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panchatantra moral story | नीला आसमान

panchatantra moral story –  नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका पंचतंत्र की  ज्ञान से भरी कहानियों मे. 

 

हमारी आज की कहानी है, 

नीला आसमान -panchatantra moral story 

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एक बार एक गधा आसमान की तरफ लगातार देखें जा रहा था. 

 

तभी इतने मे वहाँ एक जिराफ आता है और गधे से बोलता है.. की…. 

गधे भाई तुम इतने देर से ये आसमान की तरफ क्या देखें जा रहे हो. 

 

गधा बोला – अरे जिराफ भाई… आज आसमान कुछ ज़ादा ही लाल दिखा दे रहा है.. 

 

ये सुन जिराफ तुरंत बोला… 

अरे – अरे… ये क्या बोल रहे हो…. आसमान लाल?    अरे आसमान तो नीला है और लाल तो कभी नहीं दिखता है. 

 

गधा बोला – जी नहीं..आसमान नीला नहीं लाल है…. तुम पागल हो गए हो. 

 

मैंने तो आसमान को कभी नीला देखा ही नहीं…. 

 

अब जिराफ मन ही मन सोचने लगा की… या तो इसकी आँखे खराब है या फिर इसे रंगों की सही पहचान ही नहीं… जो नीले रंग को आसमान बोले जा रहा है.. 

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अब जिराफ फिर से बोला की… गधे भाई तुम्हारी आँखे खराब हो चुकीं है… गधा गुस्से मे आगया…. अब दोनों रंगों को लेकर बहस छिड़ गई… 

 

तब जिराफ बोला-  तो ठीक है.. हम ऐसा करते है…जंगल के राजा शेर के पास चलते है वो ही निर्णय करेंगे इस बात का.. 

 

दोनों शेर के पास पहुंच गए…. और सारी बात बताई…. जिराफ बोका की मै कब से इस गधे को ये समझाने की कोशिश कर रहा हूं की आसमान नीला होता है और अब भी नीला ही दिख रहा है लेकिन ये मानने को तैयार नहीं बोलता है आसमान लाल है. 

 

शेर जोर जोर से हसने लगा फिर एक जोर डर घुसा जिराफ को मारा…. 

 

जिराफ अचरज भरे मन से डरते हुए हिम्मत करके बोला की अरे राजा जी मुझे क्यों मारा….. 

 

क्या मै गलत हूं. 

 

शेर बोला – नहीं बिलकुल नहीं.. तुम बिलकुल सही हो.. 

 

जिराफ बोला – तो फिर मुझे क्यों  मारा… 

 

तब शेर बोला…. ज़ब तुम्हे पता है की वो गधा है तो फिर क्यों उसके मु लग रहे हो. 

गधा आखिर गधा ही होता है…. तुम इस गधे को समझाने मे अपना समय और एनर्जी बर्बाद कर रहे थे इसीलिए मैंने तुम्हे मारा 

……. रही बात आसमान की.. तो वो तो अक्सर नीला ही ही होता है… 

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तो दोस्तों इस कहानी  panchatantra moral story  से क्या शिक्षा मिलती है चलिए जानते है. 

 

इस कहानी से  हमें ये शिक्षा मिलती है की कभी भी गधे जैसी बुद्धि (मुर्ख इंसान) वाले इंसान के मुंह मत लगो. 

 

जी हाँ दोस्तों कई बार हमारी life मे भी ऐसा ही होता है हम लोग आवेश मे आकर मुर्ख इंसान से बहस करने लग जाते है….. जिसके चलते हम अपनी एनर्जी और कीमती  वक़्त दोनों बर्बाद कर बैठते है….. और दिमाग़ जो खराब होता है सो अलग…. 

 

तो बेहतर होगा…. ऐसे लोगो से दूर ही रहे कोई बहस ना करें…

 

तो दोस्तों पंचतंत्र की यह कहानी आपको कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताना. 

 

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