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Adhyatm kya hai | अध्यात्मज्ञान सम्पूर्ण जानकारी

Adhyatm kya hai – नमस्कार दोस्तों !स्वागत है आप सब का एक बार फिर से  ज्ञान से  भरी इस अद्भुत दुनियां मे. आज हम आपके लिए लाए है, अध्यात्म का वो ज्ञान जिसे जानने और समझने के बाद आपको परम् सुकून एवम शांती की अनुभूती होने लगेगी.

 

Adhyatm kya hai? अध्यात्म ज्ञान क्यों जरुरी है. 

Adhyatm-kya-hai

बहुत से लोग नहीं जानते की adhyatm kya hai? इसलिए भगवत गीता से अध्यात्म ज्ञान  को समझने के बाद और बड़े बड़े  महापुरुषों एवम संतो के मुखाअरविन्द से इस ज्ञान का रस पान करने के बाद हम इस ज्ञान को आसान भाषा मे आप तक लें कर आए है.

Adhyatm kya hai? इससे पहले आपका ये जानना अनिवार्य हो जाता है की जीवन मे अध्यात्म ज्ञान का होना क्यों और कितना जरुरी है?

  • आज जादातर इंसान चिंता, तनाव और मानसिक कमज़ोरी (स्ट्रेस, डिप्रेशन, हाइपर टेंशन) से घिरता जा रहा है.
  • जिस वजह से वो मानसिकता रूप से कमजोर पड़ रहा है
  • सोचने समझने की कल्पना शील शक्ति कम हो रही.
  • मन नकारात्मक विचारों से घिर रहा है.
  • सिर्फ यही नहीं, छोटी छोटी बातों पर क्रोधित को उठता है,
  • मरने मारने पर उतारू हो जाता है,
  • आए दिन ग्रह कलेस का वातावरण बनने लगता है.
  • मन अशांत रहने लगा है, उसको शांती मिल ही नहीं पाती.
  • मन बुरी आदतों, बुरी चीजों और बुरी संगत की तरफ आकर्षित होता जाता है.

 

तो ऐसे मे अध्यात्म ज्ञान हमें वो मानसिकता संतुस्टी एवम शक्ति प्रदान करता है जिससे सबसे पहले हमारा मन हमारे काबू मे हो जाता है.नतीजा !बेवजह की इच्छाए सीमित हो जाती है.

जैसे जैसे हम अध्यात्म ज्ञान को समझते जाते है वैसे वैसे मन मे सकारात्मक विचारों का और शरीर मे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होना प्रारम्भ हो जाता है.

इसके बाद हमारी इच्छाए अपने आप ही सीमित रह जाती है. क्योकि जिंदगी मे आधी मुसीबतो की जड़ हमारी बेवजह की इच्छाए ही होती है.

अध्यात्म ज्ञान से हमारा मन सुकून से भरा रहता है मन शांत रहता है. कठिन कठिन परिस्थितियों मे भी मन विचलित नहीं होता, मन संयम और विवेक से काम करने लगता है. क्रोध, वासना, घृणा और लालच पर नियंत्रण हो जाता है.

और भी बहुत से लाभ है जीवन मे अध्यात्म ज्ञान के.

तो अब आप समझ ही गए होंगे की जीवन मे अध्यात्म ज्ञान क्यों जरुरी है.

 

तो चलिए अब समझते है Andhyatm kya hai 

मोक्ष प्राप्ति का मार्ग – जरूर पढ़े 

अध्यात्म का अर्थ 

अध्यात्म का अर्थ है आत्मा का अवलोकन ।आत्मा का अवलोकन या स्वयं को जानने का  ज्ञान।

अध्यात्म दो शब्दों से मिल कर बना है अध्ययन + आत्म यानी आत्म का अध्ययन. स्वयं को समझना.

अब यहां एक प्रश्न है कि क्यों आत्मा के बारे में जाने?जबकि सब काम देह से जुड़ा है।और जितनी सुख सुविधा है वह सभी देह हित के लिए ही बना है तो फिर ये आत्मा का ज्ञान क्या है और कितना आवश्यक है?

 

 

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अध्यात्म जगत एक ऐसा जगत है जहा पर लौकिक बातो की महता पर ध्यान कम दिया जाता है जबकि अलौकिक
को ही सर्व श्रेष्ठ और इसी का अवलोकन किया जाता है।

 

अध्यात्म को ही शक्ति और भक्ति का स्रोत मानते है ।
अध्यात्म का शाब्दिक अर्थ है स्व को अस्तित्व के साथ समन्वय स्थापित करना।

 

बड़े बड़े और सिद्ध पुरुषों ने आध्यात्मिक ज्ञान को ब्रह्म ज्ञान बताया है।छोटी छोटी बाहरी क्रियाएं चाहे जो भी इस शरीर से किया जा रहा है इनके परिणाम आने अत्यंत आवश्यक है।

क्योंकि कारण और प्रभाव ही इस प्रकृति का नियम है ।जिसको आप चाहकर अभिन्न नहीं कर सकते ।

अब मै आपको थोड़ा उदाहरण के साथ समझा रहा हू जैसे चाहे आप भारत में हो या अमेरिका ने हो यदि आप ऊपर से नीचे कूदते है ती आप नीचे ही गिरेंगे ।और आपको चोट नहीं लगेगी ।

 

इसे ही पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत कहते है।ऐसा नहीं है कि गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत केवल भारत या अमेरिका के लिए ही बना है।

ठीक वैसे ही अध्यात्म के वैज्ञानिक , जैसे ऋषि ,महर्षि ज्ञानी जिन्होंने अध्यात्म का अध्ययन किया और उसके परिणाम भी पाए। उनके अनुसार जीवन केवल शरीर की भौतिक क्रियाओं को संगम नहीं है बल्कि उसे भी दूर यह क्षेत्र है जहां यह सूक्ष्म जगत से जुड़ा है।

 

अध्यात्म की परिभाषा और ओशो -Adhyatm kya hai 

आध्यात्म की परिभाषा को परिभाषित करना उतना आसान नहीं है जितना हम इसे समझते है।कारण है कि इस संसार मे वर्तमान समय में वर्तमान नागरिक केवल वर्तमान की परिस्थिति से ही रूबरू होते है जिससे वे वर्तमान को ही सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए ज्यादा उत्साहित रहते है।

इसको इसी परिपेक्ष्य मे देखे की वर्तमान मनुष्य लौकिक वस्तुएं या व्यक्ति को ही सम्पूर्ण मान लेता है और उसी को सम्पूर्ण जीवन समझता है।

परन्तु ये यदि हम गहराई से इसका अवलोकन करते है तो समझ मे आता है कि अध्यात्म या चिंतन वर्तमान की अवस्था के साथ साथ भविष्य की स्थति को भी ज्ञान कराता जिससे है जीवन को एक नई सोच और दिशा मिलती है।

ओशो ने अध्यात्म के बारे में लिखा है कि अध्यात्म को जीवन की ऊर्जा बना लोगे तो जीवन की गतिविधियां ऐसी लगेगी जैसे जीवन को एक सम्पूर्ण लक्ष्य मिल गया है।

 

अध्यात्म मे मन
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आदमी के देह में जीवन बनाने मे सबसे बड़ा  योगदान  आदमी के मन का है।
क्योंकि आदमी ही इस संसार में एक ऐसा प्राणी है जो अपनी मन को गुणी और बुद्धिमान बनाकर अपने उस परम लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है जबकि कोई अन्य प्राणी नहीं कर सकते।

जितने भी कार्य और समृद्धि की ऊंचाइ आज इस वर्तमान समय मे संसार में देखने को मिल रही है उसका सबसे बड़ा
कारण मन है ।

अब आते है अध्यात्म के बारे में मन की सीमा कहा तक है।
अध्यात्म जगत ही असीमित है और इसको समझने मे
मन की परिकल्पना पारंगत करने के लिए मन को कुशल एवम् सक्षम बनाना होता है ।और यह तभी संभव है।जब हम इसकी गहराई मे जाए और जाने।

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इसके लिए ध्यान अवस्था सबसे उत्तम है.

अगर सत्य और सच्चाई है प्रमाण मन से ही पहले सिद्ध होता है । हा ये अलग बात है हम इस सच्चाई को कितना जानते है।

जब तक अध्यात्म की तरफ मन का झुकाव नहीं होगा तब तक सहज सुख और शांति भी सम्पूर्ण रूप से मिल नहीं सकती।

 

अध्यात्म केवल पूजा पाठ और बाहरी प्रदर्शन नहीं है।यह एक आंतरिक स्वाध्याय और सहानुभूति है स्वयं के प्रति।
क्योंकि शरीर की मूल भूत प्रक्रियाएं आंतरिक क्रियाओं का ही संस्कार है।

 

आत्मा ही जीव का जीवन है और आत्मा को सच मे जानना ही सचमुच आध्यात्मिक चेतना है।मन को अध्यात्म मे लाना और अध्यात्म तथ्यों का अनुभव करना बहुत ही आवश्यक  है क्योंकि जबतक यह मन अध्यात्म के प्रति चिंतन शील नहीं होगा जीव के कल्याण और मोक्ष कि परिकल्पना नहीं कि जा सकती।

 

अध्यात्म और रामायण
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रामायण हमारे भारत वर्ष की एक धार्मिक पुस्तक है जिसका श्रवण एवम् ध्यान को अध्यात्म के अंतर्गत माना जाता है।क्योंकि अध्यात्म की सतह का केंद्र यह धार्मिक पुस्तकें है। जहां से अध्यात्म को एक बल मिलता है।क्योंकि
उदाहरण को भौतिक तथाकथित से जोड़ने से आदमी को समझ में आता है।

रामायण की कथा शुरू होते ही मन को एक अद्भुत अलौकिक गति मिलती है ।और ये प्रमाण है ।क्योंकि श्लोकों _मंत्रो की तरंग आध्यात्मिक चेतना को और ऊपर उठती है इसमें कोई संदेह नहीं।

और जब आत्मिक संतुष्टि और आत्मिक ज्ञान मिल ता है तो जीवन में बहुत सारे काम स्वतः सिद्ध होने लगते है।क्योंकि दरअसल जीवन की उसकी जरूरत है।

इसी सोच के साथ रामायण लिखी भी गई ताकि लोक कल्याण जनहित मे जरूरी है।लोक कल्याण स्वचेतना को परम चेतना से जोड़ने का भी कार्य करती है।और इससे अध्यात्म को एक संकेत मिलता है।

और ऐसा देखा भी गया है कि पुस्तके एवम् प्रवचन से जीवन को नया आयाम मिला है।और ऐसी पुस्तके हमारे अध्यात्मिक क्षेत्र को पूर्ण रूप से विकसित करती है।

 

 

अध्यात्म सार

अध्यात्म की सीमा अनंत है और यह अथाह भी है ।परन्तु
जरूर इसका कुछ एक दृष्टिकोण है जिसे समझना अतिआवश्यक है ।

जब भी आपको स्वयं का ज्ञान और उसका अनुभव शुरू हो जाएगा आपको स्वयं ही यह समझ में आने लगेगा कि अध्यात्म क्या है और इसका क्या स्वरूप है?,

 

और यह तभी संभव है जब आप इस पर मनन करें श्रवण करे।सत्संग करे ।

कुल मिलाकर अध्यात्म बहुत जरूरी है जीवन के मार्ग दर्शन में।

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जब तक अध्यात्म की शुरुआत नहीं होगी।जीवन की सारी की सारी भौतिक सुविधाए रहते हुए आप उसमे उस आनंद को प्राप्त नहीं करेंगे।

आशा करता हूं adhyatm kya hai  पोस्ट आपको अच्छा लगा होगा और आपके कर्मक्षेत्र की तरफ एक परिवर्तन लाएगा।

मै चाहता हूं की adhyatm kya hai की इस पोस्ट को अधिक से अधिक लोगो तक पहुंचाया जाए, ताकी वह भी इस ज्ञान को समझ कर अपने जीवन का कल्याण कर सकें. चिंता मुक्त होकर संतुष्टि भरे मन से जीवन को जी सकें. सुख सुकून का आनंद लें सकें.

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