page contents
Hindi-moral-story-guru-dakshina

Hindi Moral story guru dakshina

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका आज एक और शिक्षाप्रद नैतिक कहानी hindi moral story guru dakshina मे.

Hindi moral story guru dakshina

Hindi-moral-story-guru-dakshina

एक ऋषि थे! बहुत ही ज्ञान, तपस्वी और विख्यात. दूर दूर से लोग उनसे शिक्षा ग्रहण करने आते थे. एक बार एक राजकुमार भी इनसे शिक्षा प्राप्त करने आया

 

राजकुमार ने बहुत मन लगा कर गतान अर्जन किया. एक दिन ज़ब शिक्षा पूर्ण हुई तो ऋषि ने उस राजकुमार से कहा :- जाओ वर्ष! अब तुम्हारी शिक्षा पूर्ण हुई. अब इस शिक्षा का उपयोग करके तुम अपने और दूसरों के जीवन को बेहतर बनाओ, एक अच्छे समाज का निर्माण करो लोगो को सही रह दिखाओ.

राजकुमार ने ज़ब उन्हें गुरु दक्षिणा देनी चाही तो गुरु ने कहा :- अगर तुम मुझे गुरु दक्षिणा के रूप मे कुछ देना ही चाहते हों तो जाओ! और मुझे वो चीज खोज कर दो जो पूर्ण रूप से व्यर्थ है.

इस पर राजकुमार मन ही मन सोचने लगे क़ी गुरु जी अगर मांगते तो मै उन्हें कुछ भी दें सकता था किन्तु ये गुरु ने क्या मांग लिया ये तो बिलकुल मामूली और आसान चीज है गुरु दक्षिणा के लिये. 

 

आस पास कितना कुछ व्यर्थ है मै कितना कुछ गुरु को दें सकता हु. राजकुमार क़ी नजरें मिट्टी क़ी ओर जा टिकी.

 

अब राजकुमार ने जैसे ही मिट्टी उठाने के लिये अपने हाथ मिट्टी क़ी ओर बढाए उसी समय मिट्टी बोल उठी :- “ठहर जा मनुष्य! ये तू क्या कर रहा है? मुझे व्यर्थ समझने क़ी भूल मत करो, तुम्हारे ख़ाने पीने से लेकर बहुमूल्य धातुओं को बनाने मे मेरा बड़ा योगदान है.

तुम्हारे तन पर ये वस्त्र, हवा मे फैली सुगंध और जीवित रहने के लिये फल, अनाज सब मुझसे ही जन्म लेते है उन सब क़ी बुनियाद मै ही हूं.

 

मिट्टी क़ी बात सुनकर राजकुमार सोच मे पड़ गया और फिर वो आगे बढ़ गया.

 

वो थोड़ी ही दूर गया था,उसने देखा क़ी! एक स्थान पर बहुत गंदगी फैली हुई है गंदगी का एक बड़ा ढेर लगा हुआ है. यह देख राजकुमार ने सोचा क़ी इससे व्यर्थ तो कुछ हों ही नहीं सकता.यह सब पूर्णतः व्यर्थ है.

 

इतना सोच ज़ब राजकुमार ने कचरे के ढेर क़ी ओर अपना हाथ बढाया तो उसमे से आवाज़ आई .

रुको मानव! तुम भला मुझे व्यर्थ कैसे समझ सकते हों. क्या तुम भूल गए क़ी मिट्टी को पोषित करने वाली खाद मुझि से ही बनती है. मिट्टी मे मौजूद पोषक तत्त्व क़ी वजह से ही फसलों मे ताकत अति है वो विकसित होते है.

 

राजकुमार फिर से सोच मे पड़ गया और मन ही मन मुस्कराने लगा.

 

तभी राजकुमार को गुरु का दिया हुआ आखरी सबक उसे समझ आगया था क़ी व्यर्थ तो वह है जो दूसरों को व्यर्थ और तुच्छ समझता है. अतः मनुष्य के अंदर बैठा उसका अहंकार ही सबसे व्यर्थ चीज है.

राजकुमार भागता हु अपने गुरु के पास आया और बोला – गुरुवर मै अपना अहंकार आपके चरणों मे रखता हूं.आप मुझे आशीर्वाद दीजिये क़ी हम आपके द्वारा प्राप्त ज्ञान को मै प्रजा क़ी सेवा मे लगा सकू, लोगो क़ी मदद कर सकू.

 

गुरु बहुत प्रसन्न हुए क्योंजी उनके शिष्य क़ी शिक्षा अब पूर्ण हों चुकी थी.

 

Hindi morsl story guru dakshina कहानी से सीख.

जी हाँ दोस्तों, इंसान के अंदर उसका अहंकार ही सबसे व्यर्थ चीजों मे एक है.अहंकार जितना बढ़ता जाता है मनुष्य के गुण उतने ही नष्ट होते जाते है.

अहंकार मे तीन गए, धन यश,गौरव वैभव और वंश, ना मानो तो देख लो रावण,कौरव,और कंस.

उम्मीद करता हूं hindi moral story guru dakshina से आपको आज अनमोल सीख मिली होगी.

इस नैतिक कहानी को सभी लोगो मे शेयर जरूर करें ताकी हमारा इस तरह क़ी कहानियाँ लिखने का मकसद सार्थक हों सके.

इन्हे भी जरूर पढे

ज्ञान व शिक्षा से भरी अद्भुत कहानियाँ

बच्चो के लिए बेहद ज्ञान सी भारी कहानियां जरूर पढे 👇

रोचक और प्रेरणादायक कहानियाँ

 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

chanakya niti ki anmol bate | चाणक्य शस्त्र Chanakya niti | झूठ बोलने वाली पत्नी chanakya niti | इन बातों को समझ गए तो रिश्ते कभी खराब नहीं होंगे chanakya niti hindi me chanakya niti | chanakya golden thoughts chanakya niti | life change quotes chanakya niti | इन 5 परिस्थितियों मे हमेशा चुप रहो chanakya niti | life change thoughts chanakya niti | चाणक्य के अनमोल वचन chanakya thoughts for life