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Top 10 moral stories in hindi | best hindi kahaniyan

Moral storieas  in hindi (मोरल स्टोरीज़) – नमस्कार दोस्तों ! स्वागत है आपका ज्ञान से भरी शिक्षाप्रद कहानियों (moral stories) की इस दुनिया मे. shikshaprad kahaniyan written in hindi

 

दोस्तों moral stories  हर इंसान के जीवन मे बहुत महत्व रखती है. यहां पर बताई जाने वाली हर moral stories मे आपको एक बहुत  जरुरी ज्ञान जरूर सीखने को मिलेगा. जो आपके जीवन कहीं ना कहीं बहुत काम आएंगे. 

 

तो आज मैं कहानियों की दुनिया से आप लोगो के लिए  10 सबसे अच्छी (top 10 moral stories in hindi) शिक्षाप्रद कहानियाँ लेकर आया हूं. 

 

इन moral stories से आपको जीवन के अनमोल ज्ञान सीखने को मिलेंगे. तो चलिए शुरू करते है. 

 

ज्ञान से भरी कहानी की इस  अद्भुत Video को जरूर देखो 🎥👉🎧

 

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जरूर पढ़े – ज्ञान से भरी 10 short moral stories in hindi 

 

शंकर और फकीर – moral stories in hindi 

 

एक फ़क़ीर शहर की तरफ जा रहा था, फ़क़ीर बहुत देर से चल रहा था, वो थक चुका था और हल्की हल्की रात भी हो चुकी थी.

 

 

शहर अभी काफ़ी दूर था.. फकीर एक घर के पास आकर रुक गया.

वो जिसका घर था उसका नाम था. *शंकर*

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शंकर एक नेक दिल का इंसान था और बहुत ही सुलझा हुआ व्यक्ति था.

 

शंकर ने फकीर को देखा तो वो फकीर घर मे लें आया. और खूब सेवा की. फकीर बहुत खुश हुआ. और आशीर्वाद देते हुए बोला खुश रहो बच्चा.

 

शंकर बोला, आप यही विश्राम कर लीजिये.

 

सुबह होते ही शंकर ने उन्हें कुछ अनाज और फल देकर बिदा किया.

 

इधर फकीर शंकर की सेवा से बहुत खुश था. और उसे दुआएं देना लगा, “भगवान करें तुम्हे और बरकत मिले और ईश्वर तुम्हे सदा ख़ुश रखे.”

 

 

फकीर की पहली बात को सुनकर शंकर हसने लगा और बोला, अरे फकीर अभी मेरे पास जो भी है ये भी नहीं रहने वाला.

 

शकंर की ये बात सुन फकीर शंकर की तरफ देखता रह गया और मन ही मन सोचने कगा की ये ऐसा क्यों बोल रहा..

 

 

इतना सोचते हुए फकीर ने कहा मैं शहर से लौटते वक़्त एक बार तुमसे मिल कर जरूर जाऊंगा. इतना कह कर फकीर वहाँ से चला गया.

 

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ठीक एक साल बाद, ज़ब फकीर वहाँ दोबारा आया तो देखा की उसका सारा धन, उसकी सारी संपत्ति सच्च मुच खत्म हो चुकी है.

 

 

ज़ब फकीर को पता चला की अब शंकर नगर से बाहर एक गांव मे एक बड़े जमींदार के घर नौकर का काम कर रहा है.

 

 

शंकर अपना अलग से एक छोटी सी झोपड़ी बना कर हसि ख़ुशी गुजारा कर रहा है. और दो वक़्त की रोटी मिल जाती है और खुश है.

 

फकीर बिना देरी किये तुरंत शंकर के पास पंहुचा,

शंकर ने फिर से फकीर की सेवा मे अपनी तरफ से कोई कमी ना रखी,

 

खाने को जो भी रुखा सुखा था वो हस्ते हुए फकीर को दे दिया.

 

अबकी बार दूसरे दिन ज़ब फकीर जाने लगा तो इस बार फकीर की आँखो मे आंसू थे.

 

“फकीर कहने लगा हे भगवान ये तूने क्या किया?”

इधर शंकर फिर हंसा और कहने लगा. अरे फकीर तू क्यों दुःखी हो रहा है.

 

 

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“ईश्वर हमारे लिए जो भी करते है वो सही करते है. उनका कुछ ना कुछ सन्देश या सीख छुपी होती है. जिसे हम नहीं समझ पाते और उल्टा ईश्वर को कोसने लगते है..”

 

 

बाक़ी हमारे कर्म होते है. हमें तो ईश्वर को धन्यवाद देना चाहिए.

और हा समय हमेशा एक सा नहीं रहता.और सुनो फकीर.. मेरा ये समय भी नहीं रहने वाला.

 

इधर फकीर सोचने लगा मैं तो केवल भेष से फकीर हूं लेकिन सच्चा फकीर तो तू है.

 

(इस hindi moral stories को आखिर तक पढ़ो )

फकीर कुछ दिन की यात्रा के बाद ज़ब फिर से वापिस लोटा तो उसने जो देखा उसे अपनी आँखो पर विश्वास नहीं हो रहा था.

 

 

शंकर जमीदारो का भी जमींदार बन चुका था. पता करने पर फकीर को ये जनजारी मिली की जिस जमींदार के यहां शंकर नौकरी करता था उसकी कोई संतान नहीं थी.

 

वो अकेला रहता था. तो उस जमींदार ने मरते वक़्त ये सारी संपत्ति शंकर के नाम कर दी.
शंकर के इन दिनों को देखकर फकीर अब बहुत खुश हुआ.

 

फकीर शंकर के पास गया और बोला तेरी इस बरकत को ईश्वर सदैंव बनाए रखे.

 

 

फकीर की ये बात सुन शंकर फिर से हसने लगा. और बोला, “फकीर ! अभि भी तेरी नादानी बनी ही हुई है.

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ये सुन फकीर फिर से हैरान हुआ और पूछा. “क्या ये भी नहीं रहने वाला” 😳

 

शंकर बोला, हां ! क्योंकि समय का पहिया एक बार फिर घूमेगा

 

तब ! या ये सम्पति नहीं रहेगी या तो फिर इस सम्पति को मानने वाला और उसका आनंद लेने वाला नहीं रहेगा.

 

इस संसार मे कभी भी कुछ भी हमेशा एक सा नहीं रहता, बदलाव ही ! प्रकृति का नियम.

 

यदि कुछ शाश्वत, अमर और हमेशा रहने वाला है तो वो है हमारी आत्मा और मन का सुकून

 

शंकर की बातें सुन फकीर का मन सुकून से भर गया. आनंद मे हो गया और फकीर वहाँ से चला गया.

 

इधर एक बार फिर से समय का पहिया घूमा.. फकीर बड़े लम्बे समय बाद अपनी सफ़ेद दाढ़ी लिए ज़ब वहाँ से गुजर रहा था…

 

तो देखा की. शंकर का वो महल तो है ! पर शंकर नहीं है…

 

.क्योंकि शंकर ! अब इस दुनिया से जा चूजा था. महल वीरान हो चुका था.

 

महल मे मकड़ियों का जाला बिछ चुका था. कबूतर गुटरगूँ कर रहे थे. परिंदो के पँख फरफराने की आवाज़े पूरे महल मे गूँज रही थी.

 

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ये सब देख फकीर के मन से मे एक आवाज़ गूँजी.

*कह रहा है आसमा. ये समा कुछ भी नहीं.. रो रही है शब्नमे, नौरंगे जहाँ मे “कुछ नहीं.”*

*जिनके महल मे हज़ारो रंग के जलते थे फ़ानूज. अब झाड़ है उनके “कब्र पर, बाक़ी निशां कुछ, भी नहीं.*

 

चलिए जानते है इस moral story से क्या शिक्षा मिलती है.? 

 

अब वो फकीर मन ही मन सोचने लगा की इंसान जिंदगी भर कितना दौड़ता रहता है.

किसी ना किसी बात को लेकर परेशान रहता रहता है.

जिन चीजों के लिए इंसान हमेशा तड़पता रहता है,

 

जिन चीजों के पीछे इंसान हमेशा भागता रहता है. फिर चाहे वो, धन हो, शोहरत हो, सम्मान हो, कोई वस्तु हो या फिर प्यार हो.

 

ये चीजे ना मिले ! तो दुःखी.
मिल जाए फिर भी दुःखी..
और मिल कर अगर खो जाए या खत्म हो जाए. फिर भी दुःखी.

 

जबकि ज्यादातर लोग ये बात जानते हुए भी, की ये सब हमेशा के लिए नहीं रहना वाला..

 

ये सब चीजे एक दिन बदल जाएंगी या खत्म हो जाएंगी.

 

यही वजह है की इसी भाग दौड़ मे, इंसान खुद का सुकून खो देता है.

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मन ही मन फकीर कहता है. की ये ज्ञान भरी बात शंकर जानता था.

 

वो बहुत ही सुलझा हुआ इंसान था. यही वजह है की उसे कोई फर्क नहीं पड़ता था ज़ब उसकी life मे उतार चढ़ाव आते थे.

 

वो हमेशा खुश रहता था. और जिंदगी को सुकून भरे मन से खुल कर जीता था.

 

क्योंकि ये जिंदगी भी तो एक दिन खत्म ही होनी है.

 

इसलिए दोस्तों हमेशा याद रखो… जीवन मे ज़ब भी आप बुरे दौर से गुजर रहे हों. तमाम मुश्किलों से घिरे हो. तो दुःखी ना हो और चिंता ना करें.

 

क्योंकि दुःखी रह कर या चिंता करने से, आपकी समस्याए खत्म नहीं होंगी बल्कि और बढ़ जाएंगी.

 

इसलिए बुरे वक़्त मे ईश्वर को दिल से याद करो प्रार्थना करो. समस्या को खत्म करने पर शांत मन से विचार करो.

 

और एक बात हमेशा याद रखना वक़्त और परिस्थितियां हमेशा एक सी नहीं रहती, बदलती रहती है.

आज बुरा वक़्त है तो कल को अच्छा वक़्त भी आएगा..

 

ज़ब अच्छे दिन अधिक समय तक नहीं रहते तो बुरे दिन भी बीत जाएंगे.

 

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तो दोस्तों यह hindi  moral stories आपको कैसी लगी? उम्मीद करता हूं इस moral story से आप बहुत सी ज्ञान की बातें सीखे होंगे. 

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.चलिए अब बढ़ते है अगली moral stories की तरफ. 

 

चांदी का थैला और चार शब्दों की प्रार्थना | great moral story in hindi 

 

Moral-story
Picture

 

एक व्यक्ति मृत्यु के बहुत करीब था.वो मरने वाला था.

उसने अपने बेटे को चांदी से भरा हुआ एक थैला दिया.

 

और उसने अपने पुत्र को बताया ज़ब भी इस थैले से चांदी के सिक्के खत्म हो जाए.

 

तो 4 शब्दों की एक प्रार्थना को दिल से बोलना. ये थैला चांदी के सिक्कों से फिर भर जाएगा.

 

पिता ने बेटे के कान मे वो वो 4 शब्दों की प्रार्थना बोल दी. बोलते ही पिता मर गया.

 

इधर बेटा पिता के मरने से कुछ दिन बहुत दुःखी रहा लेकिन चांदी से भरे थैले को देख कर हमेशा खुश होता रहता.

 

अब बेटा, उन चांदी के सिक्कों को एक एक कर के रोज अपनी जरूरतों को और शौक को पूरा करने के लिए थोड़ा थोड़ा खर्च करता रहता.

 

 

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थैला इतना बड़ा था की उसे उन सिक्कों को खर्च करने मे कई साल बीत गए.

 

लेकिन इस बीच वो 4 शब्दों की प्रार्थना ही भूल गया.

 

 

ज़ब थैला खत्म होने को आया तो वह उसे याद आया की, “अरे वो चार शब्दों की प्रार्थना क्या थीं, जो पिता ने मेरे कानो मे बताई थीं.

 

उसने बहुत कोशिश की लेकिन उसे याद ही नहीं आया.

 

अब वो लोगो से पूछने लगा

, पहले परोसी से पूछा की क्या ” कोई ऐसी प्रार्थना जानते हो जिसमे 4 शब्द है.

 

पड़ोसी ने kaha! हाँ, एक 4 शब्दों की प्रार्थना मुझे मालूम है. “ईश्वर मेरी मदद करो”

 

ये सुन उसे लगा की नहीं ! ये वो शब्द नहीं है.

उसने बहुत सारे 4 शब्दों वाली प्रार्थनाओ को बार बार दोहरा कर देखा..

 

लेकिन उस खाली थैले मे सिक्के बढ़े ही नहीं.

वो मन ही मन बहुत दुःखी हो गया.

 

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फिर वो एक ब्राम्हण के पास गया. ब्राम्हण ने भी उसे एक 4 शब्दों की प्रार्थना बताई.. ब्राम्हण ने बोला की “ईश्वर तुम महान हो “

 

 

लेकिन इस प्रार्थना से भी कुछ नहीं हुआ.

 

फिर उसे एक धनी इंसान मिला, उसने कहा की तुम ये प्रार्थना करो. “ईश्वर मुझे धन दो “

 

लेकिन इस प्रार्थना से भी कुछ नहीं हुआ.

 

अब वो उदास हो कर अपने घर लौट गया. इतने मे वहाँ एक भिखारी आया.

 

भिखारी बोला की मे सुबह से कुछ नहीं खाया.. कुछ खिला दो मालिक. मालिक तुम्हे खूब बरकत देखा सुखी रखेगा.

 

 

भिखारी की बातें सुन उस लड़के ने तुरंत बचा हुआ खाना उस भिखारी को दे दिया.

 

उस भिखारी ने खाना खा कर ईश्वर से प्रार्थना की.

*“हे ईश्वर तुम्हारा धन्यवाद”*

 

भिखारी के मु से निकली 4 शब्दों की इस प्रार्थना को सुन अचानक लड़का चौक पड़ा.

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और चिल्लाने लगा. “अरे यहीं तो वो 4 शब्द थे.

 

बस फिर क्या था लड़के ने प्रार्थना के वो 4 शब्द दोहराने शुरू कर दिये.. देखते ही देखते थैला चांदी के सिक्कों से भर गया.

 

 

चलिए जानते है इस moral stories से क्या सीख मिलती है.

 

तो दोस्तों ये कहानी भी हमारी जिंदगी से ही जुड़ी है.

अब मान लो चांदी का वो थैला हमारी जिंदगी है और वो चांदी के सिक्के खुशियाँ है.

 

ज़ब तक हम अपनी जिंदगी मे शिकायत करते रहते है, परेशान होते रहते है.

 

तब तक हमारी जिंदगी के थैले मे मे वो खुशियों के सिक्के आते ही नहीं.

 

लेकिन ज़ब हम सारी शिकायते भूल कर ईश्वर को दिल से याद करते है प्रार्थना करते हुए परमात्मा को दिल से धन्यवाद देते है.

 

तो हमारी जिंदगी मे खुशियों के सिक्के भरने लगते है.

 

याद रखना जो इंसान हमेशा शिकायतों से भरा रहता है. वो कभी खुश नहीं रह सकता.

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और जो इंसान, जिसके पास जो है उतने से ही संतुष्ट है !

 

तो वो किसी भी हालात मे ईश्वर को धन्यवाद करता रहेगा.

 

ऐसे इंसान आपको हमेशा खुश दिखाई देंगे.

क्योंकि ऐसे लोग कभी किसी से शिकायत नहीं करते. ऐसे इंसानों की जिंदगी आपको हमेशा एक शांती और सुकून से भरी दिखाई देगा.

 

तो दोस्तों उम्मीद करता हूं इन दोनों कहानियों से आप बहुत कुछ सीखे होंगे.

 

 चलिये जानते है इस moral story से हमे क्या सीख मिलती है ?

तो दोस्तों यह moral stories आपको कैसी लगी? उम्मीद करता हूं इस moral story से आप बहुत सी ज्ञान की बातें सीखे होंगे. 

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.चलिए अब बढ़ते है अगली moral stories की तरफ. 

 

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चिड़िया का घोषला | moral with story in hindi 

 

Moral story

एक चिड़िया ने एक खेत मे अपना घोंसला बना कर उसमे अंडे दिये. उसमे समय आने पर दो बच्चे निकले.

 

चिड़िया बच्चो की भूख मिटाने के लिए दाना चुगने के लिए रोज गांव की तरफ जाती.
और इस बीच  वहाँ पर चिड़िया के बच्चे अकेले ही रहते थे.

 

Chiriya ki kahani

इधर चिड़िया ज़ब लौट कर आती तो बच्चे बहुत खुश होते. चिड़िया अपने बच्चो की भूख मिटाती.

 

एक दिन चिड़िया देखा बच्चे बहुत डरे हुए है. बच्चो ने बताया की आज खेत का मालिक आया था.

 

उसने कहा फसल पक चुकी है कल बेटों से फसल की कटाई के लिए कहेगा.

 

इस तरह तो हमारा घोंसला तो टूट जाएगा फिर हम कहाँ जाएंगे.

 

चिड़िया माँ बोली, फ़िक्र मत करो. अभी खेत नहीं कटेगा, और अगले दिन सच्च मे कुछ नहीं हुआ. बच्चे बेफिक्र हो गए.

 

 

कुछ दिन बाद चिड़िया को अपने बच्चे फिर से डरे हुए मिले, बच्चे बोलने लगे की माँ वो किसान फिर आया था..

 

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और कह रहा था की कल नौकरो को कह कर खेत को कटवाएगा.

 

इस बार चिड़िया की माँ फिर से बोली की फ़िक्र मत करो बच्चों. कुछ नहीं होगा.

 

कुछ दिन बाद चिड़िया के बच्चे फिर से डरे हुए मिले..

 

बच्चो ने बताया की आज किसान फिर आया था और वो बोल रहा था की फसल कटाई मे बहुत देर हो गई है कल वो खुद आकर फसल को काटेगा.

 

इस बार ये सुन कर चिड़िया बच्चो से बोली, अब खेत कल पक्का कट जाएगा.

 

इस बार चिड़िया अपने बच्चो को लेकर तुरंत एक सुरक्षित स्थान पर चली गई.

 

चलिए जानते है इस moral stories से क्या सीख मिलती है

 

बच्चे बहुत हैरान थे. और अपनी माँ से पूछने लगे की तुम्हे कैसे पता की इस बार फसल जरूर कट जाएगी..

 

माँ बोली. ज़ब तक कोई इंसान किसी काम के लिए दूसरों पर निर्भर होता है तो उसके काम को संपन्न होने मे हमेशा संदेह बना रहता है.

 

लेकिन ज़ब कोई इंसान अपने काम को खुद करने की ठान लेता है. तो वो काम जरूर होता है.

 

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तो दोस्तों ये कहानी भी हमें शिक्षा देती है की ज़ब तक हम दूसरों पर डिपेंड रहते है.

 

दूसरों के भरोसे चलते रहते है. तब तक कोई भी काम ढंग से या समय से नहीं होता.

 

लेकिन जिस दिन हम अपने सारे काम अपने हाथ मे लें लेते है. अपने हर काम मे हम खुद जुड़ जाते है. तो हमारे वो सारे काम जरूर पूरे होते है.

 

तो दोस्तों यह moral stories आपको कैसी लगी? उम्मीद करता हूं इस moral story से आप बहुत सी ज्ञान की बातें सीखे होंगे. 

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चलिए अब बढ़ते है अगली moral stories की तरफ. 

 

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मेहनत !आने वाले कल के लिए – hindi moral story 

एक गांव मे रोहन और सोहन नाम के दो दोस्त हुआ करते थे. दोनों बहुत अच्छे मित्र थे.

दोनों एक दिन बड़े हो गए और अब उनकी जरूरते बढ़ने लगी.

 

दो ओ बहुत ही मेहनती थे और बड़े बड़े सपने थे दोनों के.गांव मे तो कोई काम था नहीं. 

 

एक दिन दोनों ने अखवार मे नौकरी का एक इस्तिहार देखा.

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उसमे लिखा था उनके बगल के गांव मे एक अमीर आदमी वाटर प्लांट लगने वाला है जिसमे पानी को शद्ध करके पीने लायक बनाया जा सकें..

 

वहीं दूर गांव मे एक बहुत ऊचाई पर एक बहुत बड़ा तालाब था. लेकिन उसका पानी बहुत गन्दा था. जहरीला हो गया था.

 

अब इतनी ऊचाई से उस तालाब से पानी लाने के लिए सेठ को कुछ मजदूरों की जरुरत थीं जो मेहनती हो.

 

ये नौकरी बगल के गांव मे थीं. रोहन और सोहन दोनों अगले ही दिन नौकरी लेने बगल के गांव पहुँच गए.

 

सेठ बोल वो गांव की ऊचाई पर एक तालाब है आपको वहाँ से रोज कम से कम तीन बाल्टी पानी भर कर लाना है.

 

सेठ बोला एक बाल्टी पानी लाने का तुम्हे ₹10 दूंगा..

 

उस समय ₹10 की कीमत आज के 100₹ के बराबर थीं.

दोनों ने बोला हा ठीक है कर देंगे.
अब ये अग्रीमेंट पक्का हो गया. दोनों की नौकरी लग गई.

 

दोनों बहुत खुश हुए. अब दोनों रोज तीन बाल्टी पानी भर कर ला देते. कुछ दिन ऐसे ही काम चलता रहा.

 

दोनों के पास पैसे आने लगे. दोनों को मजा आगया की यार ये तो बड़ा अच्छा काम मिल गया.

 

एक दिन रोहन के दिमाग़ मे भविष्य यानी आने वाले कल को लेकर एक चिंता सताने लगी.

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सोहन ने रोहन को चिंतित देखा तो पूछ लिया की क्या हुआ? इतना चिंतित क्यों दिखाई दे रहे हो.? अब किस चीज की कमी है तुम्हे?

 

रोहन बोला, यार आज तो हम किसी तरह ये काम कर रहे है लेकिन कल को क्या होगा यानी भविष्य मे. ज़ब हम एक दिन बूढ़े हो जाएंगे तब क्या होगा.

 

 

तब हमारे शरीर मे इतनी हिम्मत ही नहीं होगी की काम कर पाए…

 

 

तो ज़ब काम ही नहीं कर पाएंगे तो पैसा कैसे आएगा…तब क्या होगा हमारा कैसे जियेंगे?

 

सोहन बोला – अरे ये तू अब क्या फालतू का सोच रहा है.. आज की सोच. कल किसने देखा है.

 

रोहन बोला – नहीं मे कल की सोचूंगा..

सोहन बोला – अच्छा ठीक है बता फिर क्या करेगा.?

 

रोहन बोला – मे एक पाइप लाइन बिछा दूंगा. एक बार की मेहनत है, पागल सोच कर देख. आने वाले time मे काम ही नहीं करना पड़ेगा फिर भी पैसे आते रहेंगे.

 

सोहम बोला – तेरा दिमाग़ खराब है, पाइप लाइन के लिए पैसा तेरा बाप देगा? कैसे बिछाएगा पाइप लाइन.

 

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और फिर अगर पापी लाइन बिछाने का काम करते भी है तो.. मे आज कैसे खाऊंगा.. इतनी लम्बी पाइप लाइन बिछाते बिछाते 1 साल बीत जाएंगे.

 

एक साल कैसे गुजारा करेगा? जो कमाएगा वो पाइप बिछाने मे लगाएगा तो खाएगा क्या.?

 

 

सोहन बोला अरे यार इतना मत सोच तब की तब देखी जाएगी अभी जैसा चल रहा वैसा चलने दो.. मे कल की चिंता नई करता.

 

अब रोहन बोला – नहीं यार. मेने जो सोचा है वो कर के रहूंगा… तू बता साथ देगा या नहीं..

 

और एक साल बाद मान लें तेरा पैर टूट गया. तब क्या करेगा.

मेरे भाई तो समझ नहीं रहा. हमेशा भविष्य को साथ मे लेकर चलना पड़ता है.

सोहन बोला – देख भाई मुझे तेरे प्लान मे कोई इंट्रेस्ट नहीं है और ना भरोसा… तू फालतू मे पागलो जैसे बात कर रहा है. लगता है सारी जिंदगी ग़रीबी मे ही जीना चाहता है.

 

रोहन बोला – ठीक है फिर तुझे जो सही लगे तू वो कर और मुझे जो सही लगता है वो मैं करूंगा..

 

 

अब अगले दिन से दोनों अपने अपने काम मे लग गए.

सोहन अब रोज ज़ादा पैसा कमाने के लिए तीन की जगह 5 बाल्टी लाने लगा.

 

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इधर रोहन के बस बहुत पैसा जमा था. वो सारा पैसा खर्च करके पाइप खरीद लाया.

 

कुछ पैसा वो बस अपना पेट भरने के लिए निकाल लेता.

 

अब रोहन एक बार मे दो बाल्टी ही लाता और बाक़ी का समय और पैसा बचा कर पाइप लाइन बिछाने मे लगाता..

 

 

यानी 25% काम रोहन बाल्टी भरने मे करता और 75% काम सोहन पाइप लाइन बिछाने मे लगाता.

 

इधर धीरे धीरे समय बीतता गए..ठीक एक साल बाद सोहन बहुत अमीर हो गए. उसने एक अच्छा घर और गाड़ी भी खरीद ली..

 

 

इधर रोहन अब भी वैसा की वैसा ही था.

 

अब सोहन, रोहन से बोलता है ये देख. मैंने बताया था तेरा फैसला गलत है तू गलत जगह दिमाग़ लगा रहा है.

 

इधर सोहन की हालात खराब.. खाने तक को पैसे कम पड़ने लगे.. लेकिन रोहन अब भी पूरे विश्वास और पूरी ईमानदारी से अपना काम करता रहता.

 

 

इधर सोहन ने शादी कर ली. मस्त अपनी वाइफ के साथ रहने लगा.. रोज पैसे आते थे.

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लेकिन अब एक दिन वहीं हुआ जो होना था. रोहन की पाइप लाइन बन कर तैयार हो गई.

 

अब, रोहन को पानी भरने के लिए ऊपर जाना नहीं पड़ता था.

रोहन ने नीचे पाइप लाइन के मुँह के आगे एक ढक्कन लगा रखा था.

 

रोहन जैसे ही ढक्क्न खोलता पानी ही पानी.

इधर सोहन ने जितना पैसा 5 साल मे कमाया था, बाल्टियां ढो ढो के – ढो ढो के.

 

रोहन ने 3 महीने मे कमा लिया. अब रोहन के पास भी गाड़ी आगी.. कुछ समय बाद रोहन ने शादी कर दी.. life स्टाइल सोहन से भी अच्छी हो गई.

 

अब रोहन जिस दिन काम नहीं भी करता था तब भी पैसे आते थे.

 

इधर सोहन आज भी बाल्टी भरता था तभी पैसे आते थे..

 

इधर रोहन जब भी बीमार पड़ता तब भी उसको पैसे आते..

 

रोहन बीवी बच्चो के साथ घूमने जाता तब भी पैसे आते..

 

लेकिन उधर बाल्टी भर भर के सोहन की हालत खराब.

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अब सोहन बूढ़ा होने को आया.. उसकी हड्डिया साथ नहीं दे रही थीं शरीर मे अब हिम्मत नहीं थीं..

 

 

आर्थिक हालत खराब होने लगी. जो कुछ कमाया था सब दवाई पानी मे लगने लगा खाने को लाले पड़ गए..

 

अब घर की आर्थिक हालत सही करने के लिए वहीं मेहनत अब उसके बेटे को करनी पड़ती.

 

 

लेकिन इधर रोहन आज भी बड़े मज़े से पैसे कमा रहा है. रोहन मर जाएगा. फिर भी पैसा आता रहेगा.

 

 

इधर सोहन अब बहुत पछता रहा और खुद को कोस रहा.. की रोहन सही बोल रहा था..

तो दोस्तों इस कहानियाँ से ये सीख मिलती है.. की काम हमेशा भविष्य को ध्यान मे रख कर करो ताकी भविष्य मे तुम्हे पछताना ना पड़े.

 

 

आपकी आज की मेहनत और लगन आने वाले कल के भविष्य की बुनियाद को मजबूत बनाती है.

दूसरी सीखा ये मिलती है की.. मेहनत सही दिशा मे करो. गलत दिशा मे मेहनत करके कोई फायदा नहीं.

यानी जीवन मे भविष्य को ध्यान मे रख कर एक लक्ष्य को पाने मे मेहनत करो.

साथ मे यह भी सोच कर मेहनत करो की यदि कल को मुझे कुछ हो गए तो क्या होगा.

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तो दोस्तों यह moral stories आपको कैसी लगी? उम्मीद करता हूं इस moral story से आप बहुत सी ज्ञान की बातें सीखे होंगे. 

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दोस्तों यदि आप इन moral stories की  videos 🎥 देखना चाहते हो यहां पर click करें. 

 

.चलिए अब बढ़ते है अगली moral stories की तरफ. 

Moral story नंबर -5

 

ग़रीबी का  संघर्ष | अद्भुत moral stories 

वो कहते है ना की ज़ब इंसान गरीबी के बुरे दौर से गुजर रहा होता है और एक संघर्ष भरी जिंदगी जी रहा होता है.

तब उसके अंदर वो जिंदगी के चेलेंज को एक oppertunity मे बदलने की काबिलियत आजाती है.

वो हर छोटे से छोटा काम भी करने को तैयार हो जाता है.

तो ऐसी ही एक रियल life कहानी (moral stories) आज मे आपको सुनाने जा रहा हूं…

 

ये कहानी है एक ऐसे गरीब परिवार की जहाँ दो वक़्त की रोटी भी बहुत मुश्किल से नसीब हो पाती थीं.

इस परिवार ने अब तब अपनी जिंदगी मे बहुत संघर्ष भरे दिन देखें थे. लेकिन एक दिन….

 

पिता ने अपने बेटे को अपने पास बुलाया और पूछा की बेटा ये जो पुरानी सी t-शर्ट तुम टंगी हुई देख रहे हो ना .. जरा बताओ ये कितने की होगी?

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तो बेटा बोला की पापा ये t-शर्ट यही कुछ एक आद डॉलर की होगी.

 

 

तो इस पर पिता ने बोला की बेटा आज इस t-शर्ट को तुम्हे मार्किट लें कर जाना है और इसे बेच कर आना है लेकिन ध्यान रहे. इसे दो डॉलर मे बेचना है.

अब ये कैसे करना है? ये तुम सोचो.

 

 

दोस्तों अभी यहां पर ध्यान देने वाली बात ये है की बच्चे ने, ना नहीं कहा.
जानते हो क्यों…?

 

क्योंकि बच्चे के दिमाग़ मे एक ही बात बार बार आती रहती की उसका परिवार माँ चाचा ताया भाई हर कोई इस समय ग़रीबी के बुरे हालात से गुजर रहा है.

 

अब उस बच्चे को लगा की शायद परिवार की मदद करने का वक़्त आगया है.

 

तो अब मुझे कैसे भी करके ये t -शर्ट 2 डॉलर मे बेचनी ही है.

 

 

अब बच्चा बस ये सोचने लगा की इस t-शर्ट को दो डॉलर मे कैसे बेचू..

 

बच्चा हाथ मे t-शर्ट लिए घर से बाहर निकला और मार्किट की तरफ चल दिया.

 

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रास्ते भर बच्चा हाथ मे लिए उस टीशर्ट को देखता रहा.

 

हालांकि उस t-शर्ट की हालत ऐसी थीं की कोई उसे 1 डॉलर मे भी ना खरीदे.

 

रास्ते मे एक आदमी दिखा जो कपड़ो को प्रेस कर रहा था.

 

बच्चा आदमी के पास गया और आदमी को t-शर्ट दिखाते हुए बड़ी मासूमियत से बोला की plz इसको प्रेस कर दो..

 

प्रेस वाला आदमी उसके मासूम से चेहरे को देख कर पिघल गया और तुरंत शर्ट प्रेस करके दे दी.

बच्चा खुश हो कर तुरंत वो t shirt लेकर बाजार गया…

 

बच्चा बाजार मे खड़ा हो कर ऊंची आवाज़ मे टी शर्ट बेचता रहा.. लेकिन किसी ने नहीं ली..

कुछ लोग बच्चे के पास आते तो कोई भी उस टी शर्ट के 2$ देने को राजी ना होता.

 

आखिर कर शाम होने को आई.. और एक आदमी ने वो टी शर्ट 2$ मे ख़रीद ली.

 

बच्चे के निराश चेहरे पर मुसकान आगई और बच्चा आत्मविश्वास से भर गया..

बच्चा तुरंत पैसे लेकर पिताजी के पास गया और पैसे देते हुए बोला पिता जी मेने t-शर्ट दो डॉलर मे बेच दी.

 

पिता ने कल बचे को एक और टी शर्ट दिखाया और बोले ये लो.. इस छोटी से टी शर्ट को आज तुम्हे 20$ मे बेच कर आना है.

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इधर बच्चे ने फिर से ना नहीं किया. बच्चे ने फिर दिमाग़ लगाया की क्या करू. कुछ देर सोचने के बाद बच्चे के दिमाग़ मे idea आया..

 

बच्चा टी शर्ट को लेकर ऊपर कमरे मे गया और एक बहुत ही प्यारा सा मिकी माउस का स्टिकर उस टी शर्ट मे लगा दिया.

 

बच्चा अब वो टी शर्ट लें कर इस बार एक ऐसे स्कूल गेट के बाहर खड़ा हो गया जहाँ बहुत अमीर लोगो के बच्चे पढ़ते थे.

 

T- शर्ट पर लगे स्टिकर की वजह से टी शर्ट बहुत अट्रेक्टिव दिखाई दे रही थीं.

 

स्कुल की घंटी बजी और बच्चे स्कुल के गेट से निकलने शुरू हो गए.

 

बच्चे के हाथ मे वो मिकी माउस वाला टी शर्ट देख कुछ बच्चे वहाँ रुक गए. एक बच्चे को वो टी शर्ट बहुत पसंद आया,

 

बच्चा अपने पापा से बहुत ज़िद्द करने लगा की ये टी शर्ट मुझे चाहिए.

 

बच्चे के पापा ने तुरंत 20 $ देकर वो t-शर्ट खरीद ली. सिर्फ यही नहीं उसके पापा ये देख बहुत खुश भी हुए की एक छोटा सा बच्चा इतनी प्यारी क्रिएटिविटी कर के लाया है.

 

इसलिए उस आदमी ने उस गरीब बच्चे को 5$ एक्स्ट्रा दिये.

 

इधर वो गरीब बच्चा बहुत खुश हुआ और पैसे लेकर अपने पापा के पास पंहुचा.

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गरीब बच्चे के पापा खुश तो हुए.. पर अभी भी सतुष्ट नहीं थे..

 

इसलिए इस बार पापा ने अपने बच्चे को फिर से एक पुरानी सी टी शर्ट दिखाई. और इस बार बोले की बेटा ये टी शर्ट 6$ डॉलर की है.

और कल ! ये टी शर्ट तुम्हे 200$ मे बेच कर आना है.

 

और मुझे तुम्हारी होशियारी और काबिलियत पर पूरा यकीन है. की तुम ये कर दिखाओगे.

 

अब ताज्जुब की बात ये है की बच्चे ने इस बार भी ना नहीं किया.

 

उल्टा पिता की बात सुन कर हौसले से भर गया.

 

इधर रात भर बच्चा दिमाग़ लगाता रहा. परिवार की हालात के बारे सोच कर बच्चे को नींद भी नहीं आरही थीं..

 

सुबह होते ही बच्चे को खबर मिली की आज उनके शहर मे एक बहुत ही फेमस फ़िल्म एक्टर अपनी आने वाली नई फ़िल्म की प्रमोशन के लिए आने वाली है.

 

जिसके इंतज़ाम मे बहुत बड़ा इवेंट रखा गया था. बच्चा तुरंत हाथ मे टी शर्ट लिए उस इवेंट मे पहुंच गया.

 

आखिर कार ज़ब वहाँ एक्टर पहुँचती है तो वहाँ पर जमा भीड़ मे बच्चा सबसे आगे खड़ा होता है.

 

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और हाथ मे t-शर्ट को हिलाते हुए चिल्ला चिल्ला कर बोलता है की. मैं आपका बहुत बड़ा फैन हूं.

 

तमाम लोगो की आवाज़ मे बच्चे की आवाज़ दब रही थीं. लेकिन बच्चा वहाँ से हट कर कुछ और आगे की तरफ गया..

 

अबकी बार बच्चे की मासूम भरी आवाज़ उस एक्टर के कानो मे पड़ी.

इधर उस एक्टर की नजरें उस बच्चे की तरफ अट्रेक्ट हुई.

एक्ट्रेस बोली की ये तो बहुत छोटा सा और क्यूट सा फैन आया हुआ है. एक्टर ने उस बच्चे को आगे बुलाया.

अब इस बच्चे ने उस टी शर्ट पर उस एक्टर का ऑटोग्राफ लें लिया..

ऑटोग्राफ लेने के बाद बच्चा फिर से भीड़ मे चला गया और लोगो को वो टी शर्ट दिखाने लगा जिस पर उस एक्टर ने अभी अभी ऑटोग्राफ दिये थे.

वहाँ मौजूद लोग उस एक्टर के बहुत बड़े फैन थे..

अब हर कोई उस टी शर्ट को खरीदना चाहता था..

इसलिए वहाँ पर उस टी शर्ट की बोलियां लगनी शुरू हो गई…

कोई बोला मे 300$ दूंगा तो कोई बोला मैं 500$ दूंगा.

इस तरह करते करते वो 6$ डॉलर की टी शर्ट 2 हज़ार $ मे बिक गई.

बच्चा ख़ुशी और आत्मविश्वास से भर गया…

जानते हो ये बच्चा कौन था?

ये बच्चा था *माइकल जॉर्डन*

जी हाँ दोस्तों ये कहानी थीं अमेरिका के एक बहुत ही मशहूर बास्केट बोल प्लेयर *माइकल जॉर्डन की.

 

इस hindi moral story से हमे क्या सीख मिलती है ?

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तो दोस्तों ये कहानी हमें सिखाती है की ग़रीबी जैसी लाचारी हो या जीवन का कोई भी मुश्किल दौर.

हिम्मत हमेशा बनाए रखे और पूरे सकारात्मक मन से कोशिश करते रहे. कामयाबी जरूर मिलेगी.

अपने हालातों से घबरा कर जिंदगी से कभी हार ना माने.

क्योंकि अंतिम दम तक आपके द्वारा बार बार की जाने वाली कोशिश ही एक दिन आपको इन हालातो से पार लगा देगी.

जैसा की आपने इस कहानी मे देखा ! की. बच्चा हालात को लेकर चिंतित जरूर था लेकिन घबराया नहीं.

 

तो कमेंट करके ये बात जरूर बताना की यदि आपकी life मे मुश्किल दौर आएंगे तो आप क्या करोगे.?

 

 

तो दोस्तों यह moral stories आपको कैसी लगी? उम्मीद करता हूं इस moral story से आप बहुत सी ज्ञान की बातें सीखे होंगे. 

इस moral story  को अपने  सभी दोस्तों मे शेयर करें.

 

इन सभी कहानियों मे (top 10 moral stories) आपको कौन सि कहानी सबसे अच्छी लगी.?

दोस्तों यदि आप इन moral stories की  videos 🎥 देखना चाहते हो यहां पर click करें. 

 

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