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humanity best Hindi moral story

हमारी आज की कहानी humanity best Hindi moral story  पर आधारित है | उम्मीद करता हूँ आज इस कहानी को पढ़ने के बाद आपकी इंसानियत अंदर से जाग उठेगी | हम अपने इस ब्लॉग पर अक्सर ज्ञान से भरी ऐसी कहानियाँ  (moral stories) लाते  रहते है  जो मन के विकास और सुंदर चरित्र निर्माण मे बहुत बड़ी भूमिका निभाते है |

 

निःस्वार्थ मदद moral story  | humanity best Hindi moral story 

सिर्फ 4मिनट  मे,  आज मैं जिस घटना का जिक्र आपसे करने जा रहा हूं वो आपको मजबूर कर देगी रिश्ते नातो से ऊपर उठकर किसी की भी निःस्वार्थ भाव मदद करने के लिए. 

ये घटना है एक लाचार बूढ़े माँ बाप की.  रात के 11 बजे थे अचानक घर की घंटी बजी. रवि चौक गया,सोचने लगा  इतनी रात को कौन आया,

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 दरवाज़ा खोल कर घर के बाहर आया तो देखता है की सामने एक वृद्ध सज्जन पुरुष खड़े है.और हांफ रहे है. पीछे Get पर ऑटो वाला खड़ा था ऑटो मे उस बूढ़े व्यक्ति का समान था. 

उन सज्जन ने रवि से पूछा की बेटा आपका नाम क्या है.?  वो बोला अंकल मेरा नाम रवि है. 

इतना सुन बृद्ध व्यक्ति बोला की हे भगवान तेरा लाख लाख शुक्र है  ये घर मिला गया. 

रवि को कुछ समझ नहीं  आया, उस बूढ़े व्यक्ति ने कहा की बेटा पानी मिलेगा. रवि बोला की आइये आप अंदर आजइये. 

तो अंदर पानी वगैरा पिलाया. पानी पीने के बाद उस बूढ़े व्यक्ति ने रवि के हाथ मे एक चिट्ठी दी.  रवि ने उस चिठ्ठी को खोला और पढ़ा. 

चिट्ठी पढ़ने के बाद रवि तेज़ी से बाहर जाकर ऑटो से उस वृद्ध का समान घर लें आता है. 

रवि बोलता है अंकल रात बहुत हो गई है आप ऐसा करिये भोजन कर लीजिये और सो जाइये कल आराम से बात करते है. मै आपका काम कल सुबह कर दूंगा. 

उस चिठ्ठी मे रवि के पिता ने रवि के लिए कुछ लिखा था, और वृद्ध सज्जन ने कहा की आपके पिता ने मुझे भरोसा दिलाया की मेरा बेटा आपका काम कर देगा आप बेफिक्र होकर इस चिट्ठी को लें कर बेटे रवि के पास चले जाओ रवि निवास का घर पूछ लेना वहाँ.  और ये चिट्ठी उसे दे देना. 

अब माजरा ये था की उस वृद्ध के एक मात्र बेटे का अचानक  एक सड़क दुर्घटना मे देहांत हो गया था. 

बूढ़े बुढ़िया घर पर अब अकेले रह गए थे और ऐसे मे रोजी रोटी की दिक्क़त होने लगी थीं. दैनिक जीवन के खर्चो की दिक्क़त होने लगी थीं. लेकिन वो नहीं चाहते थे की अपने बेटे की मृत्यु का कामंपसेशन लेकर अपना पेट भरे. 

लेकिन मजबूरी वश हालात ऐसे बन गए थे की कामंपसेशन लेने के इलावा कोई और रास्ता भी नजर नहीं आरहा था. आखिर बूढ़े थे करते भी क्या. 

तब जानकारी जुटा कर उनको पता चला की इसके लिए उन्हें दिल्ली जाकर कुछ दस्तावेज़ सर्टिफाई करवाना पड़ेगा. 

लेकिन अब  दिक्क़त यहां पर ये थीं वो जीवन मे कभी ऐसे काम के लिए गांव से बाहर निकले नहीं थे तो ऐसे मे तो दिल्ली उनके लिए एक बहुत अंजनी और चुनौती भरी जगह थीं. 

 

इतने मे उनको अपने मालिक की याद आई वो मदद के लिए उनके पास गए.

 तब उनके मालिक ने एक चिट्ठी लिख कर उस बूढ़े व्यक्ति के हाथो मे थमाते हुए बोले की जाओ इस चिट्ठी को लेकर मेरे बेटे के पास.

 आप का काम हो जाएगा. 

 अगले दिन अंकल उठे तो रवि ने उनको बढ़िया से नाश्ता वगैरा सब करवा के अपनी गाड़ी मै बैठाया. रवि ने ऑफिस से छुट्टी ली. 

रवि उस दफ्तर मे गया जहाँ से उन कागज़ात को वेरिफाई करवाना था. खूब मशक्क्त के बाद बूढ़े आदमी के साइन वगैरा सब करवा के काम फाइनल किया गया. 

रवि ने उन वृद्ध को बस स्टॉप तक छोड़ा और ज़ब जाने का टाइम आया तभी वो बूढ़ा व्यक्ति हाथ जोड़ कर  बड़े भावुक भरे शब्दों से  बोला, बेटा तुम्हारे माता पिता धन्य है जिन्हे तुम्हारी जैसी संतान मिली. 

माता पिता के लिए कुछ कहना चाहते हो क्या, मै तुम्हारे पिता तक वो बात पंहुचा दूंगा. 

तो अब वो रवि जाते जाते कहता है माफ कीजियेगा अंकल मै आप से एक बात कहना चाहता हूं. 

 अंकल,  मै रवि नहीं हूं. 

ये सुन, बूढ़ा अचरज भरे मन से धीमी सि आवाज़ मे बोला, क्या ! रवि नहीं हो……..  लेकिन  बेटा तुम्हारे घर के बाहर तो रवि निवास लिखा था. 

 

रवि बोला, हाँ वहाँ रवि निवास ही लिखा है लेकिन मै वो रवि नहीं हूं जिसके घर आपको भेजा गया था. जिसे खोजते हुए आप आए थे. 

 

अब वो बूढ़ा व्यक्ति बड़े अचरज मे पड़ गया, और बोला अरे ऐसा क्यों बोल रहे हो मै कुछ समझ नहीं पा रहा. 

 

तब रवि बोला, अंकल ज़ब आप उस दिन रात को मेरे घर पहुचे थे. आप हांफ रहे थे और आपकी आँखो मे बहुत उम्मीद थीं की उनका बेटा मदद करेगा,  तो ज़ब मैंने वो चिट्ठी पढ़ी तो मुझे,  मेरे पिता का ध्यान आगया जिनके लिए मै जीवन भर कुछ नहीं कर पाया. 

 

उस चिट्ठी मे रवि का फोन नंबर लिखा था मैंने फोन किया और सारी बात उस रवि को बताई तो उसने मुझसे आग्रह किया की मै कम्पनी मे हूं और  मुझे यहां 10 दिन प्रोजेक्ट फाइनल करना है इसलिए मेरा आना बहुत मुश्किल है  इतने मे फोन कट गया. 

 

लेकिन अंकल आप इतनी उम्मीद से आए थे, आपके हालात, और आपके भावुकता भरे शब्दों ने मुझे अंतर्मन तक हिला दिया मै खुद को रोक नहीं पाया आपकी मदद करने को. 

 

क्योंकि मेरा जमीर इस बात की कतई इज़ाज़त नहीं दे रहा  था की आपको उस समय सच्चाई बता दू. 

 

उस वृद्ध व्यक्ति के आँखो से आंसू बह निकले | आंसू पोछते हुए बोले की तुम रवि को जानते भी नहीं हो रवि बोला की नहीं मै नहीं जानता आपकी चिट्ठी मे फोन नंबर था बस उसी को लगाया.

 

अंकल बोला तुम वो रवि भी नहीं हो और फिर भी मेरे लिए छुट्टी ली और दिन भर इतनी मशक्क्त उठाई. इतना कुछ कर डाला. 

“कौन कहते है भगवान नहीं होते 3” बार ये शब्द दोहराते हुए अंकल बस मे बैठ कर चले गए. 

और रवि  ज़ब अपने घर पंहुचा तो रवि को  उस दिन अपने जीवन की सबसे बड़ी ख़ुशी और अद्भुत सुकून का अनुभव हुआ. 

 

humanity best Hindi moral story से सीख 

इस कहानी से हमे सीख मिलती है की  दुनियां मे जिसे देखो बस  अपने रिश्तेदारों की मदद करता है हद से हद अपने दोस्त की और अपने स्टॉफ की कर देता है बस कुल मिलाकर अपना होना चाहिए. और इतना करके  उसे लगता है की उसने बहुत बड़ा तीर मार लिया बहुत बड़ा पुण्य कमा लिया है. मदद करनी अच्छी बात है…..लेकिन सिर्फ अपनों की क्यों?  मदद मै कैसा भेद भाव…?  

कोई तो स्वार्थ है जो सिर्फ अपनों की ही मदद करता है. 

लड़के ने लड़की फसा रखी इम्प्रेस करने के लिए लुटाए जा रहा है… अंकल ने आंटी फसा रखी और लुटाए जा रहा बेहिसाब. कोई तो स्वार्थ होगा. 

यानी आदमी और रिश्ता देख कर मदद के नाम पर पैसा लुटा दिया जाता है. और वही ग़र कोई दूसरा अपरिचित गरीब इंसान  मदद की गुहार करें तो उसे 100 ₹ देने के लिए साला हज़ार बार सोचते है इसकी मदद करके साला मिलेगा क्या…..

 

बस आगया ना स्वार्थ, निःस्वार्थ बनो… निःस्वार्थ मदद करो.. इसलिए करो की कल को आप बच्चो से आँखे मिलाकर गर्व से यह कह सको की मै स्वार्थी नहीं हूं.  आपके बच्चे आपके कर्मो से प्रेरित होकर एक सुंदर समाज का निर्माण कर सकें. 

 

इसलिए मदद करो की आप सुकून की नींद सो सको. ये सोच कर निःस्वार्थ मदद कर दिया करो की ईश्वर ने आपको देने वालों मे रखा है मांगने वालो मे नहीं

निःस्वार्थ सेवा की ये इन्वेस्टमेंट जीवन भर आपको  सुख समृद्धि का रिटन्स देती रहेगी. 

मै चाहता हूँ की ये  humanity best Hindi moral story  हर इंसान  तक पहुंचनी चाहिए ताकी वह भी इस कहानी को पढ़ कर समाज के प्रति एक अच्छे इंसान होने का रोल समझ सके |

 

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