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Moral story for students in hindi ताबीज़ का सच्च

नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका ज्ञान से भरी इस Moral story for students in hindi मे. आज की इस कहानी से शिक्षकों को बहुत प्रेरणा मिलेगी. बहुत कुछ सीखने हो मिलेगा.

ताबीज़ का सच्च – best story for student 

किसी गांव में चंदू नाम का एक नौजवान युवक रहता था।उसकी उम्र यही कुछ 25 साल होगी. वह बहुत मेहनती था,हुनरमंद था और काम को दूसरों से ज़ादा बेहतर भी करता था, फिर भी पता नहीं किस वजह से असफल हो जाता अच्छी सफलता नहीं मिल पा रही थी.

 

वो हमेशा अपने मन में एक शंका लिए सोचता रहता कि मै अपने कार्यक्षेत्र में सफल हो पाउँगा या नहीं! जिस वजह से कभी-कभी वो इसी चिंता के कारण आवेश में आ जाता और दूसरों पर क्रोधित भी हो उठता।

 

एक दिन उसके गांव में एक प्रसिद्ध महात्मा जी का आगमन हुआ।

 

खबर मिलते ही चंदू , महात्मा जी से मिलने पहुंचा और बोला, 

“ महात्मा जी मैं कड़ी मेहनत करता हूँ, सफलता पाने के लिए हर-एक प्रयत्न करता हूँ; पर फिर भी मुझे सफलता नहीं मिलती। कृपया आप ही कुछ उपाय बताएँ।”

Hindi moral story for students

महात्मा जी समझ गए थे की इस परेशानी का हल क्या है, महात्मा जी ने चंदू को कहा बेटा चिंता मत करो निश्चिन्त रहो आप शाम को मेरे पास आना तुम्हारी समस्या का समाधान मिल जाएगा.

 

चंदू शाम को महात्मा जी के पास दोबारा पहुंचा. महात्मा ने चंदू को एक काले नीले रंग का ताबीज़ देते हुए कहा की बेटा यही है तुम्हारी समस्या का समाधान.

 

महात्मा जी ने ताबीज़ की खूबियां बताते हुए कहा की यह ताबीज़ बहुत ही चमत्कारी है इस ताबीज़ मे मैंने बहुत सारे मंत्र लिखकर डाले है.किन्तु इसकी शक्तियाँ तभी काम करेगी ज़ब तुम इस ताबीज़ के अनुसार काम करोगे यानी काम करते वक़्त सफलता मिले या असफलता इन बातो पर विचार किये बिना ही तुम्हे अपना काम पूरी लग्न और ईमानदारी से करते रहना होगा,फिर देखना कैसे ये ताबीज़ तुम्हारी समस्याओं को एक एक करके खत्म करता है.

 

बस फिर क्या था चंदू ने ताबीज़ अपने गले मे धारण  कर ली. फिर चंदू ने मेहनत करके रात दिन एक कर दिया.

 

दो साल बाद चंदू अपनी मेहनत से बहुत बड़ा सेठ बन गया. चंदू ने तमाम सफलताए हासिल की. दो साल बाद उस शहर मे महात्मा जी फिर से आए.

 

चंदू तुरंत उन महात्मा के दर्शन के लिए उनके पास गया.

चंदू बहुत खुश था. चंदू ने महात्मा के चरण पकड़ कर उनका धन्यवाद किया.

 

महात्मा जी ने चंदू को आशीर्वाद दिया और कहा की चंदू लाओ ये ताबीज़ अब मुझे वापिस कर दो.

 

यह सुन चंदू चौक गया और कहने लगा की अरे महात्मा जी आप ये ताबीज़ वापिस क्यों मांग रहे हो.

 

महात्मा जी बोले – ताकी मै आज तुम्हे इस ताबीज़ की असलियत बता सकू.

 

चंदू को कुछ समझ नहीं आया पर उसने तुरंत ताबीज़ खोल कर महात्मा को दे दी. महात्मा जी ने ताबीज़ खोला तो तो इसमें से सिर्फ मिट्टी निकली.

 

यह देख चंदू बोला की महात्मा जी इस ताबीज़ मे तो सिर्फ मिट्टी थी.पर आप तो यह ताबीज़ मुझे देते वक़्त बोले थे की इसमें बहुत सारे मंत्र लिख कर डाले है.

 

महात्मा जी बोले – नहीं, वो मैंने झूठ बोला था ताकी तुम इस ताबीज़ की शक्तियों पर विश्वास करके सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे सको.

 

यानी तुम्हारी समस्या बस यह थी की तुम्हे खुद पर और अपने हुनर पर भरोसा नहीं था जिस वजह से तुम बार बार असफल हो रहे थे.

 

तुम्हारे विश्वास को जगाने के लिए मेने यह सब किया. अतः तुम्हारी अनेक सफलताओं का कारण यह ताबीज़ नहीं बल्कि सिर्फ तुम्हारा खुद पर किया गया विश्वास है.

 

चंदू को अब आरी बातें समझ आगई थी. चंदू इतना खुश था की मानो कोई खजाना मिल गया हो. चंदू ने एक बार फिर से महात्मा जी के चरणों मे गिर कर आशीर्वाद लिया.

 

कहानी से सीख.-  Moral story for students in hindi

तो देखा दोस्तों , तमाम समस्याओ का समाधान चंदू के अंदर ही था ताबीज़ तो बस एक बहाना था चंदू के विश्वास को जगाने का.

 

कुल मिलाकर इस कहानी से हमें सीख मिलती है की गर खुद पर और अपने हुनर पर भरोसा है तो हर काम मे सफलता हासिल की जा सकती है.

 

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