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best 10 moral stories in hindi | रोचक कहानियाँ

10 moral stories in hindi | रोचक कहानियाँ – दोस्तों स्वागत है आपका ज्ञान से भरी  कहानियों की इस रोचक दुनिया मे। दोस्तों जीवन मे कहानियों का विशेस महत्तव होता है | क्योकि इन कहानियो के माध्यम से हमे बहुत कुछ सीखने को मिलता है |

 

इन कहानियों के माध्यम से आपको ज़रूरी ज्ञान हासिल होंगे जो आपको आपकी लाइफ मे बहुत काम आएंगे |

 

यहाँ पर बताई गई 10 moral stories in hindi ki  हर कहानी से आपको एक नई सीख मिलेगी |

हर कहानी मे कुछ न कुछ संदेश और सीख (moral )छुपी हुई है | तो ऐसी कहानियो को ज़रूर पढ़े और अपने दोस्तो और परिवारों मे भी ज़रूर शेयर करे |

 

पछतावा – 10 moral stories in hindi | रोचक कहानियाँ

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सुंदर नगर नाम के एक गाँव मे महेश नाम का एक आदमी रहा करता था | महेश के दो बेटे थे बड़े बेटे का नाम था राम और  छोटे बेटे का नाम था श्याम | बस ये तीन लोग ही घर मे रहते थे | महेश अपने दोनों बेटो से बहुत प्यार करता है महेश पेशे से एक किसान था|

 

राम अधिकतर समय  अपने पिता के साथ ही रहता और उनका काम मे हाथ बटाता | राम अपने पिता की हर बात मानता और उनकी सेवा करता |

 

वही दूसरी तरफ श्याम अपना अधिकतर समय बाहर आवारा दोस्तो के साथ खेल कूद मे ही बिता देता | श्याम अपने पिता की बात भी बहुत कम मानता था |

 

इस दोनों भाइयों के विचार और व्यवहार मे बहुत फरक था |

 

समय बीतता गया राम और श्याम जवान हो गए | जब श्याम घर का कोई काम  न करता तो पिता जी और राम दोनों मिलकर उसे समझाते की अब तो अपनी जिम्मेदारियों को निभाना सीख , कब तक एसे ही अपने इन आवारा दोस्तो के साथ आवारा की तरह घूमता रहेगा | इस तरह रोज होता |

 

(आप पढ़ रहे है -10 moral stories in hindi | रोचक कहानियाँ)

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एक दिन अचानक श्याम बाहर से आया और अपने पिता से ऊची आवाज मे बात करने लगा और बोलने लगा – मुझे अपना हिस्सा चाहिए ! मैं आपके बनाए हुए कड़े और नियम मे नहीं रह सकता |

मुझे यह घर छोड़ कर जाना है | तंग आ गया  हु रोज की कैच कैच से , जब देखो ये न करो वो न करो और रोज सुनाते रहते है | 

 

इधर पिता ने श्याम को प्यार से देखा और समझाते हुए कहा – बेटा! यह सब तुम्हारा ही तो है | आखिर यहाँ से अलग होकर कहाँ जाओगे ? कैसे रहोगे ? हम सब एक परिवार है मिल जुल कर रहने मे ही भलाई है | 

 

लेकिन श्याम पर अपने पिता की बातों का कोई असर ही न हुआ वो बस अपनी जिद्द पर अड़ा रहा |

इतने मे राम गुस्से मे  बोलता है – जाने दो पिता जी जाने दो !  दे दो इसका हिस्सा | न जाने कैसे लोगो के साथ रहता है | एक दिन जब ठोकर खाएगा तो खुद ही समझ जाएगा और उल्टे पाँव यही वापिस आएगा |

 

 

पिता जी ने श्याम को उसका हिस्सा दे दिया | श्याम अपना हिस्सा ले कर अब बहुत खुश था | श्याम अपना हिस्सा लेकर घर छोड़ कर चला जाता है |

अब श्याम को कोई रोकने टोकने वाला न था | बस अब सब कुछ अपनी मर्जी से करता | श्याम अपने उन्ही दोस्तो के साथ मिलकर रहने लगा | उसके दोस्त अच्छे नहीं थे | 

श्याम शुरू से ही बुरी संगत मे था  जिसका नतीजा आज उसके साथ ऐसा हो रहा था |

 

कुछ दिन तक तो सब ठीक चलता रहा लेकिन एक दिन ऐसा आया जब श्याम के पास सब पैसे खतम हो चुके थे , श्याम ने सोचा क्यो न अब अपने दोस्तो से पैसे लिये जाए आखिर कार हम सब साथ मे रहते है और मैंने अपने दोस्तो की बहुत मदद भी की है |

यही सोच लेकर श्याम अपने दोस्तो के पास पैसे मांगने पहुंचा | श्याम के दोस्तो ने श्याम को पैसे देने से मना कर दिया |और बहाने मारने लगे |

यह वही दोस्त थे जो कल तक श्याम के पैसो से मजे करते थे | अब श्याम का उन लोगो से पैसे को लेकर बहस हो जाती है | बात इतनी बढ़ जाती है की सभी श्याम को वहाँ से मर कर निकाल देते है | 

आखिर कार श्याम उदास मन से मू लटकाए वहाँ से चला जाता है | श्याम इस बात को बहुत देर से समझा की ये लोग मेरा बस इस्तेमाल कर रहे थे | अब जैसे पैसा खतम हुआ तो लाट मार कर मुझे घर से निकाल दिया | 

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श्याम के पास खाने के भी पैसे नहीं थे | दो तीन दिन श्याम भिखारियों की तरह इधर उधर भटकता और कोई कुछ दे देता तो खा लेता |

इस तरह रूखा सूखा खा कर कही कोने मे सो जाता | अब श्याम को अपने पिता की याद आने लगी | अपने पिता की कही गई बातों को  सोच कर श्याम फूट फूट कर रोने लगा | उसे अपने भाई की नसीहते याद आने लगी |

खुद को श्याम कोसता हुआ कहता है – मैं  कितना अज्ञानी था जो इन दोस्तो के बहकावे मे आगया और  अपना घर घर छोड़ दिया |

इन दोस्तो ने मेरे दिमाग माय ऐसी बाते भर दी की मैं खुद अच्छे और बुरे मे फरक ही न कर पाया | बस अपनी अज्ञानता वश मे अपने पिता और भाई की बताई बातों को समझ ही न पाया |

 

श्याम बहुत कमजोर हो गया था | अब उसे अपने किए पर बहुत पछतावा हो रहा था | सोच रहा था की काश मैं अपने पिता और भाई की बात  मान लेता | मैं उन लोगो की बातों को समझ ही नहीं पाया | श्याम की आखो से पछतावे के रूप मे आसू  बाहर निकल रहे थे |

अब श्याम अपने घर वापिस जाने की सोचता है – की घर जा कर माफी मांग लूँगा | किसी तरफ फटे हाल श्याम घर पहुंचता है |

श्याम की हालत इतनी खराब थी की पिता जी और राम जैसे ही श्याम को देखते है पहचान ही नहीं पाते की यह कौन घर मे घुस आया है |

 

जब दोनों श्याम के करीब जाते है  तब पिता जी तुरंत श्याम को गले लगा लेते है | श्याम पछतावे के आसू लिए बिलख बिलख कर रोने लगता है और बोलता है पिता जी मुझे माफ कर दो | 

इधर राम और पिता जी की आखो मे भी आसू आजाते है | अब श्याम को समझ आगया था की हमेशा अपने बड़ो का कहना मानना चाहिए |

 

अब सब लोग साथ मिलकर रहने लगे | श्याम अब वही करता है जो उसके पिता जी और राम बोलते है | श्याम अब अपने पिता की खूब सेवा करता | सब लोग अब खुशी से अपना जीवन व्यतीत करते है |

 

 

 

शिक्षा – moral of 10 moral stories in hindi 

तो दोस्तों इस कहानी से हमे यह सीख मिलती है की परिवार मे  हमेशा अपने बड़ो का कहना मानो  हमेशा अपने बड़ो का आदर सम्मान करो |जो इंसान ऐसा नहीं करता उकसा श्याम जैसा ही हल होता है वो इंसान जीवन भर ठोकर खाता है |

भगवान भी ऐसे लोगो का साथ नहीं देता जो अपने माता पिता का आदर नहीं करता उनकी बात नहीं मानता | आखिर हमारे माता पिता हमे हमेशा हमारे अच्छे के लिए ही बोलते है समझाते है |

वो जीवन के बहुत तजुर्बेकार होते है हमे उनसे जीवन की अनमोल बातों को सीखना चाहिए |आप पढ़ रहे है -10 moral stories in hindi | रोचक कहानियाँ

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भिखारी की दो बाते  –शिक्षाप्रद कहानी 

10 hindi moral stories

 

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एक मीना नाम की औरत थी जो अपने पति के साथ शहर  मे रहती थी | उनका अपना घर था | मीना का एक बेटा था जिसका नाम था राहुल | रोज मीना सुबह उठ कर नहा धो कर अपने बेटे और पति के लिए नाश्ता तैयार करती | बेटा और पति नहा धो कर नाश्ता करते और तैयार हो कर बेटा अपने स्कूल चला जाता और पति अपने ऑफिस | 

 

इसके बाद एक भिखारी गेट के बाहर खड़ा हो कर बोलता – “कुछ खाने को दे दे माई ”  भिखारी बार बार यही बात दोहराता रहता जब तक मीना रोटी न दे देती |

भिखारी की आवाज सुन मीना दो रोटी लेकर आती और उस भिखारी को दे देती | फिर भिखारी रोटी ले कर जाते जाते बोलता – जैसा भी बुरा भला दूसरों के साथ करोगे वैसा ही फल तुम तक लौट के आ आएगा “|

 

इस तरह हर रोज होता –  भिखारी आता ! फिर मीना  रोटी लेकर जाती ! और  जाते जाते भिखारी वही दो बाते बोल कर चला जाता |

 

एक दिन पति और बेटा दोनों सो कर लेट उठते है | बेटा  जल्दी जल्दी मे तैयार होकर बिना कुछ खाए स्कूल चला जाता है |इधर पति भी जल्दी जल्दी मे ऑफिस के लिए तैयार होने लगता है | 

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पति को जब उसकी जुराबे नहीं मिलती तो पति ज़ोर से मीना को चिल्लाता है की कहाँ रख दी मेरी जुराब , मिल ही नहीं रही है |

इधर मीना किचन से भागते हुए आती है और जुराब अलमारी मे खोजती है जुराब नहीं मिल रही होती तो पति मीना पर गुस्सा होने लगता है की-  “याद नहीं रहता तुम्हें ” न जाने कहाँ कहाँ रख देती हो “

 

यह सुन इधर मीना भी गुस्सा हो जाती है और बोलती है –  एक तो लेट सो कर उठे हो और अब सुबह सुबह  मुझ पर मत चिल्लाओ |

दोनों की बहुत बहस होती है | आखिर कार जुराब मिल जाती है और पति बिना कुछ खाए गुस्से मे ऑफिस चला जाता है |

इधर पत्नी गुस्से मे तम तमाते हुए किचन मे बर्तन धोने चली जाती है | इतने मे वही भिखारी आता और बोलता है कुछ खाने को दे माई|

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यह सुन मीना मन ही मन बोलती है – आज कुछ नहीं दूँगी इसे जब देखो  रोज रोज चला आता है ऊपर से कोई ध्न्न्यवाद भी नहीं देता बस पता नहीं क्या क्या बोल कर चला जाता है |

कुछ देर मीना के बाहर न आने पर  भिखारी और ऊचा बोलना शुरू कर देता है जिससे मीना को और गुस्सा आता है | 

 

मीना के मन मे आता है क्यो न इसे जहर मिला कर दे दू रोटी मे , किस्सा ही खतम रोज रोज का  |

मीना रोटी मे जहर लगा देती है | और जैसे ही भिखारी को देने जाती है वह रुक जाती है उसको भिखारी पर रहम आजाता है और सोचती है यह मैं क्या करने जा रही थी ऐसे तो इस भिखारी की मौत हो जाती |

मीना तुरंत भागते हुए वापिस घर जाती है और दूसरी रोटी लाती है उस भिखारी को दे देती है | इधर भिखारी हमेशा की तरह रोटी लेकर अपनी वही दो बाते बोलता हुआ वहाँ से चला जाता है |

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मीना उस जहर वाली रोटी को चूल्हे पर रख कर आग से जला देती है |

मीना दिन का खाना बनाने की तैयारी शुरू कर देती है | मीना खाना बना लेती है | करीब 2 बज जाते है और  उसका बेटा राहुल अभी तक घर नहीं पहुंचा होता | मीना यह सोच परेशान हो जाती है की – एक तो  भूखे पेट स्कूल चला गया ऊपर से अब तक घर भी नहीं  पहुंचा |

 

 

मीना का दिल बहुत घबरा रहा था | इतने मे कोई दरवाजे पर दस्तक देता है | मीना जैसे ही दरवाजा खोलती है वह दंग रह जाती है |

 

मीना देखती है की उसका बेटा राहुल बहुत बुरी हालत मे | राहुल के कपड़े गंदे होते है और राहुल बहुत कमजोर दिख रहा होता है |मीना राहुल को पहले सोफ़े पर बैठती है और पानी पिलाती है| मीना पूछती है की बेटा यह  कैसे हुआ बेटा | 

तब बेटा बोलता है – माँ! मैं बहुत भूखा था जैसे ही स्कूल से घर आते हुए रास्ते मे मुझे चक्कर आगया था | माँ ! आज तो मैं मर ही गया होता अगर उस भिखारी ने मुझे वो रोटी खाने को न दी होती |

 

जब मैं  वहाँ रास्ते मे गिरा तो वहाँ कोई नहीं था कुछ देर बाद वहाँ वो भिखारी आया और मुझे उठाया बोलने लगा लो ये रोटी खा लो इस समय मुझसे जादा जरूरत तुम्हें है | उसने अपनी रोटी मुझे खिलाई और पानी पिलाया | तब जाकर कुछ जान मे जान आई माँ | 

 

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बेटे की यह बाते सुन मीना का तो सर चकरा गया | मीना खुद को किसी तरहा संभालती हुई रोने लगी और बेटे को सीने से लगा लिये फिर मन ही मन सोचने लगी

की आज मेरा बेटा उसी भिखारी की वजह से जिंदा है जिसे मैं आज वो  जहर वाली रोटी देने जा रही थी | यदि आज मैंने उसे वो रोटी दे दी होती तो वही रोटी वो मेरे बेटे को देता और मेरा बेटा मर जाता | इतना सोच मीना  रोने लगती है |

 

अब मीना को उस  भिखारी की बाते समझ आने लगती है की भिखारी जो बोलता था वो सही बात निकली |  “जैसा भी बुरा भला दूसरों के साथ करेंगे वैसा ही हम तक लौट के वापिस भी  आएगा “|

 

सीख – maral of  moral stories in hindi | शिक्षाप्रद कहानियाँ

तो देखा दोस्तो  इंसान जो भी करता है जैसा भी करता है उसे एक न एक दिन उसका फल मिलता ही मिलता है , सोचो अगर उसने आज भिखारी को वो जहर वाली रोटी दे दी होती तो आज उसका बेटा जिंदा न होता |

या फिर अगर भिखारी खुद वो जहर वाली रोटी खा लेता तो न तो वो भिखारी बचता और न ही भूख से तड़प रहा उसका बेटा राहुल बचता | तो देखा भगवान का न्याय जैसा करोगे वैसा भरोगे | 

हमेशा दूसरों का भला करो आपका भी भला होगा |

 

 

स्वागत है आपका top 10 hindi moral stories के इस रोचक सफर मे | इन दस कहानियों मे अलग अलग शिक्षाएँ(moral) छुपी हुई है जो आपको ईएसए ज्ञान प्रदान करती है जो आपको जीवन मे बहुत काम  आती है | इन शिक्षाप्रद कहानियों के माध्यम से हम आपको ऐसे ज्ञान से रुबारू करवाते है जिससे आपके जीवन की बहुत सी परेशानियाँ सुलझ जाती है |तो पढ़ते रहिए इन कहानियों को -धन्यवाद 

 

 

Hindi short stories with moral 

बहरा मेंढक 

 

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एक गाँव के बाहर  एक तालाब था |

उस तालाब मे बहुत से मेंढक रहा करते थे |  तालाब चारो तरफ से  रेतीली मिट्टी से घिरा हुआ था | तालाब मे बहुत से बड़े बड़े कमल के फूल खिले हुए थे |

सभी मेंढक उस कमल के पत्तों  पर उछल कूद किया करते , खूब मस्ती किया करते  ,कोई मेंढक उस पानी मे गोते लगता तो कोई एक पत्ते से दूसरे  पत्ते पर उछल कूद करता तो कोई पत्तों के नीचे छुप जाता तो दूसरे मेंढक उसको खोजने लगते |

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उन सभी मेंढको मे एक बहरा मेंढक भी था जिसे दूसरे मेंढको की कोई आवाज ही नहीं सुनाई देती थी | बहरा मेंढकजब भी दूसरे मेंढको को बोलता हुआ देखता तो यह सोचने लग जाता की यह मेंढक अपने होठ क्यो बार बार खोलते औए बंद करते रहते है | 

बिचारा बहरा मेंढक तालाब के पानी मे अपनी ही धुन मे मस्ती किया करता |

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उन सभी मेंढको मे एक बात यह थी की – जब भी कोई मेंढक उस तालाब मे कुछ नया करने की कोसिस करता तो बाकी के मेंढक उसको देखने लगते और जब वो मेंढक वो करने मे सफल हो जाता तो बाकी के मेंढक भी उसी मेंढक की तरह वो करतब करने लगते |

लेकिन जब कभी कोई मेंढक अपने नए करतब मे कामयाब न हो पता तो बाकी के मेंढक को बोल देता की यह बहुत मुश्किल है यह नहीं होगा |

 

मेंढक की यही बात बाकी  के मेंढको के दिमाग मे घुस जाती है इस वजह से बाकी के मेंढक उस करतब को करने का प्रयास ही नहीं करते |

और जो  मेंढक  थोड़ा बहुत प्रयास करता भी तो वो भी कुछ देर प्रयास करने के बाद हार  मान जाता क्योकि प्रयास कर रहे उन मेंढको को बार बार उस मेंढक की बात याद आजती की यह नहीं होगा | यह काम सच्च मे नामुमकिन  है 

एक बार तेज बारिश शुरू हुई , सभी मेंढक उस बारिश मे खूब मस्ती करने लगे सभी कमल के पत्तों के ऊपर आकार बैठ जाते और बारिश  की तेज बूंदों का आनंद लेते |

कुछ देर बाद बारिश बंद हो जाती है |  वही तालाब के एक दम किनारे पर एक पेड़ था  |

 

सभी मेंढक मस्ती करने के लिए उस पेड़ के पास पहुँच गए |  मेंढको के एक झुंड से एक मेंढक निकला और उस पेड़ पर चढना शुरू  कर दिया | हर बार की तरह बाकी के मेंढक उस प्रयास कर रहे मेंढक को टक टकी लगाए देख रहे थे |

दो तीन प्रयास के बाद वो मेंढक हार मान गया | इस  बार बाकी के मेंढको ने भी प्रयास कर के देखा | 

 

जो थक जाता वो बाकी के प्रयास कर रहे मेंढको को बार बार बोलता मत करो , कोई फाइदा नहीं , मत करो | मेंढको की यह बाते उन प्रयास कर रहे मेंढको के कान मे बार बार जा रही थी | नतीजा यह हुआ की सभी मेंढको ने हार मान ली |

 

अब इतने मे वो बहरा मेंढक उन सब को पेड़ पर चढ़ता देख कर तुरंत वहाँ  पहुंचा |

बहरा मेंढक भी पेड़ पर  चढना शुरू कर दिया | बहरा मेंढक को पेड़ पर बार बार प्रयास करता देख बाकी मेंढक उसे बोलने लगे की “मत कर कोई फाइदा नहीं ” हम सब  इतना प्रयास करके नहीं चढ़ पाए तो अब तुम किओ पागल हो रहे हो | हर मेंढक उस काने मेंढक को यही बात बार बार बोलते जा रहे थे |

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इन सब मेंढको की इन बातों का उस बहरा मेंढक पर कोई असर नहीं हो रहा था क्यो की वो तो बहरा  था उसे तो किसी की आवाज सुनाई ही नहीं दे रही थी | 

इसी वजह से उसके मन मे नकारात्मक विचार आए ही नही की वो नहीं कर पाएगा| उसे खुद पर विश्वास था की वो जरूर चढ़ पाएगा |

इस वजह से वो बहरा मेंढक बार बार उस पेड़ पर चढ़ने का प्रयास करता और फिर फिसल कर नीचे आजाता | कभी कभी तो  बहरा मेंढक काफी ऊपर तक चढ़ जाता लेकिन फिर फिसल जाता | 

 

इधर बहरा मेंढक के इस अथक प्रयास को देखते हुए बाकी के मेंढक उस पर हसने लगे और मज़ाक उड़ाने लगे | सभी मेंढक धीरे धीरे करके वहाँ से चले गए और अपनी मस्ती करने लगे |

 

इधर वो बहरा मेंढक हार नहीं मान रहा था क्यो की उस को खुद पर पूरा यकीन था की वो इस पेड़ पर चढ़ सकता है |  बहरा मेंढक प्रयास करते हुए बार बार सोचता की अगर इतना ऊपर तक चढ़ पा रहा हूँ तो एक न एक बार मैं वहाँ तक भी पहुच ही जाऊंगा बस थोड़ी कोशिश और कर लू | 

 

 बस अब उस बहरा मेंढक की यही बाते उसको पेड़ पर चढने के लिए प्रेरित करती रहती|  कुछ देर बाद बहरा मेंढक सचमुच मे अपने अथक प्रयास , से उस पेड़ पर आखिर कार चढ़  ही जाता है | शिखर पर पहुँचते ही बहरा मेंढक की खुशी का मानो ठिकाना ही नहीं रहता |

 

बहरा मेंढक अपनी बहे फैलता हुआ ज़ोर से चिल्लाता है – याह मैंने कर दिखाया | यह बोलता हुआ बहरा मेंढक जब नीचे देखता है तो सभी मेंढक  उसकी तरफ ही  आखे फाड़ फाड़ कर देख रहे होता है | 

 

इधर बहरा मेंढक को  पेड़  पर चढ़ा देख  सभी मेंढको की आखे फटी रह गई और मुह खुला रह गया | सभी मेंढको को मानो साप सूंघ हो |

 

दृश्य सच मे रोंगटे खड़े कर देने वाला था |

सभी मेंढक बस एक टक्क उस बहरा मेंढक की ओर ही देख रहे थे|  किसी को यकीन नहीं हो रहा था की यह इसने कर दिखाया | अब सभी मेंढक बोलने लगे यह कैसे हुआ ?

आखिर कैसे इसने असंभव कम को संभव कर दिखाया | हम लोग तो चढ़ ही नहीं पाए|  फिर सब मेंढको को समझ आता है की शायद हमने ठीक से प्रयास ही नहीं किया | कुछ देर प्रयास करने के बाद ही हार मान ली | 

 

बस फिर क्या था सभी मेंढक उस पेड़  की  तरफ दैड़ पड़े और पेड़ पर चढ़ने का प्रयास फिर से शुरू कर दिया  देखते ही देखते सभी मेंढक अपने अथक प्रयास से उस पेड़ पर चढ़ गए | क्यो की इस बार उन मेंढको कोई भी यह कहने वाला नहीं था की यह नामुमकिन है ” नहीं कर पाओगे ” 

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चलिये अब जानते हैं इस कहानी से हमे  क्या शिक्षा मिलती है –

शिक्षा – moral of hindi short stories with moral – बहरा  मेंढक

तो देखा दोस्तो कैसे एक बहरा मेंढक अपने अथक प्रयास , विश्वास, और बुलंद हौसलों  की बदौलत पेड़ पर चढ़ ही गया |  तो दोस्तो इस कहानी से हमे यह सीख मिलती है की असंभव कुछ भी नहीं (nothing is impossible)  अपनी अथक मेहनत , दृढ़ विश्वास और बार बार कोशिश से हर असंभव काम को संभव किया  सकता है | अपनी अथक मेहनत , दृढ़ विश्वास और बार बार कोशिश से एक दिन सफलता आपके कदम चूमती है |

 

इस कहानी से  दूसरी सीख यह मिलती है की  जब भी आप किसी कामयाबी को पाने के लिए बार बार कोशिश कर रहे हो  तब कभी दूसरों की नकारात्मक बातों पर ध्यान न दो  पूरे विश्वास और अपने अथक प्रयास से अपनी मंजिल को पाने मे जुट जाओ एक दिन सफलता आपके कदम चूमेगी| 

यदि मेंढक बहरा न होता और वो   बाकी मेंढको की बाते अगर सुनता तो  कभी भी सफल न हो  पाता| इस तरह आप भी उन लोगो की बातों को अनसुना कर दो जो बोलते है की तुमसे नहीं होगा कोई फाइदा नहीं  | 

 

लोगो की नकारात्मक बातों पर बिलकुल ध्यान न दें आप अपने काम मे पूरी ईमानदारी और विश्वास के साथ लगे रहे एक दिन कामयाबी जरूर मिलेगी 

 

 

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स्वागत है आपका top 10 hindi moral stories के इस रोचक सफर मे | इन दस कहानियों मे अलग अलग शिक्षाएँ(moral) छुपी हुई है जो आपको ईएसए ज्ञान प्रदान करती है जो आपको जीवन मे बहुत काम  आती है | इन शिक्षाप्रद कहानियों के माध्यम से हम आपको ऐसे ज्ञान से रुबारू करवाते है जिससे आपके जीवन की बहुत सी परेशानियाँ सुलझ जाती है |तो पढ़ते रहिए इन कहानियों को -धन्यवाद 

 

 

hindi short moral story for kids बुद्धिमान हंस 

एक छोटा सा गाँव था जिसमे 20 घर थे | उस गाँव मे एक घसियारा रहा करता था | गाँव के बगल मे एक जंगल था |घसियारा अक्सर उस जंगल मे आता  जाता रहता था | घसियारा उस जंगल से कभी लकड़ियां कट कर लाता तो कभी कोई छोटा मोटा जानवर पकड़ लाता और उसे पका कर खा जाता | घसियारे कभी पहले से मरे हुए जानवर नहीं खाते | 

 

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 उस जंगल मे  बहुत जादा हंस रहा करते थे | हंस अक्सर अपना ठिकाना ऊचे वृक्षो पर ही  बना कर रहते थे | एक वृक्ष पर 6 से 8 हंस रहा करते थे |  उन हंसो मे एक हंस बाकी हंसो से बहुत बुद्धिमान था |वह बुद्धिमान हंस बहुत बूढ़ा था |

 

वह बूढ़ा  हंस अक्सर उस घसियारे पर नजर रखता था | हंस ने एक बात समझ ली की यह घसियारा मरे हुए जानवर को अपने साथ नहीं ले जाता | short moral story in hindi बुद्धिमान हंस 

 

 

एक दिन वृक्ष पर जहां हंसो का ठिकाना था वही पर एक बेल निकल आई |

 

बूढ़े  हंस की नजर जब उस बेल पर गई तो उसने बाकी के हंसो से बोला की –  इस बेल को तुरंत काट दो वरना एक दिन यह बेल वृक्ष के नीचे तक फैल जाएगी और कोई शिकारी इस  बेल के सहारे वृक्ष पर चढ़ कर हमारा शिकार कर हमे मार देगा |

 

यह सुन बाकी के हंस बोले – अरे तुम बे वजह ही इतने चिंतित हो रहे हो , अभी यह बेल बहुत छोटी है तो इसे बढ़ने मे अभी बहुत समय लगेगा तब तक हम इस बेल को काट देंगे | 

 

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बूढ़ा हंस अब काफी कमजोर हो चुका था इसलिए वह चाह कर भी उस बेल को अपनी चोच से नहीं काट सकता था |

 

बूढ़ा  हंस फिर से बोला – नहीं नहीं ! इसे अभी काट दो वरना यह बेल अधिक बड़ी हो गई तो इस बेल को काटना  बहुत मुश्किल हो जाएगा | तब यह बेल नहीं कटेगी इसे अभी काट दो | वरना एक दिन यह बेल हमारी मौत का कारण बनेगी |

लेकिन कोई भी हंस उस बूढ़े हंस की बात सुनने को तैयार नहीं था | सब उस हंस की बात को मज़ाक मे ले रहे थे | समय बीतता गया और बेल एक दिन बहुत बड़ी हो गई |short moral story in hindi बुद्धिमान हंस 

 

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10 moral stories in hindi

एक दिन सभी हंस भोजन  की तलाश मे सुबह सुबह सूरज की  पहली किरण के साथ  वहाँ से चले गए |हंसो ने उड़ने के लिए जैसे ही पंख फड़फड़ाए थे तब उसी समय कुछ पंख टूट कर जमीन पर वृक्ष के नीचे जा गिरे |

इधर घसियारा हमेशा की तरहा उस जंगल से गुजर रहा था की अचानक घसियारे की नजर वृक्ष के नीचे गिरे सफ़ेद पंखो पर पड़ी| घसियारे ने पंख उठा कर देखा तो तुरंत समझ गया की यह तो हंस के पंख है | इतना बोलते हुए घसियारे ने वृक्ष के ऊपर नजर दौड़ाई तो देखा की यहाँ तो कोई हंस नहीं है |

 

घसियारा वृक्ष से लटक रही बेल के सहारे वृक्ष पर चढ़ा तो देखा की यह तो बहुत बड़ा घोसला है |

 

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 घसियारा समझ गया की इस वृक्ष पर बहुत सारे हंस रहते है शायद वो अभी काही बाहर गए होंगे खाने की तलाश मे | 

“घसियारे के मन मे एक ख्याल आता है की क्यों न सभी हंसो को एक साथ पकड़ लिया जाए” | 

इतना सोचते हुए घसियारा वृक्ष पर जाल बिछा देता है |

और कहता है – “जब सभी हंस शाम को यहाँ वापिस लौटेंगे तो वो सब मेरे इस जाल मे फंस जाएंगे |” फिर उन सब को घर ले जा कर उनका ताजा ताजा गोश खाऊँगा | 

 

इस तरह जल बिछाकर घसियारा वहाँ से चला जाता है और सुबह का इंतज़ार करता है |short moral story in hindi बुद्धिमान हंस 

 

इधर शाम होते ही जैसे ही सभी हंस वापिस अपने वृक्ष पर आते है तो सब  सभी हंस उस जाल मे बुरी तरह से फंस जाते है | सभी हंस बहुत कोशिश करते है उस जाल  से निकलने की लेकिन कोई भी उस जाल से नहीं निकल पाता|

तमाम कोशिशों के बाद  सब बूढ़े हंस से पूछते है की अब आप ही बताओ क्या किया जाए आप तो बहुत बुद्धिमान हो और तजुर्बेकार भी | 

बूढ़ा हंस उन सब को पहले बहुत गुस्सा करता है की –  मैंने पहले ही बोला था आप सब को  की इस बेल को काट दो | लेकिन कोई भी मेरी बात को नहीं समझा अब देखो नतीजा |  

बूढ़े हंस ड़ाट सुन कर सभी हंस खुद पर बहुत  शर्मिंदा होते है और बूढ़े हंस की कही हुई  पुरानी बातों को न मान कर अब   बहुत पछता रहे होते है | 

सभी हंस  बोलते है हमे माफ कर दो आज से हम आपकी हर बात मानेंगे  कृपया अभी इस जाल से बचने का कोई उपाय निकालो |

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तब हंस कुछ देर सोचता है  | कुछ देर सोचने के बाद हंस समझ जाता है की – हो न हो यह उस घसियारे का काम है क्योकि अक्सर वही इस जंगल मे आता जाता रहता था | short moral story in hindi बुद्धिमान हंस 

 

 

बूढ़ा हंस यह बात अच्छे से जानता था की वो घसियारा मरे हुए जानवर को नहीं ले जाता | 

 

तो एसे मे बूढ़े हंस के मन मे एक उपाय आया और वह बोला –   जिसने हमे इस जाल मे फासा है वही हमे इस जाल से निकालेगा|

बूढ़े हंस की यह बात सुन बाकी के हंस बोले की – यह आप क्या बोल रहे हो – भला वो हमे क्यो इस जाल से निकालेगा |

तब बूढ़ा हंस बोला – अब जैसा मैं कहता हूँ वैसा ही करो | कोई फालतू का अपना दिमाग नहीं चलाएगा वरना सब चौपट हो जाएगा |

मेरी बात ध्यान से सुनो ! सुबह जब वो घसियारा आएगा तब सब ने झूठ मूट का मरने का नाटक करना है | मतलब जैसे ही वो घसियारा वृक्ष पर चढ़ कर हमे देखने आए तो खुद को ऐसा दिखाना की वो हमे मारा हुआ समझे |

 

जब वो हमे मारा हुआ समझेगा तो उसी समय वो एक एक करके हंस को जाल से निकालने लगेगा | short moral story in hindi बुद्धिमान हंस 

 

 

फिर जैसे ही वो घसियारा सारे हंस को जाल से निकाल कर अलग कर देगा तब हम सब तुरंत वहाँ से उड़ जाएंगे|

लेकिन एक बात का खास ध्यान रहे !कोई भी हंस तब तक ये मरने का नाटक जारी रखेगा जब तब की वो घसियारा आखरी हंस को जाल से निकाल कर अलग न कर दे |

 

यदि किसी ने जरा सी भी गड़बड़ की तो हम सब मरे जाएंगे और यदि कोई  सिर्फ अपनी जान बचाने के चक्कर मे पहले ही उड़ा , तो घसियारा समझ जाएगा की बाकी के हंस भी जिंदा है तो वो बाकी के हंस को मार कर खा जाएगा |

 

इधर जैसे ही सुबह होती है वो घसियारा आजाता है | 

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अब सभी हंस  वैसा ही करते है जैसा बूढ़े हंस न कहा था | घसियारा जैसे ही वृक्ष से जाल को नीचे उतारता है तो वो  यह देख कर चौक जाता है  की सभी हंस मरे हुए है|

 

घसियारा बहुत निराश हो जाता है और फिए एक एक करके सभी हंसो को जाल से निकाल कर अलग करना शुरू कर देता है | जैसे ही सभी हंस जाल से अलग हो जाते है  तभी तुरंत सभी हंस  अपने पंख फड़फड़ाते हुए वहाँ से उड़ जाते है |

यह देख घसियारा अपना माथा पीटते हुए वहाँ से चला जाता है |

 

तो दोस्तो इस कहानी से हमे क्या शिक्षा मिलती है ? चलिये जानते है |

 

moral -शिक्षा – from this 10 moral story in hindi बुद्धिमान हंस 

इस कहानी से हमे सबसे पहली शिक्षा यह मिलती है की परिवार मे हमेशा अपने बड़े बुजुर्गों का कहना मानना चाहिए क्योकि उन्हे ज़िंदगी मे अच्छे बुरे का तजुर्बा हमसे कहीं अधिक होता है | बाकी आपने इस कहानी मे देख ही लिया की हंसो ने जब उस बूढ़े बुजुर्ग का कहना नहीं माना तो नतीजा क्या हुआ ?  

तो इसलिए हमेशा अपने परिवार मे बड़े बुजुर्गों का कहना मानो उनका और उनकी बाटो का सदैव सम्मान करो क्यो की वह अक्सर आपके हित और भले के लिए ही बोलते है |

 

 

इस कहानी से दूसरी शिक्षा यह मिलती है की यदि जिंदगी मे आपको पता लग जाए की यह चीज भविस्य मे हमारे लिए खतरा बनने वाली है तो उस चीज को नस्ट कर देना ही समझदारी होती है उसे कल के लिए मत छोड़ो उसी समय नस्ट कर दो | ताकि भविस्य मे आपको परेशानी न हो |

 

दोस्तों हमारी  हमेशा से यही कोशिश रहती है की हम  इस blog पर आपके लिए ज्ञान और शिक्षा  से भरी ऐसी ही तमाम कहानियाँ लाते रहे जिससे आपका ज्ञान बढ़ सके , बौद्धिक विकास हो सके ,जीवन मे सही फैसले ले सके , आप जीवन मे आगे बढ़ सके , मन मे सकरत्म्क विचारो का जन्म हो और  आपके सुंदर चरित्र का निर्माण हो ताकि आप आगे चल केआर सुंदर परिवार और समाज का निर्माण कर सके |

हम चाहते है की यह कहानियाँ जादा से जादा लोगो तक पहुंचे ताकी वह भी इसका पूरा लाभ उठा सके इसलिए आप इन कहानियों को social media की मदद से अपने सभी दोस्तों मे अवश्य शेयर करे | आ[का ये छोटा सा प्रयास कई लोगो की जिंदगी भी बदल सकता है |

 

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