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Buddha story achhai ka fayda

नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका Buddha story achhai ka fayda. आज हम आपके लिए लाए है गौतम बुद्ध की कहानी – अच्छाई का फायदा. आज की इस कहानी से आपको प्रेरणा मिलेगी. भगवान बुद्ध के जीवन की ऐसी कई घटनाएं है जो हमें जीवन मे सही मार्ग दिखाती है.

आज भी हम उनके जीबन की एक घटना को कहानी के माध्यम से आप तक ले कर आए है. आप इस कहानी को पूरा पढे और ज्ञान प्राप्त करे.

 

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Buddha story achhai ka fayda

एक बार की बात है गौतम बुद्ध अपने शिष्यों के साथ बैठे थे, उसी समय राजा अजातशत्रु वहां पहुंचे और बुद्ध से कहने लगे – हे बुद्ध – जब से मैं आपका शिष्य बना हर कोई मेरा शोषण कर रहा है

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आपका शिष्य बनने से पहले सभी लोग मुझसे डरते थे,क्योंकि उस वक्त मैं बहुत कठोर था और मैं किसी को मौत की सजा देने से पहले एक बार भी नहीं सोचा करता था.

 

 लेकिन आपका शिष्य बनने के बाद मेरा किसी को दंड देने का मन नहीं करता और ना ही मुझे गुस्सा आता है,

 

मैं शांत हो गया हूं और सभी को दया भावना से देखता हु लेकिन कुछ लोग मेरे इस बदलाव का अनुचित लाभ उठा रहे और इसने मेरे राज्य के लोगों को भी एक तरह के खतरे में डाल दिया है.

 

 कृपया आप मुझे बताएं कि मुझे अब क्या करना चाहिए.

 

राजा अजातशत्रु की यह बात सुनकर गौतम बुद्ध उन्हें एक कहानी सुनाते हैं और कहानी कुछ इस प्रकार है,

 

 एक बार एक बड़े पेड़ के नीचे  एक जहरीला सांप रहता था पेड़ एक गांव के पास में एक कोने में हुआ करता था.वहाँ अक्सर सुबह शाम लोग बैठक लगते थे और खूब बाते करते थे,

 

लेकिन ज़ब से उस पेड़ के पास उस सांप को देखा गया तब से लोगो ने वहाँ जाना बंद कर दिया, लेकिन कुछ लोग तो जानबूझ कर वहाँ सांप को देखने आया करते और उसे छेड़ा करते..

 

अब उस सांप को ज़ब खतरा महसूस हुआ तो उसमे खुद के बचाव के लिए लोगो पर हमला करना शुरू कर दिया.

वह सांप अब अपने क्षेत्र मे लोगो का आना भी बर्दाश्त नहीं करता था.

जिससे गांव के कई लोगो की जान जाने लगी. इस तरह पेड़ के आस पास ज़ब भी, कोई हलचल होती तो सांप, वहाँ आजाता. और हमला कर देता.

 

सांप की दहशत अब पूरे गांव मे हो गई, अब लोगो ने बिलकुल ही उस पेड़ के पास जाना बंद कर दिया.

 

 एक दिन एक साधु  उस गांव से गुजर रहे थे, तभी उस साधू की नजर  उस विशाल से घने वृक्ष पर पड़ी जिसके नीचे वो सांप रहा करता था,.

 

घने पेड़ को देख साधू के मन मे विचार आया की चलो वृक्ष की इस ठंडी छाँव के नीचे बैठ कर कुछ देर ध्यान लगाया जाया.

 

उसी वक़्त गांव के कुछ लोग अपनी गाय लेकर घर की ओर जा रहे थे, तभी उन लोगो की नजर ज़ब उस साधू पर पड़ी जो की उसी पेड़ की तरफ ही जा रहा था, तभी लोगो ने उस साधू को सांप के बारे सावधान करते हुए कहा, की आप उस पेड़ के पास मत जाना वहाँ एक जहरीला सांप रहता है जो जरा सी हलचल होने पर हमला कर देता है और अब तक कई लोगो को काट भी चुका है.

 

लोगो की यह बातें सुनकर साधु मुस्कुराए और उस पेड़ की तरफ चल पड़े, जगह को थोड़ा साफ करके जैसे ही साधु ध्यान करने के लिए बैठे, तभी सांप हलचल सुनकर साधू के सामने आ पहुँचता है और फूंकारने लगता है. फूंकार की आवाज़ sun साधू की आंख खुलती है और वह सांप को देखने लगते है.

 

वह सांप की आँखो मे देखते हुए एक मंत्र बोलते है और मुंह से फूक मारते है, तभी चमत्कारी रूप से वो सांप साधू से बात करने लगा. अब दोनों एक दूसरे की भाषा को समझ सकते थे.

 

 सांप साधु से कहता है, हे मनुष्य क्या तुम मुझ से नहीं डरते? 

क्या तुम नहीं जानते यह मेरा क्षेत्र है…? और यहां आने की किसी की हिम्मत नहीं है.

 

साधु ने करुणा से कहा है म, मित्र इसमें डरने की क्या बात है मैं किसी चीज से नहीं डरता, क्योंकि ज़ब मैं जीने लोभ ही नहीं रखता तो मृत्यु से क्या डर,

सांप,साधु की ये बाते सुनकर  चौक गया…

 

क्योंकि सांप की इससे पहले ऐसे लोगों से मुलाकात हुई थी. जो उसको मारना चाहते थे या उसके डर से भाग जाते थे लेकिन वह ऐसे व्यक्ति से कभी नहीं मिला था जो उस से नहीं डरता, सांप साधू से इतना प्रभावित हुआ की वह साधू के चरणों में पड़ गया.. और बोला, हे प्रभु! आप बिल्कुल सही कह रहे हैं आज तक मैंने जो कुछ भी किया है अपनी जान बचाने के लिए किया है,  अपने क्रोध के चलते ना जाने कितने निर्दोषों की जान भी ले ली… इसके बाद साधू सांप बहुत सी बाते समझा कर वहाँ से चला गया.

 

साधु की बात से प्रभावित होकर सांप ने निश्चित किया, की आज से वह किसी को नहीं काटेगा, वह अपने क्रोधी स्वभाव को त्याग देता है,

दूसरों को काटना बंद कर देता है, लेकिन इसका नतीजा उल्टा निकलता है जब लोगों ने देखा कि सांप ने लोगों को तो काटना बंद कर दिया है.

 

तो लोग उसका फायदा उठाने लगे जो उससे दूर भागते थे, वो उसके पास आने लगे और सांप को परेशान करने लगे, बच्चे उस पर पत्थर फेंक कर मारने लगे, जिससे साँप आए दिन हमेशा परेशान और घायल रहता था

 

वह बहुत दुखी था क्योंकि वह अपने जीवन का सबसे कठिन समय बिता रहा था एक बार वह साधु फिर से उस गांव में आए, वह उसी पेड़ के नीचे बैठ गए, तभी साधू की नजर ज़ब दयनीय हालत मे पड़े उस सांप पर पड़ी,

 

तो साधु ने उस सांप से पूछा की मित्र तुम्हारी ये हालत कैसे हो गई. तुम इतने घायल और इतनी दयनीय स्थिति में कैसे आ गए?

 

 सांप ने कहा, जब से आपने मुझे अपने हिंसक स्वभाव को छोड़ने के लिए कहा, तब से मैंने निश्चिय किया की अब मै किसी पर हमला नहीं करूंगा, मैंने क्रोध करना छोड़ दिया और शांति को अपना लिया,

जिसका नतीजा ये हुकी लोग मुझे परेशान करने लगे, दुर्व्यवहार करने लगे.कोई पत्थर से मरता है तो कोई डंडे से पीट कर चला जाता है.

 

 सांप की बात सुनकर साधु ने कहा – मित्र मैंने तुमसे कहा था कि बेवजह दूसरों को मत काटो लेकिन मैंने तुम्हें तुम्हारी आत्मरक्षा के लिए हमला करने से नहीं रोका था.

 

कहानी सुनाने के बाद बुद्ध ने राजा से कहा – हे राजन!  तुमने भी मेरी बात गलत  तरीके से अपनाया,

 

मैंने आपसे,अपने कर्तव्य को छोड़ने के लिए कहा था. किन्तु आप अपने कर्तव्य से भी विमुख हो गए. आप एक राजा है, अतः पूर्ण रूप से साधू की तरह व्यवहार करना आपको खतरे मे डाल सकता है.

तुम्हे सिर्फ अंदर से साधू की तरह रहना था, और बाहर से राजा की तरह. ताकी जरूरत पड़ने पर, खुद की, प्रजा की, और राज्य की रक्षा कर सको.

 

दोस्तों बिल्कुल ऐसे ही जंगल में होता है जो सबसे सीधा पेड़ होता है उसको सबसे पहले काटा जाता है, और यही क़ानून दुनियाँ के लोगो पर भी लागू होता है, अच्छे, भोले लोगो का खूब फायदा उठाया जाता है, अच्छे लोगो को जिंदगी मे अनेको दुखो का सामना करना पड़ता है.

 

 इसलिए कभी किसी को अपना फायदा मत उठाने दो, लोगों को उनकी मर्यादा में रखने के लिए खुद को परिस्थिति के अनुसार बदलना सीख जाइए. अन्यथा आपका हाल भी उस राजा व सांप की तरह हो जाएगा.

तो दोस्तों उम्मीद करता हूं आज महात्मा बुद्ध की इस Buddha story achhai ka fayda से आपको अनमोल सिख प्राप्त हुई होगी.

Buddha story achhai ka fayda को अधिक से अधिक लोगो मे शेयर करके हमारी मेहनत को सार्थक करे. 

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