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किसान की समझदार बेटी moral stories in Hindi

किसान की समझदार बेटी | moral stories in Hindi- दोस्तों स्वागत है आपका ज्ञान से भरी  कहानियों की इस रोचक दुनिया मे। दोस्तों जीवन मे कहानियों का विशेस महत्तव होता है |

क्योकि इन कहानियो के माध्यम से हमे बहुत कुछ सीखने को मिलता है | इन कहानियों के माध्यम से आपको ज़रूरी ज्ञान हासिल होंगे जो आपको आपकी लाइफ मे बहुत काम आएंगे |

यहाँ पर बताई गई हर कहानी से आपको एक नई सीख मिलेगी जो आपके जीवन मे बहुत काम आएगी | हर कहानी मे कुछ न कुछ संदेश और सीख (moral )छुपी हुई है | तो ऐसी कहानियो को ज़रूर पढ़े और अपने दोस्तो और परिवारों मे भी ज़रूर शेयर करे |

तो चलिये शुरू करते है हमारी आज की कहानी 

किसान की समझदार बेटी | moral stories in Hindi

 

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moral story

 

उधम पुर नाम के एक गाँव मे एक बहुत ही अमीर सेठ रहता था जिसके पास लाभग पूरे गाँव की जमीन गिरवी थी | गाँव मे एक समय बाढ़ आ जाने की वजह से  सभी किसानो के खेत मे लगी फसल  खराब हो चुकी थी  कई दिनो तक  बाढ़ का पानी भरे रहने की वजह से गाँव के किसानो को खाने के लाले पड़ गए थे |

 

तब गाँव के लोगो ने फैसला किया की अपनी जमीने लाला जी के पास गिरवी रखवा कर धन का प्रबंध कर लेते है ताकि कुछ समय तक अपना गुजारा कर सके इसके बाद जैसे ही अपने खेतो से बाढ़ का पानी सूख जाता है तो हम लोग तुरंत पुनः खेती शुरू करके फसल उगने पर आधी फसल बेच कर जो धन मिलेगा वो लाला को देते रहेंगे और जब उधर ली गई राशि पूरी तरह से व्याज सहित जमा कर देंगे तो अपना खेत लाला जी से छुड़वा लेंगे |

 

इस वजह से किसनों को अपने बीबी बच्चो का पेट पालने के लिए  गाँव के लाला के पास अपनी जमीने गिरवी रखवा कर धन उधार लेना पड़ा ताकि तीन वक्त की रोटी नसीब हो सके | इस तरह सभी किसान इकट्ठे हो कर लाला जी के पास गए और अपनी जमीन गिरवी रखवा कर लाला से धन उधार ले लिया |

 

इधर लाला जमीन के बदले मे धन उधार देने से पहले ही किसानो को  बता देता है  की   उधार ली गई यह राशी  आपको व्याज सहित 5 साल तक जमा करनी होगी | यदि न कर पाए तो यह खेत मेरा हुआ | सभी किसानो ने इस पर सहमति जताते हुए लाला के पास अपनी जमीने गिरवी रखवा दी | किसान की समझदार बेटी | moral stories in Hindi

 

गाव मे मालिक राम नाम का एक किसान था जिसकी एक बेटी थी यही कुछ 22  साल की | बेटी का नाम रोशनी था रोशनी बहुत ही तेज़ दिमाग की थी और बहुत ही  समझदार थी | रोशनी का उसके पापा के सिवा और कोई नहीं था | मालिक राम अपने गिरवी खेत मे फसल उगाता  और पकने पर बेच देता | बेचने पर जो धन मिलता वो उसे  तीन हिस्सो मे  बाट देता   |  एक हिस्सा लाला जी का , दूसरा हिस्सा घर के खर्च का , तीसरा हिस्सा बेटी की शादी के लिए रख लेता |

 

किसान की समझदार बेटी | moral stories in Hindi

हर बार की तरह लाला खुद हिसाब लेने पहुच जाया करता था | मालिक राम काम मे व्यस्त था जिस वजह से जब लाला मालिक राम को आवाज़ लगाता है तो आवाज़ मालिक राम को नहीं सुनाई देती लेकी लाला की आवाज़ सुन बेटी तुरंत बाहर आती है और लाला जी को बैठने के लिए कहती है पानी ले कर आती है | लाला रोशनी को देख कर चकित रह जाता है की यह तो बहुत ही सुंदर है | इतने मे मालिक राम लाला के पास आता है और लाला के व्याज के जो  भी पैसे बनते थे , वो लाला को दे देता है |

 

 

लाला बोलता है मालिक राम बिटिया तो सयानी हो गई है ! इसकी शादी का कुछ सोचा या नहीं |

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तब मालिक राम बोलता है ! हाँ मालिक इसके लिए एक अच्छा लड़का और परिवार खोज रहा हूँ | लाला  वहाँ से चला जाता है | घर पहुँच कर लाला राम लाल की बेटी के बारे सोचने लगता है उसका सुंदर चेहरा लाला के दिमाग पर एसा बस गया था की वो उससे अब शादी करना चाहता था |

 

किसान की समझदार बेटी | moral stories in Hindi

वक़्त बीतता गया इधर अब खेतो मे नई फसल  लगाने का समय आ चुका था  तब मालिक राम ने अपने खेत मे फिर से नई फसल की बुआई कर दी | कुछ समय तक तो सब ठीक चल रहा था फसल भी पकने को थी की अचानक मौसम ने करवट ली और तेज़  बारिश शुरू हो गई | बारिश इतनी हुई की फसल खराब हो गई थी | यह देख सब किसान बहुत दुखी थे और मजबूर भी |

 

 

कुछ दिन बाद लाला हर बार की तरह अपने पैसे लेने मालिक राम के पास आता है | मालिक राम लाला को बोलता है  मालिक इस बार सारी बारिश की वजह से आधे से जादा फसल खराब हो गई  इस बार मैं आपके पासे नहीं दे पाऊँगा | मालिक राम की यह बाट सुन लाला के मन मे तुरंत उसकी बेटी का ख्याल आता है और सोचता है की यही सही मौका है इसकी बेटी का हाथ मांगने का |

 

तब लाला – मालिक राम की मजबूरी का फाइदा उठाते हुए बोलता है  ! मलिक राम तुम्हारे लिए एक प्रस्ताव है  ! मैं तुम्हारे सारे कर्ज माफ कर सकता हूँ अगर तुम अपनी बेटी की शादी मुजसे कर दो तो |

 

किसान की समझदार बेटी | moral stories in Hindi

लाला की यह बात सुन मलिक राम और उसकी बेटी सोच मे पड़ जाते है की अब क्या किया जाए , तब मालिक राम ऐतराज जताते हुए बोलता है ! यह कैसे हो सकता है मालिक भला  मैं अपनी बेटी की शादी आपसे कैसे ?| इतना  सुन लाला गुस्से मे  बोलता है तो फिर अभी मेरा पैसा दो | 

 

बेचारा मालिक राम भी कर्ज की वजह से मजबूर था  , आखिर बोलता भी क्या |

 

मालिक राम को चुप देख , लाला इस बार  बोलता है ठीक है चलो एक एक खेल खेलते है और शर्त लगाते है  ,  मैं जमीन पर  पड़े इन तमाम पत्थरो  मे से एक काला  औए एक सफ़ेद पत्थर उस खाली मटके मे डालूँगा  फिर आपकी बेटी बिना उस मटके के अंदर देखे उसमे हाथ डाल कर कोई एक पत्थर बाहर निकालेगी| यदि पत्थर सफ़ेद हुआ तो आपको अपनी बेटी की शादी मुझसे करवानी होगी और सारा कर्ज भी माफ | और यदि काला पत्थर निकला तो आपकी बेटी को मुझसे शादी नहीं करनी होगी और आपका सारा कर्ज भी माफ कर दूंगा |

किसान की समझदार बेटी | moral stories in Hindi

 

बाप और बेटी दोनों इस बात पर अपनी सहमति जताते हुए हा बोल देते है | तब लाला जमीन से दो पत्थर  उठाता है और उस मटके मे जल्दी से डाल देता है | लाला के मन मे छल और कपट होता है इसलिए लाला   काले तथा लाल दोनों रंग के पत्थर उठाने का नाटक करता है लेकिन मटके मे सिर्फ सफ़ेद वाले पत्थर  ही डालता है | बाकी के जमीन मे फैक देता है |

 

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मालिक राम की बेटी लाला की इस हरकत को अच्छे  से देख रही थी और उसे पता चल जाता है की लाला धोखा कर रहा  वह दोनों सफ़ेद पत्थर मटके मे डाल दिया है \ लेकिन रोशनी यह सोच कर चुप थी की सच बोल दूँगी तो लाला को  धन देना होगा जिस वजह से हम भूखे मर जाएंगे  |  यदि नहीं बताया तो मेरी शादी उसके साठा कर दी जाएगी |हालत को देखते हुए रोशनी बहुत मजबूर थी | 

रोशनी इस स्थिति मे अपना धैर्य बनाए रखती है और ठंडे दिमाग से काम लेती है | वह कुछ सोच विचार करती है की ईएसए क्या करू की इस लाला की चाल से बचा जा सके |तब रोशनी के दिमाग मे एक युक्ति आती है |

 

वो लाला के कहने पर मटके से  पत्थर निकालने चली जाती है | मटके से एक पत्थर निकाल कर वो जैसे ही  लाला को देने जाती है  उसी समय झूठ मूट  का जमीन  पर  गिर जाती है जिस वजह से रोशनी के हाथ का  पत्थर ज़मीन मे पड़े हुए तमाम पत्थरो से मिल जाता है |

किसान की समझदार बेटी | moral stories in Hindi

 

यह देख लाला चिल्ला उठता है की   मूर्ख लड़की यह क्या किया ! अब कैसे पता चलेगा की तुमने  कौन से रंग का  पत्थर निकाला था मटके से  ?

तब रोशनी बोलती है मैंने मटके से जो पत्थर निकाला था उसका रंग काला था |

 

यह सुन लाला बोलता है मैं कैसे मान  लू ,  यह हो ही नहीं सकता , तुम झूठ बोल रही हो |

 

तब रोशनी बोलती है  – यकीन नहीं होता तो  उस मटके मे जो पत्थर है उसे निकाल कर देख लो , यदि पत्थर सफ़ेद हुआ तो साबित हो जाएगा की मैंने काला पत्थर निकाला था | 

रोशनी की यह बात सुन लाला हक्का बक्का रह जाता है लाला के  मुह से तो मानो आवाज ही चली जाती है गला  सूख जाता है की यह क्या हुआ ? अपने ही जाल मे, मैं खुद फस गया ? 

 

शर्त के मुताबिक अब लाला को मालिक राम का सारा कर्जा माफ करना पड़ता है | लाला वहाँ  से उदास मुह ले कर घर लौट जाता है | 

 

इधर रोशनी ने जब अपने पिता को सब बताया तो मालिक राम अपनी बेटी की इस समझदारी पर बहुत खुश हुआ | 

 

तो देखा दोस्तो  कैसे एक किसान की समझदार बेटी ने  मुश्किल समय मे बुद्धिमानी से कम लिया |

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किसान की समझदार बेटी moral stories in Hindi से सीख

moral- सीख – इस कहानी से हमे यह सीख मिलती है की मुश्किल समय मे हमेशा धैर्य और बुद्धिमानी से काम लेना चाहिए |किसान की समझदार बेटी | moral stories in Hindi

 

 

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