घर मे बनाया जाता है | | ओर न ही घर का कोई भी व्यक्ति बाहर से इन खाद पदार्थो का सेवन करता है |

 

नवरात्रे मे घर और मंदिर साफ सुथरा रहना चाहिए. साफ सफाई पड़ खास ध्यान रखा जाता है. नवरात्रे मे घर मे कही

भी मकड़ी के जाले नहीं लगे होने चाहिए.

 

नवरात्रे मे रोज़ नौ दिनों तक सुबह शाम मंदिर मे ज्योति जलती रहनी चाहिए. क्योकि की इन दिनों माँ का घर मे वास

होता है.

 

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