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Life change moral story पुण्य कर्म की शक्ति

Life change moral story पुण्य कर्म की शक्ति – दोस्तों ये कहानी वाकई मे आपका जीवन बदल देगी. बहुत खूबसूरत ज्ञान देगी ये कहानी. यदि आपके जीवन मे कोई दुख कस्ट है और उससे छुटकारा पाना चाहते हों तो ये कहानी आपकी मदद करेगी. इसलिए इस कहानी को आखिर तक पढ़ो.

 

Life change moral story पुण्य कर्म की शक्ति

 

एक बार एक बहुत ज्ञानी बौद्ध भिक्षु हुआ करते थे. उन्होंने अपने जीवन मे क़ई सारे बौद्ध भिक्षुओ को ज्ञान प्रदान किया, जीवन जीना सिखाया.

एक समय ऐसा आया की वें काफ़ी बूढ़े हों चुके थे. लेकिन उन्होंने अपनी योग विद्या से क़ई तरह की दिव्य विद्याए भी अर्जित की हुई थी जिनमे से एक था भविष्य देख पाना.

उनके आश्रम मे अभी भी कुछ शिष्य थे जिनमे से एक शिष्य उनका सबसे प्रिय था क्योंकि उसमे वो काबिलियत थी की वो आगे चल कर उनके जाने के बाद इस बड़े आश्रम का कार्य भार संभाल सके.उस शिष्य का नाम था अष्टम.

 

एक बार वो बूढ़े बौद्ध भिक्षु गहरी ध्यान मुद्रा मे लीन थे तो उन्होंने देखा की की आज से 10 दिन बाद उनके सबसे काबिल शिष्य अष्टम की मृत्यु हों जाएगी.यह देख भिक्षु जी अपनी ध्यान मुद्रा से बाहर आगए. वो बड़े घबराए लग रहे थे.

 

मृत्यु किस वजह से होगी ये तो पता लगा पाना तो सम्भव नहीं था पर वह अष्टम को बचा कर प्रकृति का नियम भी नहीं तोडना चाहते थे.

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इस वजह से वें बहुत चिंतित रहने लगे. खूब विचार करने के बाद भिक्षु ने सोचा की अष्टम के जीवन मे अब जितने भी दिन शेष बचे है वो अपने परिवार वालों के साथ बिताए, आखिर कार देर रात उन्होंने अष्टम को अपने पास बुलाया और कहा की अष्टम तुम 9 दिनों के लिये अपने घर हों आओ. ध्यान रहे ठीक 10 वें दिन आश्रम वापिस आजाना.

यह सुन अष्टम बहुत खुश हुआ. अष्टम के मन मे ये सवाल भी आया की आखिर गुरु जी मुझे अचानक घर जाने को क्यों बोल रहे है.लेकिन उसने गुरु जी से सवाल करना उचित नहीं समझा, इसलिए उनके आदेश का पालन करते हुए सुबह सूर्य निकलने से पहले ही गुरु जी के पैर छू कर विदा लिया और घर की तरफ निकल गया.

इधर गुरु जी को एक तरफ जहाँ अपने काबिल शिष्य को खोने का डर था वहीं दूसरी तरफ आश्रम के लिये कोई काबिल शिष्य के ना होने की चिंता.

 

कुछ दूर चलने के बाद अष्टम को बहुत प्यास लगी. वहीं से थोड़ी दूर नदी बह रही जिसका ठंड पानी पी कर अष्टम जैसे ही पीछे मुड़ा उसकी नजर एक बड़े से मिट्टी के ढेर पर पड़ी, वो मिट्टी का ढेर चीटियों का घर था, कम से कम लाखों चीटियां थी उसमे जो तेजी से अंदर बाहर आजा रही थी कुछ चीटियां एक दूजे से टकरा रही थी. यह दृश्य देख अष्टम को बहुत अच्छा लग रहा था.

 

अष्टम के पैरों से ज़ब नदी का पानी टकराया तो अष्टम को आभास हुआ की नदी का पानी तेजी से बढ़ रहा जिस वजह से इसकी तरंगे जल्द ही इन चीटियों का घर तबाह कर देंगी, मुझे जल्द ही कुछ करना होगा.

 

अष्टम ने अपनी तेज बुद्धि का उपयोग कर खुदाई कर वहाँ पर एक नाली बना दी और मिट्टी के चारो तरफ पत्थरो की एक मजबूत सुरक्षा लगा दी जिससे नदी का पानी उन चीटियों तक नहीं पहुँच सकता था.

 

अब अष्टम ज़ब कुछ आगे बढा तो तेज़ गर्मी की वजह से जलती हुई जमीन के ऊपर एक बुढ़ा आदमी चल रहा था यह देख अष्टम ने अपना खड़ाऊ जो की लड़की चप्पल जैसी ही होती है वक़्त निकाल कर तुरंत उस बूढ़े व्यक्ति के पाँव मे डाल दी.बूढ़े आदमी ने उस खूब दुआएं दी.

 

कुछ देर और चलने के बाद अष्टम अपने घर पहुँच गया. 9 दिन अष्टम ने अपने परिवार वालों के साथ ख़ुशी ख़ुशी बिताए, अष्टम ने खूब आनंद उठाए. कब 9 दिन बीत गए पता ही ना चला. ठीक दसवे दिन सुबह 4 ज़ब अष्टम कज आँख खुली तो अचानक अष्टम को याद आया की गुरु जी ने बोला था की दसवे दिन आश्रम वापिस पहुंचना है.

 

मुझे जाना होगा यह बोल कर अष्टम ने परिवार वालों से विदा लिया और आश्रम की ओर चल दिया.

 

इधर गुरु, बौद्ध भिक्षु आज के दिन बहुत उदास थे वो सोच रहे थे की अब तक तो अष्टम दुनियां को अलविदा कह गया होगा.

शाम होने को थी की तभी बूढ़े भिक्षु को दूर से एक नौजवान भिक्षु आता दिखाई दिया.

 

ज़ब बूढ़े भिक्षु ने गौर से देखा तो, उनके रोंगटे खड़े हों गए, उन्हें विश्वास नहीं हों रहा था की ये सत्य है या मेरा भ्र्म, अष्टम जैसे ही आश्रम के गेट पर पहुंचा, बूढ़े बौद्ध भिक्षु ने तेजी से आगे बढ़ कर अष्टम को अपने सीने से लगा लिया.

 

लेकिन बूढ़े भिक्षु का मन अब भी सवालों के घेरे मे था और ये जानने की तीव्र जिज्ञासा उनके चेहरे पर झलक रही थी की आखिर ये सम्भव कैसे हुआ?

 

तभी अपनी जिज्ञासा को शांत करने के लिये उन्होंने अष्टम से बस इतना ही पूछा की, अस्टम! तुमने यहां से जाने के बाद जो भी किया सब बताओ मुझे, तुम्हारे साथ क्या क्या घटित हुआ.

अस्टमी ने गुरु जी को सब बताया की कैसे पहले उसने लाखों चीटियों की जान बचाई और उस बूढ़े की मदद की और अपने गांव मे क्या क्या.

 

यह सब सुन बूढ़ा भिक्षु समझ गया की अष्टम की अकाल मृत्यु कैसे टली और उसका जीवन काल क़ई वर्षो के लिये कैसे बढ़ गया.

 

तो देखा दोस्तों कैसे निःस्वार्थ सेवा व परोपकार की भावना ने अष्टम का जीवन काल बढा दिया.

किर्प्या इस कहानी को कदाचित ना लिया जाए क्योंकि यहां पर कहानी का ये मतलब बिलकुल नहीं की आप अच्छे और पुण्य करम करके अपनी मृत्यु को टाल दोगे हाँ ये सत्य जरूर है की दिल से निकली दुआएं और पुण्य कर्मो से जीवन के बड़े से बड़े दुख कस्ट कट जाते है.

और ऐसा क़ई बार देखा भी गया है बहुत से रोड एक्सीडेंट या किसी भी ऐसी घटना के दौरान मरते मरते बचे है. तो कहीं ना कहीं ये उनके पुण्य कर्म ही रहे होने जो ईश्वर ने उन्हें अपने जीवन व गलतियों को सुधारने का एक और मौका दिया.

 

तो दोस्तों इस कहानी Life change moral story पुण्य कर्म की शक्ति से हमें जीवन की एक बहुत ही अनमोल सीख मिलती है. निःस्वार्थ भाव से की गई दूसरों की मदद, परोपकार की भावना, इंसानियत का फर्ज कैसे मनुष्य के दुख और पाँपो को काट कर उसे एक सुखी व समृद्ध जीवन प्रदान करता है.

तो दोस्तों कैसे लगी आज की ये नैतिक कहानी.

हम अपने blog पर जीवन सवार देने वाली ऐसी ही तमाम ज्ञान से भरी कहानियाँ लाते रहते है हमसे जुड़े रहे.

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