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hindi moral stories मौजी साधू

moral stories in hindi (मॉरल स्टोरीज़ इन हिन्दी )- दोस्तों स्वागत है आपका धार्मिक  कहानियों की इस रोचक दुनिया मे | यहाँ पर आपको motivational stories के साथ साथ moral stories से मिलने वाले ज्ञान से रुबारू करवाया जाता है |

religious stories in hindi मे हम आपको धार्मिक ज्ञान से जुड़े  ऐसे तथ्यों से रूबरू करवाते है जिसके बारे मे बहुत कम लोग ही परिचित होते है |

आज कल इंटरनेट का जमाना है जिस वजह से किताबों का चलन अब इतना नहीं रहा  तो इस बात को ध्यान मे रखते हुए  हम उन्ही धार्मिक किताबों से   उस ज्ञान को उठा कर आप तक लेकर आए है |कुछ धार्मिक ज्ञान ऐसे होते है जिसे हम religious stories in hindi  की मदद से आप तक पहुंचाते है |

दोस्तो ऐसी ही हजारो शिक्षा प्रद , लोकप्रिय और रोचक कहानियों का सफर हम आप तक लेकर आए है जिन्हे लोगों ने बचपन मे अपने दादा दादी – या  नाना- नानी  से सुनी होती है या फिर टीवी मे देखी होती है |

लेकिन यहाँ पर आपको ऐसी बहुत सी शिक्षा प्रद , लोकप्रिय और रोचक कहानियाँ मिलेंगी जिसे शायद ही आपने कही सुनी होंगी |

तो पढ़ते रहिए ऐसी कहानियाँ और सीखते रहिए एक नई सीख  ,साथ मे ऐसी शिक्षा प्रद कहानियाँ  अपने दोस्तो को भी शेयर करते रहिए |

तो चलिये दोस्तो शुरू करते है हमारी आज की कहानी –

भगवान का न्याय -hindi moral stories 

 

कहानी पढ़ने से पहले यह ज़रूर पढ़े-

दोस्तो इससे पहले की मैं यह कहानी शुरू करू ! मैं बता दूँ की यह कहानी राजस्थान के एक साधू पर आधारित है,  जिसे एक कहानी के माध्यम से आपको बताया जा रहा है |

यह पूरी कहानी उसी साधू के इर्द गिर्द घूमती है | साधू का असली नाम क्या है यह कोई नहीं जनता था क्योंकि  खुद साधू से भी जब नाम पूछा जाता तो वह यही कह देता की मुझे नहीं पता |

वह साधू  “मौजी साधू”  के नाम से ही जाना जाता था क्योकि यह साधू अपनी ही धुन मे मगन रहता  था,

चाहे इन्हे कोई कुछ भी कहे यह किसी को भी पलट कर कुछ नहीं बोलते थे |

हमेशा खुश रहते जहां भी मन किया चले जाते , जहां भी मन किया सो जाते , भगवान का गुन गान करते रहते | खुश रहते | भगवान पर इनका अटूट विश्वास था|

इनके इसी तौर तरीको की वजह से  लोगो ने इनका नाम “मौजी साधू”  रख दिया था तब से  यही नाम प्रसिद्ध है और इसी नाम से जाने जाते है | यह कहानी साधू की  सच्ची घटना से संबन्धित है | तो चलिये कहानी शुरू करते |

 

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मौजी साधू ऐसे ही अपनी धुन मे मगन एक दिन दिल्ली शहर पहुँच जाते है | शाम का समय था , और काले बादलों  ने भी आसमान को ऐसा घेरा हुआ था की बस अभी मानो सारा पानी  उसी शहर मे बरस जाएगा | उधर साधू जी गुनगुनाते हुए अपनी मस्ती मे चले आरहे थे |

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इतने मे ज़ोर से बादलों के गरजने की आवाज़ आनी  शुरू हो जाती है फिर कुछ ही देर बाद ठंडी हवाए चलनी शुरू हो जाती है जिस वजह से मौसम काफी  ठंडा हो जाता है | फिर कुछ ही देर बाद बारिश की बूंदे ज़मीन पर अपनी दस्तका  दे देती है |

इधर मौजी साधू  एक बाज़ार मे पहुँच जाते है ,  बाज़ार मे सभी लोग बारिश की बूंदों से खुद को  बचते बचाते  आस पास की दुकानों मे शरण ले लेते है और बारिश के निकल जाने का इंतज़ार करते है | उधर हमारे मौजी साधू   जी  अपनी ही धुन मे मगन खुले आसमान के नीचे हाथ फैलाए बारिश की बूंदों का आनंद उठा रहे होते है 

मौजी साधू  का जब मन भर गया तो एक दुकान के बाहर खड़े हो गए |

अब वहाँ खाने पीने की इतनी सारी दुकाने थी की वहाँ से बन रहे  स्वादिस्ट पकवानों की खुशबू मौजी साधू   के नाक से  होती हुई पेट तक पहुँच जाती है मौजी साधू  की भूख इस कदर बाहर आती  है मानो उन पकवानो मे डूब ही जाए |

पर साधू के पास पैसे तो थे नहीं,  इसलिए एक टक टकी  लगाए  सामने की दुकान पर पकवानो की तरफ देखें जा  रहे  थे.. जहां जलेबियाँ तली जा रही थी और दूध खौलाया जा रहा था | इतने मे बारिश  भी थम जाती है |hindi moral stories

 

उधर जलेबी बना रहे आदमी की नज़र भी उस साधू पर जाती है  | अब साधु और जलेबी बना रहे आदमी के  बीच  देखा  देखि का  यह सिन्सिला  लगभग 20 मिनट  तक चलता रहता  है |hindi moral stories

उधर अब जलेबी वाला आदमी समझ जाता है की साधू भूखा है और उसके पास पैसे भी नहीं है | इसीलिए यहाँ आने मे कतरा रहा है.. 

जलेबी वाला आदमी  मौजी साधू को अपने हाथ का इशारा करके अपनी दुकान मे आने का इशरा करता है |   इशारा देख साधू  तुरंत उठ कर  दुकान मे आदमी के पास चला जाता है |hindi moral stories

दुकानदार साधू को कुछ देर रुकने का इशारा करता है मौजी साधू वहीं ज़मीन पर बैठ जाता है | दुकान दार  अपने हाथो  मे कुछ  जलेबी और मिट्टी से बने गिलास मे गरम गरम  दूध लिए  साधू के पास आता है  और सब साधू के हाथो मे रख देता है |

यह देख  मौजी साधू उस दुकान दार को  खूब सारी दुआएं देने लगता है | दुकान दार खुश होकर वहाँ से चला जाता है |hindi moral stories

मौजी साधू  दूध पीता है और हाथ मे जलेबी लिए मस्ती से खाते हुए अपनी ही धुन मे रास्ते पर निकल पड़ता है |

कुछ ही दूर एक नई शादी का  जोड़ा यानि पति पत्नी   वहाँ से गुज़र रहे थे  | बारिश की वजह से सड़को पर कुछ कुछ जगह पर पानी  रुका हुआ था| hindi moral stories

इधर साधू अपनी  धुन मे मगन हाथो मे जलेबी लिए  खाता हुआ चला जा रहा था की साधू का पैर  जैसे ही सड़क पर रुके पानी पर  पड़ता है पानी के खूब सारे छींटे  ज़ोर से उछल कर उस आदमी की पत्नी के कपड़ो पर जा गिरता है |

 

उधर बिचारा मौजी साधू  इन सब घटना  से अनजान अपनी ही धुन मे आगे बढा चला जा रहा था | 

यह देख पति को ज़ोर दार गुस्सा आया और मौजी साधू का गिरेबान पकड़ कर ज़ोर दार तमाचा मौजी साधू  के मुंह पर धर  दिया |

 

बेचारे साधू की जलेबियाँ भी नीचे गिर चुकी थी |

इधर  साधू हक्का बक्का रह  गया की मारा क्यों मेरा कसूर क्या था |

आदमी बोला तेरी इतनी हिम्मत मेरी पत्नी के महंगे कपड़ो पर गंदा पानी उछालता है | 

और बेशर्मी  तो देखो इस साधु की… ये सब करने बाद भी कैसे मजे से चला जा  रहा है.

इतना बोलते हुए फिर से साधू के सर पर मारता है  और उसे नीचे गिरा देता है फिर वहाँ से चला जाता है |hindi moral story

इधर साधू  बिना कोई प्रतिकृया दिखाए बस आसमान की तरफ देखता है और बोलता है वाह मालिक एक पल की खुशी दी और छीन भी ली सब जलेबियाँ ज़मीन मे गिर गई |

इतना बोल कर साधु फिर से खुश हो जाता और हसते हुए बोलता है सब तेरी माया प्रभु.. …|

इतना बोलकर फिर से मौजी साधू  अपनी धुन मे मगन आगे बढ़  जाता है |…

दोस्तों  हम इस दुनिया मे जो भी करते है चाहे वो अच्छा हो या बुरा भगवान हर कर्म का  हिसाब अपने पास रखता है | क्यों की भगवान सब देखते है | तो आप ही बताओ उस साधू की आखिर क्या गलती थी जो भी हुआ था वो अनजाने मे हुआ था साधू ने जान बूझ कर तो पानी नहीं मारा था |

और यह बात वहाँ हर कोई जानता था | साधू को मारने वाला इंसान भी यह बात जानता था की कोई जानबूझ कर तो नहीं करेगा |

लेकिन  फिर भी एक बदले की आग और गुस्से से भरे दिमाग के आगे उसने कुछ सोचा न समझा और अपनी ताकत के घमंड मे चूर उस साधू इंसान को मारा पीटा गाली  दी और नीचे गिरा दिया |

उधर उसकी पत्नी भी पति का साथ देती रही | साधू चाहता तो उसका जवाब दे सकता था | लेकिन वह जानता था भगवान ज़रूर न्याय करेंगे | 

तो चलिये जानते है फिर आगे क्या हुआ 

 

साधु पर हाथ उठाने वाले आदमी जा नाम प्रताप ठाकुर था..

उस घटना के  ठीक दो दिन बाद प्रताप ठाकुर  ऑफिस के लिए तैयार होकर घर से बाहर निकला |

प्रताप  कुछ दूर ही जाता है  की अचानक एक तेज़ रफ्तार कार जगह कम होने की वजह से प्रताप को हल्का सा  छूते हुए निकल जाती है |

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जिस वजह से प्रताप  का बैलेंस बिगड़ जाता है और खुद को गिरने से बचाते बचाते वो  बगल से आरही एक साइकल वाले के ऊपर गिर जाता है |

इस प्रकार दोनों ही  नीचे गिर जाते है ठीक उसी समय साइकल वाले के पीछे से आरहा स्कूटर का टायर प्रताप  के दाएँ हाथ पर चढ़ जाता है |

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जिस वजह से उसके दाएँ हाथ की हड्डी क्रेक हो जाती है | दर्द के मारे वह प्रताप  चिल्ला उठता है |

वहां मौजूद लोग प्रताप की यह  हालत देख, उसे तुरंत  बगल के हॉस्पिटल मे पंहुचा देते है |

इधर प्रताप पत्नी को जैसे ही इस घटना  का पता चलता है वह भी अपने पति के पास पहुँच जाती है |

पति की ऐसी हालत देख पत्नी ज़ोर ज़ोर से रोने लगती है | बार बार पूछती है की यह सब कैसे हुआ | इधर पति जैसे ही कुछ बोलने की कोसिस करता है उसकी आवाज़  गले से बाहर ही नहीं निकलती | आवाज़ न निकाल पाने से पति के शरीर मे उलझन सी होने लगती है |

यह देख पत्नी पति से सर को सहलाती है और पूछती है क्या हुआ आप कुछ बोल क्यों नहीं रहे | पत्नी तुरंत डॉक्टर को बुलाकर लेकर आती है |

डॉक्टर पति के गले को चेक करता है चेक करने पर पता चलता है की ग्ले की वोकल नस मे सूजन आगाई है | पत्नी पूछती है डॉक्टर साहब यह कैसे हुआ |moral stories in hindi 

डॉक्टर बोलते है की शायद  एक्सीडेंट की वजह से जब इनकी हड्डी क्रैक हुई थी तब  तेज़ दर्द की वजह से ये खूब ज़ोर से चिल्लाए होंगे जिस वजह से इनके गले की नसो मे सूजन आगाई है वोकल पोइण्ट सूज गया है इसे ठीक होने मे महीना लग जाएगा | डॉक्टर पति को बोलता है की आप बोलने की कोसिस न करे वरना यह ठीक नहीं हो पाएगा |moral stories in hindi 

 

दोस्तों यह  उस आदमी को उसके किए गए पाप की सज़ा थी जो पाप  या कर्म उसने गुस्से और ताकत के घमंड मे उस बेगुनाह साधू  पर किया था | 

 

अब आप लोग बोलोगे की यह कोई ज़रूरी तो नहीं  यह महज एक इक़्त्फ़ाक भी तो हो सकता है | और हम कैसे मान  ले की यह उसके पापों की सज़ा है |

 

तो चलो आपके इस सवाल का जवाब भी दे देता हु –

जिस स्थान पर प्रताप का एक्सीडेंट हुआ था  ,  यह वही स्थान था जिस स्थान पर उस आदमी ने मौजी साधू को मारा था |

जिस हाथ से उस आदमी ने मौजी साधू   को मारा था उसका  वही हाथ एक्सीडेंट मे  फ़ेक्चर हुआ  |  उसने  मौजी साधू को  गाली दी थी इसी वजह से उसकी आवाज़ भी चली गई | उसने मौजी साधू को नीचे गिरा दिया था ठीक उसी प्रकार वह आदमी भी नीचे गिरा |

तो दोस्तो कुछ समझे या नहीं, की इतने सारे इक्त्फ़ाक एक साथ नहीं हुआ करते | यह उस भगवान का अपने भक्त के प्रति न्याय था जिस पर उस आदमी ने अत्याचार किया अन्याय किया था |

इस hindi moral stories से सीख 

कुल मिलाकर  हमे इस कहानी से यह सीख मिलती है की बिना ठीक से जाने समझें प्रतिक्रिया ना करें, अपने गुस्से को  काबू मे रखना सीखे,  बुरे कर्मो का अंजाम बुरा ही होता है. 

दोस्तों हमारी  हमेशा से यही कोशिश रहती है की हम  इस blog पर आपके लिए ज्ञान और शिक्षा  से भरी ऐसी ही तमाम कहानियाँ लाते रहे जिससे आपका ज्ञान बढ़ सके , बौद्धिक विकास हो सके ,जीवन मे सही फैसले ले सके , आप जीवन मे आगे बढ़ सके , मन मे सकरत्म्क विचारो का जन्म हो और  आपके सुंदर चरित्र का निर्माण हो ताकि आप आगे चल केआर सुंदर परिवार और समाज का निर्माण कर सके |

हम चाहते है की यह कहानियाँ जादा से जादा लोगो तक पहुंचे ताकी वह भी इसका पूरा लाभ उठा सके इसलिए आप इन कहानियों को social media की मदद से अपने सभी दोस्तों मे अवश्य शेयर करे | आ[का ये छोटा सा प्रयास कई लोगो की जिंदगी भी बदल सकता है |

 

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