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new moral story निर्दोष को सजा

new moral story निर्दोष को सजा – दोस्तों स्वागत है आपका किस्से कहानियों इस रोचक दुनिया मे | यहाँ पर आपको motivational stories के साथ moral stories से मिलने वाले ज्ञान से रुबारू करवाया जाता है |

हमारी आज की कहानी है new moral story निर्दोष को सजा |  दोस्तो इन कहानियों का जीवन मे बहुत महत्त्व होता है | क्योकि  इन कहानियों के माध्यम से  अक्सर हमे  कुछ ऐसा ज्ञान  हासिल हो जाता है जो हमारे जीवन की तमाम परेशानियों को खत्म कर देता है |

यहाँ पर बताई गई हर कहानी मे ज्ञान और शिक्षा छिपी हुई है | तो पढ़ते रहिए इन ज्ञान से भरी इन कहानियों (stories) को

new moral story निर्दोष को सजा

बहुत समय पहले हरिशंकर नाम का एक राजा था। उसके तीन पुत्र थे और अपने उन तीनों पुत्रों में से वह किसी एक पुत्र को राजगद्दी सौंपना चाहता था।

पर राज गद्दी तीनो मे से किस पुत्र को सौपी जाए ये एक बड़ी समस्या थी ?

राजा ने सोचा इन तीनो की परीक्षा ली जाए.

राजा ने एक तरकीब निकाली और उसने तीनो पुत्रों को बुलाकर कहा – अगर तुम्हारे सामने कोई अपराधी खड़ा हो तो तुम उसे क्या सजा दोगे?

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पहले राजकुमार ने कहा कि अपराधी को मौत की सजा दी जाए तो दूसरे ने कहा कि अपराधी को काल कोठरी में बंद कर दिया जाये। अब तीसरे राजकुमार की बारी आई तो उसने कहा कि पिताजी सबसे पहले यह देख लिया जाये कि उसने गलती की भी है या नहीं। बिना सच्चाई का पता लगाए हालातों और सुनी सुनाई बातो की बुनियाद पर किसी किसी को दोषी करार देना पाप होगा.

 

अगर कोई दोषी है तो उसे किस प्रकार की सजा दी जानी चाहिए ये उसके द्वारा किये गए अपराध पर निर्भर करता है.

 

इसके बाद उस राजकुमार ने एक कहानी सुनाई – किसी राज्य में राजा हुआ करता था, उसके पास एक सुन्दर सा तोता था|

 

वह तोता बड़ा बुद्धिमान था, उसकी मीठी वाणी और बुद्धिमत्ता की वजह से राजा उससे बहुत खुश रहता था।

 

एक दिन की बात है कि तोते ने राजा से कहा कि मैं अपने माता-पिता के पास जाना चाहता हूँ। वह जाने के लिए राजा से विनती करने लगा।

 

तब राजा ने उससे कहा कि ठीक है पर तुम्हें पांच दिनों में वापस आना होगा। वह तोता जंगल की ओर उड़ चला, अपने माता- पिता से जंगल में मिला और खूब खुश हुआ।

 

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ठीक पांच दिनों बाद जब वह वापस राजा के पास जा रहा था तब उसने एक सुन्दर सा उपहार राजा के लिए ले जाने का सोचा।

 

वह राजा के लिए अमृत फल ले जाना चाहता था। जब वह अमृत फल के लिए पर्वत पर पहुंचा तब तक रात हो चुकी थी।

 

उसने फल को तोड़ा और रात वहीँ गुजारने का सोचा। वह सो रहा था कि तभी एक सांप आया और उस फल को खाना शुरू कर दिया। सांप के जहर से वह फल भी विषाक्त हो चुका था।

 

जब सुबह हुई तब तोता उड़कर राजा के पास पहुँच गया और कहा – राजन मैं आपके लिए अमृत फल लेकर आया हूँ। इस फल को खाने के बाद आप हमेशा के लिए जवान और अमर हो जायेंगे।

 

 तभी मंत्री ने कहा कि महाराज पहले देख लीजिए कि फल सही भी है कि नहीं ? मंत्री की बात मानते हुए राजा ने फल का एक टुकड़ा तोड़ कर कुत्ते की ओर फैका.

 

फल का टुकड़ा खाते ही कुत्ता तड़प -तड़प कर वहीं मर गया।

 

राजा बहुत क्रोधित हुआ और क्रोध वश राजा ने आव देखा ना ताव अपनी तलवार से तोते का सिर धड़ से अलग कर दिया। राजा ने वह फल बाहर फेंक दिया|

 

समय के साथ साथ फल मिट्टी के अंदर दब गया ओर फल मे पड़े बीज की वजह से उस जगह पर एक नए पौधे का जन्म हुआ. अमृत फल का ये पौधा कुछ सालों बाद घने फलदार वृक्ष मे बदल गया.

 

फल की बनावट देख राजा समझ गया की यह ती वहीं फल का वृक्ष है जो फल तोता लाया था.

 

राजा ने सख्त हिदायत दी कि कोई भी इस पेड़ का फल ना खाएं क्यूंकि राजा को लगता था कि यह अमृत फल विषाक्त होते हैं और तोते ने यही फल खिलाकर उसे मारने की कोशिश की थी।

 

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एक दिन एक बूढ़ा आदमी उस पेड़ के नीचे विश्राम कर रहा था। उसने एक फल खाया और वह जवान हो गया क्यूंकि उस वृक्ष पर उगे हुए फल विषाक्त नहीं थे।

 

यह सारा दृश्य ज़ब मंत्री ने अपनी आँखो से देखा तो उसे तो यकीन ही नहीं हो रहा था.

 

मंत्री ने खबर राजा तक पहुंचाई जब इस बात का पता राजा को चला तो राजा को बहुत ही पछतावा हुआ उसे अपनी करनी पर लज़्ज़ा हुई।

 

तीसरे राजकुमार के मुख से यह कहानी सुनकर राजा बहुत ही खुश हुआ और तीसरे राजकुमार को सही उत्तराधिकारी समझते हुए उसे ही अपने राज्य का राजा चुना।

 

शिक्षा – new moral story निर्दोष को सजा

इस कहानी से हमें ये सिख मिलती है कभी भी क्रोध मे आकर कोई फैसला नहीं लेना चाहिए. क्रोध मे कभी न्याय नहीं करना चाहिए. हमेशा सच्च जानने का प्रयास करो. क्योंकि जो दीखता है जरुरी नहि की वो सच्च हो.

निर्दिश को सजा दे देना सबसे बड़ा अन्याय होता है. 

 

राज गद्दी का वारिस best moral story आपको कैसे लगी कमेंट करके जरूर बताना.

 

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि किसी भी अपराधी को सजा देने से पहले यह देख लेना चाहिए कि उसकी गलती है भी या नहीं, कहीं भूलवश आप किसी निर्दोष को तो सजा देने नहीं जा रहे हैं। निरपराध को कतई सजा नहीं मिलनी चाहिए।

 

दोस्तों हमारी  हमेशा से यही कोशिश रहती है की हम  इस blog पर आपके लिए ज्ञान और शिक्षा  से भरी ऐसी ही तमाम कहानियाँ लाते रहे जिससे आपका ज्ञान बढ़ सके , बौद्धिक विकास हो सके ,जीवन मे सही फैसले ले सके , आप जीवन मे आगे बढ़ सके , मन मे सकारात्मक  विचारो का जन्म हो और  आपके सुंदर चरित्र का निर्माण हो ताकि आप आगे चल  कर  सुंदर परिवार और समाज का निर्माण कर सके |

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