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इन 5 परिस्थितियों मे चुप रहना सीखो

इन 5 परिस्थितियों मे चुप रहना सीखो

एक बार की बात है एक गुरु का एक शिष्य ज्यादा बोलने की आदत से परेशान था, वह जब भी किसी से मिलता, तो मिलने के बाद अपने मित्रों के सामने उस इंसान के बारे में अपना विचार देना शुरू कर देता था.

 उससे कोई पूछे या ना पूछे वह अपने आसपास की लगभग हर चीज के बारे में, अपनी राय बता देता था, आश्रम में रहने वाले लगभग हर छात्र और शिक्षक के बारे में, उसकी अपनी सकारात्मक और नकारात्मक राय थी

 

जिसे वह बिना सोचे समझे लोगों के सामने रख देता. जब भी आश्रम मैं रहने वाला कोई दूसरा छात्रा, अपनी समस्या लेकर उसके पास आता तो वह उसको पूरी बात सुना देता और उसे सलाह देना शुरू कर देता.

वह अक्सर अपने मित्रों से कहता रहता,  तुम्हें यह काम ऐसा करना चाहिए था,  वह काम ऐसे करना चाहिए था,  उसको अपने आसपास चीजों के बारे में, जो भी आधा अधूरा ज्ञान था,  उन्हें मित्रों के बीच  बोल बोल कर,  अपने ज्ञान का दिखावा करता रहता.

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उसकी इन्ही हरकतों की वजह से, आश्रम का कोई भी छात्र या शिक्षक,  उसे गंभीरता से नहीं लेता था, अक्सर उसके साथ पढ़ने वाले छात्र, उससे दूर रहने की कोशिश करते थे

 

क्योंकि वो हर बार उन्हें सलाह देने लगता था, कोई भी उसे अपना मित्र बनाना नहीं चाहता था, सब उससे दूर रहना ही पसंद करते थे. अक्सर आश्रम में रहने वाले कई छात्र उसके पीठ पीछे,  उसकी इन आदतों की वजह से उसका मजाक बनाते थे. 

उस लड़के को भी पता था, कि उसकी ज्यादा बोलने की आदत की वजह से कोई भी उसे पसंद नहीं करता.

वह भी अपनी इस आदत को बदलना चाहता था,  लेकिन वह चाह कर भी, हर बात पर अपनी राय देने की आदत छोड़ नहीं पा रहा था.

 

पर एक दिन वह अपने गुरु के पास गया,  और अपनी सारी समस्या गुरु को बताई.

इन 5 परिस्थितियों मे चुप रहना सीखो

गुरु ने कहा–  बेटा ज्यादा वही इंसान बोलता है, जिसे लगता है वह सब कुछ जानता है, पर जो इंसान यह मानता है की वह बहुत ही थोड़ा जानता है और ऐसा बहुत कुछ है जो उसे सीखना है, तो वह कभी भी जरूरत से ज्यादा नहीं बोलता और ना ही बीना मांगे किसी को राय देता है.

 

इसलिए पहले खुद के अंदर का ये अभिमान हटाओ,  कि तुम्हें सब कुछ पता है.शिष्य ने गुरु के सामने अपना सिर झुका दिया.

 

गुरु ने कहा–  तुम्हारे ज्यादा बोलने की आदत को मै एक दिन मे ही तो खत्म नहीं कर सकता. यह आदत, तुम्हें खुद ही अपने अंदर धीरे-धीरे कम करनी होगी, लेकिन तुम्हें यह जरूर बता सकता हूं, की किन मौकों पर तुम्हें शांत रहना चाहिए.

 

ताकि तुम खुद को दुखी होने  से और किसी बड़ी मुसीबत में पड़ने से बच सको.

 

शिष्य गुरु की बातों से सहमति दिखाते हुए,अपना सिर हां में हिला दिया.

 

गुरु ने कहा बेटे इन पांच मौकों पर हर इंसान को अपना मुंह बंद रखना चाहिए- 

 

 पहली स्थिति –

जब तुम्हें लगे कोई तुम्हारे भावनाओं को,  तुम्हारे शब्दों से नहीं समझ सकता, उस समय तुम्हें चुप रहना चाहिए. अक्सर  हम लोगों को अपनी दुख परेशानिया बताना शुरू कर देते हैं. जबकि हमारे आसपास रहने वाले ज्यादातर लोगों को इससे कोई मतलब नहीं कि हमारे जीवन में क्या गुजर रहा है. हर इंसान को केवल खुद से मतलब होता है.वह केवल खुद के बारे में बात करना चाहते है, वह केवल खुद की तारीफ सुनना चाहता है.  उन्हें हमारे जीवन की परेशानियों से कोई मतलब नहीं और ना ही वह सुनना चाहते है.

 

हो सकता है एक या दो बार वह तुम्हारी दुख भरी कहानी सुन भी ले…..लेकिन उसके बाद तुमसे दूर भागना शुरू कर देंगे क्योंकि कोई भी किसी दुखी और असहाय इंसान के साथ रहना पसंद नहीं करता….

 

इसलिए कभी भी अपने कुछ करीबी मित्रों और परिवार वालों को छोड़ कर किसी ऐसे इंसान को अपनी परेशानी ना बताएं जो तुम्हारे बातों को समझने के बजाय उनका मजाक बनाएं.या तुम्हारी मजबूरी का फायदा उठाए.

 

दुसरी स्थिति –

जब तुम्हें यह ना पता हो,  की किसी विशेष मौके पर क्या बोलना है, या किसी विशेष घटना के बारे में आधा अधूरा ही ज्ञान हो, तो ऐसे मौके पर तुम्हें चुप ही रहना चाहिए.

 

ऐसा इंसान जो आधा अधूरा ज्ञान होने के बाद भी,  उस विषय में बात करता है वह अक्सर ही मजाक का पात्र बनता है और कोई भी ऐसे इंसान को कभी गंभीरता से नहीं लेता.

 

अपनी बात प्रभावशाली तरीके से वही इंसान रख सकता है जिसे उस घटना या विषय के बारे में गहराई से जानकारी है.

 

 इसलिए कभी भी आधी अधूरी और इधर उधर से मिलने वाली जानकारी के आधार पर,  लोगों से अपनी बात मनवाने की कोशिश ना करो.

 

हालांकि दोस्तों प्रभावशाली बात चीत करना और एक ऐसा इंसान बनना, जिससे हर कोई बात करना चाहे जिससे हर कोई सुन ना चाहे, यह भी एक कला है, जिसे हर इंसान सीख सकता है, आप भी सीख सकते हैं..

 

तीसरी स्थिति –

गुरु ने कहा – जब कोई इंसान तुम्हारे सामने,  किसी तीसरे इंसान की बुराई कर रहा हो,  तब ऐसी परिस्थिति में तुम्हें चुप रहना चाहिए, तुम्हें कभी भी ऐसी नकारात्मक बातचीत का हिस्सा नहीं बनना चाहिए,…….क्योंकि आज जो इंसान तुम्हारे सामने किसी तीसरे इंसान की बुराई कर रहा हो, वही कल किसी और के सामने तुम्हारा भी बुराई करेगा….

 

और इस बात की ज्यादा संभावना है, की आज तुमने अगर उसके हां में हां मिलाने के लिए,  तीसरे इंसान की जो बुराई की है,  कल रिश्ते ठीक होने पर वो तीसरे इंसान से कहे,  की तुमने उसके बारे में क्या क्या कहा था….तब आपकी क्या ही इज्जत रह जाएगी,,, विचार करो….

 

इसलिए जब भी कभी, कोई किसी तीसरे इंसान की बुराई करें, या उसके गलत समय का मजाक उड़ाए,  तो तुम्हें बस उसकी बातें सुन लेनी है,  आपको अपनी कोई भी राय वहाँ नहीं रखनी है.

 

चौथी स्थिति 

जब कोई तुम्हारे ऊपर गुस्सा करे और तुम्हें अपमानित करने  की कोशिश करें, तब ऐसी परिस्थिति में तुम चुप रह कर, सामने वाले के गुस्से को कम कर सकते हो.. और स्थिति को बिगड़ने से बचा सकते हो…..क्योंकि क्रोध एक ऐसी मानसिक स्थिति है,  जो बुद्धि को हर लेती है, इस स्थिति मे मनुष्य  सोच विचार कर नहीं बोल पाता जिस वजह, अभद्र, अपशब्द व कड़वे वचन ही मुंह से निकलते है.

 

 जब तुम सामने वाले के क्रोध का जवाब क्रोध से ना दे कर उस समय चुप रह जाते हो, तब यह बात उस क्रोध करने वाले इंसान के दिल में लगती है, और गुस्सा कम होने पर उसे अपनी गलती पर पछतावा होता है….

 

लेकिन तुम्हारा, हर परिस्थिति में चुप रहना भी ठीक नहीं है,  अगर कोई गलत कर रहा हो तो तुम्हें उसका जवाब भी देना है हर बार तुम्हारा मौन रहना, सामने वाले की गलत हरकतों व उददंडताओं को बढावा देने जैसा होगा.

 

लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें हमारा चुप रहना उन्हें हमारी कमजोरी प्रतीत होति है, गुस्से के दौरान चुप रहने का यह तरीका केवल परिवार सगे संबंधी और कुछ निकट मित्रो के लिए सही है, ना कि हर इंसान के लिए.

 

अगर तुम हर जगह चुप रहने लग गए तो इसका गलत फायदा उठाया जा सकता है.

 

पाँचवी स्थिति – 

जब कोई इंसान अपने जीवन की किसी दुख भरी घटना  या परेशानियों से गुजर रहा हो, तो तुम्हें चुप रह कर सिर्फ उसके बातों को सुनना है, लेकिन ज्यादातर लोग ऐसे होते हैं, की किसी ने उनके सामने अपनी समस्या सुनाई नहीं की उन्होंने समाधान देना शुरू कर दिया, 

 

जबकि कोई इंसान अपना समझ कर ही हम से अपनी परेशानी साझा कर रहा होता है ना की वो आपसे किसी सुझाव की उम्मीद से बता रहा होता है. वह बस ये चाहता है हम उसकी पूरी बात ध्यान से सुन ले जब हम किसी की परेशानी को ध्यान से पूरा सुन लेते हैं तो उस इंसान को एक मानसिक व आत्मिक शांति मिलती है.

 

उसे ऐसा लगता है, की चलो किसी ने तो मेरी बात को समझा 

 

परेशानी के समय में किसी इंसान को सांत्वना देने का सबसे अच्छा तरीका है कि हम बस उस इंसान की पूरी बात को ध्यान से सुन ले…

 

जब हम लोगों की बातों को बिना उन्हें बीच में रोके और बिना किसी सलाह दिए पूरे ध्यान से सुनते हैं तो उनकी नजरों में हमारे लिए सम्मान और स्नेह का भाव पैदा हो जाता है.

 

इसलिए जब कोई अपनी परेशानी आपसे बताएं,  बस उसकी बातों को ध्यान से सुन लेना और जब तक वह तुमसे सलाह ना मांगे, तो उन्हें किसी भी प्रकार की सलाह नहीं देनी है.

 

गुरु ने कहा मेरी एक बात हमेशा याद रखना जब तुम कम बोलते हो, लोग तुम्हारे तरफ ज्यादा आकर्षित होते हैं,  कि तुम क्या हो और तुम क्या सोचते हो,?

 

शिष्य ने हां में सिर हिलाया, शिष्य अब गुरु की बातो को समझ चुका था कि  किन किन परिस्थितियों में शांत रहना है.

 

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